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पत्थरबाजों पर सवाल से भड़के फारुख अब्दुल्ला, कहा- आपको देश की पड़ी है, क्या देश को इन नौजवानों के भविष्य की चिंता है

फारूख अब्दुल्ला ने कहा कि कश्मीर में पत्थर फेंकने वाले सारे नौजवान एक जैसे नहीं होते हैं। उन्होंने ये भी सवाल उठाया कि क्या देश इन नौजवानों के भविष्य को लेकर चिंतित है।

जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूख अब्दुल्ला। (File Photo)

जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारुख अब्दुल्ला ने राज्य की बीजेपी-पीडीपी सरकार पर गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने कहा है कि राज्य के कई पत्थरबाजों को सरकार पैसा देती है। फारुख अब्दुल्ला के मुताबिक इस बार के  उपचुनाव में भी जमकर पत्थरबाजी की गई, और इसका मकसद लोगों के बीच खौफ कायम करना था ताकि लोग वोट देने ना निकल सकें। नेशनल कॉन्फ्रेंस के प्रेसिडेंट फारुख अब्दुल्ला ने मामले में जांच की जरुरत बताई है। बता दें कि कश्मीर में पत्थरबाजी एक धंधा के तौर पर विकसित हो चुका है। और अलगाववादी संगठनों पर पैसे देकर नौजवानों को पत्थर फेंकने के लिए लालच देने का आरोप लगा है। लेकिन फारुख अब्दुल्ला ने इस मामले में राज्य की मुहबूबा मुफ्ती सरकार पर आरोप लगाकर इस पूरे मामले को नया मोड दे दिया है।

फारुख अब्दुल्ला ने ये भी कहा कि कश्मीर में पत्थर फेंकने वाले सारे नौजवान एक जैसे नहीं होते हैं। उन्होंने ये भी सवाल उठाया कि क्या देश इन नौजवानों के भविष्य को लेकर चिंतित है। इससे पहले 5 अप्रैल को फारूख अब्दुल्ला ने पत्थरबाजों का समर्थन किया था और कहा था कि वे (पत्थर फेंकने वाले नौजवान) भूखों मर जाएंगे लेकिन अपने वतन के लिए ऐसा करते रहेंगे, ये लोग कश्मीर मुद्दे के हल के लिए अपनी जान दे रहे हैं हम लोगों को ये समझने की जरूरत है।’

बैसाखी के एक कार्यक्रम में शिरकत करने पहुंचे फारूख अब्दुल्ला ने जब पत्रकारों ने पूछा कि क्या वे पत्थरबाजों के समर्थन में बयान देकर देश की भावनाओं के साथ खिलवाड़ नहीं कर रहे हैं तो उन्होंने कहा कि देश की भावनाएं से आपका क्या मतलब है, आपको देखना होगा कि इन नौजवानों की दिक्कत क्या है, क्या आपको नहीं लगता कि इन्हें भी कुछ परेशानी है, आपको सिर्फ देश की पड़ी है, क्या देश को इन नौजवानों और इनके भविष्य की चिंता है।

बता दें कि कश्मीर के अलग अलग इलाकों में सेना, कश्मीर पुलिस पर पत्थर फेंकने वाले लोग कश्मीरी युवा हैं। इन युवाओं को अलगाववादी पैसे का लालच देकर अपने मुहिम में शामिल करते हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इन पत्थरबाजों को एक महीने में 5 से 15 हजार रुपये तक दिया जाता है। अलगाववादी नेता इस मुहिम में मासूम बच्चों को भी शामिल कर लेते हैं।

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