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मुफ्ती की बेटी की रिहाई के बदले आतंकियों को छोड़ने के लिए तैयार नहीं थे फारुख

फारुख से बातचीत करने के लिए तत्कालीन वीपी सिंह सरकार में विदेश मंत्री इंद्र कुमार गुजराल और नागरिक उड्डयन मंत्री आरिफ खान आए थे।

Author नई दिल्ली | Updated: December 3, 2017 3:32 PM
जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्य मंत्री फारुख अब्‍दुल्‍ला। (फाइल फोटो)

जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारुख अब्दुल्ला मुफ्ती मोहम्मद सईद की बेटी रुबिया सईद के बदले आतंकियों को छोड़ने के लिए तैयार नहीं थे। इस मसले पर उनसे बातचीत करने के लिए तत्कालीन वीपी सिंह सरकार में विदेश मंत्री इंद्र कुमार गुजराल और नागरिक उड्डयन मंत्री आरिफ खान श्रीनगर गए थे। उनके साथ उस वक्त आईबी के प्रमुख रहे एएस दुलत भी थे। पूर्व केंद्रीय मंत्री ने बताया कि उनलोगाें ने उन पर आतंकियों को छोड़ने का दबाव बनाया था, लेकिन वह नहीं माने थे। इसके बावजूद उनकी बात नहीं सुनी गई और रुबिया के बदले आतंकियों को छोड़ दिया गया। फारुख अब्दुल्ला ने एक टीवी कार्यक्रम में यह बात कही। मालूम हो कि इस घटना के बाद वीपी सिंह सरकार की बहुत किरकिरी हुई थी। मुफ्ती मोहम्मद सईद उस वक्त देश के गृह मंत्री थे। मालूम हो कि 1989 के बाद से ही जम्मू-कश्मीर में आतंकी गतिविधि का नया दौर शुरू हुआ था। इसके बाद से यह समस्या लगातार गहराती जा रही है।

फारुख ने बताया कि गुजराल और आरिफ खान सर्दी के दिनों में सुबह तकरीबन चार बजे श्रीनगर पहुंचे थे। परंपरा के अनुसार सभी के लिए काबा की व्यवस्था कराई गई। इसके बाद असल मुद्दे पर बातचीत का दौर शुरू हुआ। फारुख ने खुद बात करने से इंकार कर दिया और कहा कि उनकी तरफ से उनके सचिव बात करेंगे। पूर्व सीएम ने कहा, ‘इंद्र कुमार गुजराल ने रुबिया की रिहाई के बदले जेल में बंद पांच आतंकियों को छोड़ने की बात रखी, जिसके लिए मैं तैयार नहीं हुआ था। इसक बाद उन्होंने कहा कि एक आतंकी को ही छोड़ दिया जाए। उसे ईरान भेज दिया जिसे वहां से वे लोग (आतंकियाें से जुड़े संगठन के लोग) ले जाएंगे या फिर उसे उड़ी की सीमा से जाने दिया जाए। मैं इसके लिए भी तैयार नहीं हुआ था। घायल आतंकी की एम्स या फिर अमेरिका में सरकारी खर्चे पर इलाज कराने की भी बात कही गई थी।’

फारुख ने बताया कि इस दरम्यान गुजराल ने पूरा किस्सा सुनाया। इसके बाद साथ में मौजूद आरिफ खान ने कहा कि कैबिनेट के समक्ष तो इन मसलों पर बात नहीं हुई, इसलिए हमें वापस चलना चाहिए और सहयोगियों को भी इस बारे में जानकारी दी जानी चाहिए। तब गुजराल बोले कि उन्हें तो हुक्म दिया गया है कि शर्त नहीं मानने की स्थिति में फारुख अब्दुल्ला की सरकार को बर्खास्त कर दिया जाए। पूर्व सीएम के अनुसार, उस वक्त मैंने अपने सचिव को यह बात नोट करने को कहा कि जो इस वक्त के बाद से जो कुछ भी होगा उसकी जिम्मेदारी राज्य सरकार की नहीं बल्कि केंद्र सरकार की होगी।

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