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ट्रैक्टर परेड के लिए किसान तैयार,आज सड़क पर, एक फरवरी को संसद कूच

किसानों ने गणतंत्र दिवस के मौके पर मंगलवार को ट्रैक्टर परेड के लिए बड़े स्तर पर तैयारी की है। ट्रैक्टर परेड को लेकर दिल्ली में बहुस्तरीय सुरक्षा के जबरदस्त इंतजाम किए गए हैं।

नई दिल्‍ली | January 26, 2021 8:59 AM
किसानों ने की ट्रैक्‍टर रैली की तैयारी। फाइल फोटो।

जगह-जगह सशस्त्र सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया है। ट्रैक्टर परेड सुबह 11:30 बजे शुरू होने की संभावना है और इसके 10 से 12 घंटे तक चलने की उम्मीद है।

किसान संघों ने कहा है कि उनकी परेड मध्य दिल्ली में प्रवेश नहीं करेगा और यह गणतंत्र दिवस पर होने वाली आधिकारिक परेड के समापन के बाद ही शुरू होगी। किसान संघों ने दावा किया है कि उनकी परेड में करीब दो लाख ट्रैक्टरों के हिस्सा लेने की उम्मीद है और यह सिंघू बॉर्डर, टिकरी बॉर्डर व गाजीपुर (यूपी गेट) से चलेगी।

हरियाणा, पंजाब और पश्चिमी उत्तर प्रदेश से बड़ी संख्या में किसान ट्रैक्टर लेकर दिल्ली की सीमाओं पर पहुंच गए हैं। दिल्ली की सीमा पर तीन स्थानों-सिंघू, टिकरी और गाजीपुर- पर कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे किसान ट्रैक्टर परेड की तैयारियों को अंतिम रूप देने में व्यस्त दिखे। ट्रैक्टर परेड में मुख्य आकर्षण ‘झांकी’ होंगी, जिसमें सबसे आगे ट्राली में पवित्र गुरु ग्रंथ साहिब होंगे। वाहनों को फूलों से सजाया गया है और उनके दोनों ओर सिख नेताओं जैसे शहीद बाबा दीप सिंह, बाबा बंदा सिंह बहादुर व गुरु तेग बहादुर के पोस्टर लगाए गए हैं।

ट्रैक्टर परेड के बाद एक फरवरी को किसान संसद कूच कर अपनी ताकत दिखाएंगे। क्रांतिकारी किसान यूनियन के नेता दर्शनपाल ने कहा कि प्रदर्शनकारी किसान तीनों नए कृषि कानूनों को रद्द करने की अपनी मांग पर अडिग हैं और मांगें पूरी होने तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने कहा, ‘हम एक फरवरी को विभिन्न स्थानों से संसद की तरफ पैदल मार्च करेंगे।

जहां तक मंगलवार की ट्रैक्टर परेड की बात है तो इससे सरकार को हमारी शक्ति के बारे में एहसास होगा और उसे पता चलेगा कि आंदोलन केवल हरियाणा या पंजाब तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे देश का आंदोलन है।’ दर्शनपाल ने कहा कि प्रत्येक कूच या प्रदर्शन शांतिपूर्ण होगा, जैसा कि अब तक रहा है।

उन्होंने कहा, ‘ट्रैक्टर परेड के लिए आए किसान अब वापस नहीं जाएंगे और प्रदर्शन से जुड़ेंगे। हमारी मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा।’ राजपथ और दिल्ली के अन्य सीमा बिंदुओं पर हजारों सशस्त्र कर्मी तैनात किए गए हैं और गणतंत्र दिवस की परेड और किसानों की प्रस्तावित ट्रैक्टर परेड के मद्देनजर राष्ट्रीय राजधानी में बहुस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था की गई है।

तैयारियों को लेकर किसानों में उत्साह दिखा। सिंघू बार्डर पर स्वयंसेवक जरनैल सिंह ने कहा, ‘रैली में सबसे आगे हमारा सबसे पवित्र ग्रंथ होगा। हम ‘प्रसाद’ बांटेंगे और श्रद्धालु दर्शन करेंगे। गुरु ग्रंथ साहिब वाले पवित्र वाहन के पीछे लोग पैदल चलेंगे और उनके पीछे ट्रैक्टर होंगे।’ आॅल इंडिया किसान सभा (पंजाब) के सहायक सचिव कश्मीर सिंह के मुताबिक सरकार ने तीन मार्ग प्रस्तावित किए हैं जिनपर ‘पूरी तरह से शांतिपूर्ण परेड’ के दौरान ट्रैक्टर चलेंगे।

संगरूर के किसान परिवार से संबंध रखने वाले कलाकार परमिंदर सिंह अपनी एक पेंटिंग के जरिए किसानों के साथ एकजुटता प्रकट करेंगे, इस तस्वीर में किसान के गले में काला सांप लिपटा हुआ दिखाई दे रहा है जो तीन कृषि कानूनों का प्रतिनिधित्व करता है।

उम्मीद है किसान संगठन पुनर्विचार करेंगे : तोमर

केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने सोमवार को कहा कि नए कृषि कानूनों को एक से डेढ़ साल तक निलंबित रखने का सरकार का प्रस्ताव एक ‘सर्वश्रेष्ठ पेशकश’ है और उन्हें उम्मीद है कि प्रदर्शनकरी किसान संगठन इसपर पुनर्विचार करेंगे और अपने फैसले से अवगत कराएंगे।

सरकार और 41 किसान संगठनों के प्रतिनिधियों के बीच 11वें दौर की वार्ता भी बेनतीजा रही थी। दसवें दौर की वार्ता में सरकार ने नए कृषि कानूनों को एक से डेढ़ साल तक निलंबित रखने की पेशकश की थी, लेकिन किसान यूनियनों ने इसे खारिज कर दिया था। सरकार ने यूनियनों से 11वें दौर की वार्ता में प्रस्ताव पर पुनर्विचार करने और अपने निर्णय से अवगत कराने को कहा था।

तोमर ने कहा, ‘सरकार ने किसान यूनियनों को सर्वश्रेष्ठ प्रस्ताव दिया है। मुझे उम्मीद है कि वे आपस में चर्चा कर हमें अपने निर्णय से अवगत कराएंगे। एक बार उनके द्वारा इस बारे में अवगत कराए जाने पर हम इसे आगे बढ़ाएंगे।’ मंत्री ने 11वें दौर की वार्ता के बाद संकेत दिया था कि आगे बात नहीं होगी, लेकिन सरकार की पेशकश पर किसानों के अंतिम फैसले को लेकर वह बैठक करने को तैयार होंगे। यह देखना बाकी है कि 26 जनवरी की अपनी प्रस्तावित ट्रैक्टर परेड के बाद किसान यूनियन सरकार को अपने फैसले से अवगत कराती हैं या नहीं।

शीर्ष अदालत की समिति की बैठक 27 को

कृषि कानूनों पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित की गई समिति का 27 जनवरी को किसानों और किसान संगठनों से दूसरे दौर की चर्चा किए जाने का कार्यक्रम है। समिति ने किसान संगठनों से आग्रह किया कि वे इन कानूनों के बारे में खुलकर अपनी राय रखें। केंद्र सरकार द्वारा बनाए गए तीन कृषि कानूनों पर विचार के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित समिति ने गुरुवार को विभिन्न संगठनों के साथ पहली आभासी बैठक की थी।

पहली बैठक दिल्ली स्थित एनएएसी कॉम्प्लेक्स पूसा में आयोजित की गई थी। इसमें विभिन्न किसान व कृषक संघों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से चर्चा की गई। इसमें कमेटी के सदस्यों के अलावा आठ राज्यों-कर्नाटक, केरल, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, ओड़ीशा, तेलंगाना, तमिलनाडु व उत्तर प्रदेश के 10 विभिन्न किसान संगठनों ने भाग लिया।

चर्चा के दौरान कमेटी के सदस्य अनिल घनवट, डा. अशोक गुलाटी व प्रमोद जोशी ने किसान नेताओं से तीनों कृषि कानूनों पर खुले मन से चर्चा करने का आग्रह किया। उनके आग्रह पर किसान नेताओं ने इन कानूनों को लेकर खुलकर अपना पक्ष रखा।

ट्रैक्टर परेड को लेकर संघर्ष समिति की हिदायतें, अनुशासन पर जोर

संयुक्त किसान संघर्ष समिति ने 26 जनवरी को प्रस्तावित टैक्टर रैली के मद्देनजर इसमें शामिल होने वाले किसानों के लिए अपील और हिदायतें जारी की हैं और अनुशासन बनाए रखने पर जोर दिया गया है। साथ ही 24 घंटे का दाना-पानी ट्रैक्टर पर साथ लेकर निकलने की बात कही गई है। इसके अलावा परेड को ऐतिहासिक बनाने की अपील के साथ यह भी कहा गया है कि आंदोलन पर किसी किस्म का धब्बा ना लगने पाए। परेड शांतिपूर्वक और बिना किसी वारदात के पूरी हो इसमें ही किसानों की जीत है।

किसान संगठनों ने जारी अपील में कहा-‘ध्यान रहे, हम दिल्ली को जीतने नहीं जा रहे हैं, हम देश की जनता का दिल जीतने जा रहे हैं।’
किसान संगठनों ने कहा कि यह गणतंत्र दिवस भारतीय किसानों के नाम है। उन्होंने कहा, 72वां गणतंत्र दिवस किसानों के नाम है। राजपथ पर जय-जवान तो रिंग रोड पर जय-किसान छाया रहेगा। संघर्ष समिति की ओर से जारी हिदायतें –

– परेड में ट्रैक्टर और दूसरी गाड़ी चलेंगी, लेकिन ट्राली नहीं लाएं। जिन ट्रालियों में विशेष झांकी बनी होगी उन्हें छूट होगी।
– अपने साथ 24 घंटे का राशन पानी लेकर चलें। जाम में फंसने पर ठंड से बचाव का इंतजाम भी रखें।
– हर ट्रैक्टर पर किसान संगठन के झंडे के साथ-साथ राष्ट्रीय झंडा लगाएं, किसी भी राजनीतिक पार्टी का झंडा नहीं लगेगा।
– अपने साथ किसी भी तरह का हथियार ना रखें, लाठी आदि भी ना रखें। भड़काऊ बैनर प्रतिबंधित होगा। अफवाहों पर ध्यान ना दें।
– एक ट्रैक्टर पर ज्यादा से ज्यादा ड्राइवर समेत पांच लोग सवार होंगे। बोनट, बंपर या छत पर कोई नहीं बैठेगा।
– ट्रैक्टर में अपना आॅडियो डेक नहीं बजाएं। साफ सफाई का विशेष ध्यान रखना है, अपने साथ कचरे के लिए एक बैग अलग से रखें।
– परेड में किसी भी किस्म के नशे की मनाही है, नशा न लें। साथ ही मीडियाकर्मियों से, चाहे वे जिस भी चैनल से हों, किसी तरह की बदतमीजी ना करें।
इनके अलावा संघर्ष समिति ने प्रदर्शनकारियों से यह भी कहा है कि किसी भी विषम परिस्थिति में उन्हें घबराने की जरूरत नहीं है। परेड में बीच-बीच में एंबुलेंस रहेंगी। अस्पतालों के साथ तालमेल किया गया है। कोई मेडिकल इमरजेंसी हो तो हेल्पलाइन नंबर पर फोन करें या नजदीकी स्वयंसेवी को बताएं। इसके अलावा यह भी कहा गया है कि ट्रैक्टर या गाड़ी खराब होने की स्थिति में उसे बिल्कुल साइड में लगा दें और स्वयंसेवी से संपर्क करें या हेल्पलाइन पर सूचना दें।

 

 

 

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