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कानून वापसी पर अड़े किसान, ठुकराया प्रस्ताव

किसान नेता दर्शन पाल सिंह की ओर से जारी बयान में कहा गया, ‘संयुक्त किसान मोर्चा की आम सभा में सरकार द्वारा रखे गए प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया गया।’

Author नई दिल्ली | January 22, 2021 1:39 AM
farmer protestदिल्ली में तीन कृषि कानूनों के खिलाफ ट्रैक्टर से जाते किसान।

किसान संगठनों ने गुरुवार को तीन कृषि कानूनों के क्रियान्वयन को डेढ़ साल तक स्थगित रखने और समाधान का रास्ता निकालने के लिए एक समिति के गठन संबंधी केंद्र सरकार के प्रस्ताव को खारिज कर दिया। किसानों ने तीनों कृषि कानूनों को पूरी तरह रद्द करने और न्यूनतम समर्थन मूल्य की कानूनी गारंटी देने की अपनी मांग दोहराई। संयुक्त किसान मोर्चा के तत्वावधान में किसान नेताओं ने सरकार के प्रस्ताव पर सिंघू बॉर्डर पर एक मैराथन बैठक की और अपने फैसले का एलान किया।

किसान नेता दर्शन पाल सिंह की ओर से जारी बयान में कहा गया, ‘संयुक्त किसान मोर्चा की आम सभा में सरकार द्वारा रखे गए प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया गया।’ उन्होंने कहा, ‘आम सभा में तीन केंद्रीय कृषि कानूनों को पूरी तरह रद्द करने और सभी किसानों के लिए सभी फसलों पर लाभदायक न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के लिए एक कानून बनाने की बात, इस आंदोलन की मुख्य मांगों के रूप में दोहराई गई।

संयुक्त किसान मोर्चा ने कहा कि अब तक इस आंदोलन में 147 किसानों की मौत हो चुकी है। उन्हें आम सभा ने श्रद्धाजंलि अर्पित की। बयान में कहा गया, ‘इस जनांदोलन को लड़ते-लड़ते ये साथी हमसे बिछड़े है। इनका बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा।’ मोर्चा की बैठक दोपहर बाद लगभग ढाई बजे शुरू हुई। समिति ने एक बयान में कहा कि गुरुवार को विभिन्न किसान संगठनों और संस्थाओं से वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से संवाद किया गया। इसमें कर्नाटक, केरल, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, ओड़ीशा, तेलंगाना, तमिलनाडु, और उत्तर प्रदेश के 10 किसान संगठन शामिल हुए।

बुधवार को हुई 10वें दौर की वार्ता में सरकार ने किसान संगठनों के समक्ष तीन कृषि कानूनों को डेढ़ साल तक स्थगित रखने और समाधान का रास्ता निकालने के लिए एक समिति के गठन का प्रस्ताव दिया था। दोनों पक्षों ने 22 जनवरी को फिर से वार्ता करना तय किया था।

इस बीच, सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित समिति ने वार्ता शुरू कर दी है और इस कड़ी में उसने आठ राज्यों के 10 किसान संगठनों से संवाद किया। सुप्रीम कोर्ट ने 11 जनवरी को तीन कृषि कानूनों के अमल पर अगले आदेश तक रोक लगा दी थी और गतिरोध को दूर करने के मकसद से चार-सदस्यीय एक समिति का गठन किया था। फिलहाल, इस समिति में तीन ही सदस्य हैं क्योंकि भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष भूपिंदर सिंह मान ने खुद को इस समिति से अलग कर लिया था।

हजारों की संख्या में किसान दिल्ली की सीमाओं पर पिछले करीब दो महीने से आंदोलन कर रहे हैं। वे नए कृषि कानूनों को रद्द करने की मांग पर अड़े हुए हैं। प्रदर्शनकारी किसानों का कहना है कि इन कानूनों से मंडी व्यवस्था और न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर खरीद की प्रणाली समाप्त हो जाएगी और किसानों को बड़े कॉरपोरेट घरानों की ‘कृपा’ पर रहना पड़ेगा। हालांकि, सरकार इन आशंकाओं को खारिज कर चुकी है।

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