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गणतंत्र दिवस पर दिल्ली कूच करेगी किसानों की ‘ट्रैक्टर परेड’, वार्ता विफल होने की स्थिति में सरकार को चेतावनी

स्वराज इंडिया के नेता योगेंद्र यादव ने कहा कि सरकार का किसानों की 50 फीसद मांगों को स्वीकार करने का दावा सरासर झूठ है। उन्होंने कहा- हमें अब तक लिखित में कुछ नहीं मिला है।

नई दिल्ली | Updated: January 3, 2021 4:11 AM
किसान संगठनों ने दिल्ली में शनिवार को पहली औपचारिक प्रेस कांफ्रेंस में सरकार को दी चेतावनी।

सरकार के साथ अगले दौर की वार्ता से पहले अपने रुख को और सख्त करते हुए प्रदर्शनकारी किसानों के संगठनों ने शनिवार को कहा कि अगर उनकी मांगे नहीं मानी गई तो 26 जनवरी को जब देश गणतंत्र दिवस मना रहा होगा, तब किसान दिल्ली की ओर ट्रैक्टर परेड निकालेंगे। बता दें कि किसानों की सरकार के साथ अगली वार्ता चार जनवरी को होनी है। बताते चलें कि 26 जनवरी को ब्रिटिश प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन राष्ट्रीय राजधानी में होंगे और गणतंत्र दिवस पर राजपथ पर होने वाली परेड में बतौर मुख्य अतिथि शामिल होंगे।

किसानों का कहना है कि अगर सरकार से चार जनवरी की वार्ता विफल रहती है तो छह जनवरी को किसान केएमपी एक्सप्रेसवे पर मार्च निकालेंगे। उसके बाद शाहजहांपुर पर मोर्चा लगाए किसान भी दिल्ली की तरफ कूच करेंगे। तेरह जनवरी को लोहड़ी-संक्रांति के अवसर पर देशभर में किसान संकल्प दिवस मनाया जाएगा और इन तीनों कानूनों को जलाया जाएगा।

दिल्ली में अपनी पहली औपचारिक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए किसान नेता दर्शन पाल सिंह ने कहा कि उनकी प्रस्तावित ट्रैक्टर परेड ‘किसान परेड’ के नाम से होगी और यह गणतंत्र दिवस परेड के बाद शुरू होगी। इस मौके पर किसान संघर्ष समिति के करीब सभी बड़े किसान नेता मौजूद थे। किसानों की सात सदस्यीय समन्वय समिति ने केंद्र सरकार अल्टीमेटम दिया है कि दिल्ली के चारों ओर लगे मोर्चों से किसान 26 जनवरी को दिल्ली में प्रवेश कर ट्रैक्टर-ट्रॉली और अन्य वाहनों के साथ किसान गणतंत्र परेड करेंगे।

संवाददाता सम्मेलन में समन्वय समिति ने अब से 26 जनवरी के बीच अनेक स्थानीय और राष्ट्रीय कार्यक्रमों की घोषणा भी की। इस मौके पर किसान मोर्चा की सात सदस्य राष्ट्रीय समन्वय समिति के सदस्यों बलबीर सिंह राजे वाल, दर्शन पाल, गुरनाम सिंह चढ़ूनी, जगजीत सिंह डल्लेवाल और योगेंद्र यादव ने संबोधित किया। हन्नान मोल्ला की अनुपस्थिति में अशोक धवले और शिवकुमार कक्काजी की अनुपस्थिति में अभिमन्यु कोहाड़ ने बात रखी।

स्वराज इंडिया के नेता योगेंद्र यादव ने कहा कि सरकार का किसानों की 50 फीसद मांगों को स्वीकार करने का दावा सरासर झूठ है। उन्होंने कहा- हमें अब तक लिखित में कुछ नहीं मिला है। बीते बुधवार को छठी दौर की औपचारिक वार्ता के बाद सरकार और प्रदर्शनकारी किसान संगठनों के बीच प्रस्तावित बिजली विधेयक एवं पराली जलाने पर जुर्माने के मुद्दे पर कथित तौर पर सहमति बनी थी, लेकिन विवादित कृषि कानूनों को वापस लेने एवं न्यूनतम समर्थन मूल्य की गारंटी को लेकर गतिरोध बना हुआ है। किसान नेता गुरनाम सिंह चढूनी ने कहा- पिछली बैठक में हमने सरकार से सवाल किया कि क्या वह 23 फसलों की न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद करेगी, तो उन्होंने कहा- नहीं। फिर भी वो देश की जनता को क्यों गलत जानकारी दे रहे हैं।

दिल्ली की सीमा पर तीन कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग को लेकर हजारों किसान कड़ाके की सर्दी के बावजूद गत 37 दिनों से प्रदर्शन कर रहे हैं। किसान प्रतिनिधियों ने कहा हमने सरकार को पहले दिन ही बता दिया था कि हम इन तीनों किसान विरोधी कानूनों को रद्द कराए बिना यहां से हटने वाले नहीं है। सरकार के पास दो ही रास्ते हैं या तो वह जल्द से जल्द इस बिन मांगी सौगात को वापस ले और किसानों को एमएसपी पर खरीद की कानूनी गारंटी दे, या फिर किसानों पर लाठी-गोली चलाए। आर पार की लड़ाई में अब हम एक निर्णायक मोड़ पर आ पहुंचे हैं।

26 जनवरी तक हमारे दिल्ली में डेरा डालने के दो महीने पूरे हो जाएंगे। हमने इस निर्णायक कदम के लिए गणतंत्र दिवस को चुना क्योंकि यह दिन हमारे देश में गण यानी बहुसंख्यक किसानों की सर्वोच्च सत्ता का प्रतीक है। इस अवसर पर संयुक्त किसान मोर्चा ने कहा कि छह जनवरी से 20 जनवरी तक सरकारी झूठ और दुष्प्रचार का भंडाफोड़ करने के लिए ‘देश जागृति पखवाड़ा’ मनाया जाएगा।

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