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किसान आंदोलन: रोड आपने ही ब्लॉक कर रखा है- सुप्रीम कोर्ट में सॉलिसिटर जनरल से बोले चीफ जस्टिस

सुप्रीम कोर्ट में किसानों के प्रदर्शन औऱ दिल्ली की सीमाओं पर लगे जाम पर सुनवाई के दौरान CJI ने सॉलिसिटर जनरल से कहा, आपने ही यह जाम लगा रखा है।

दिल्ली की सीमाओं पर डटे हैं किसान, फोटो सोर्स- AP

कृषि कानून का विरोध कर रहे प्रदर्शनकारी किसानों ने दिल्ली की कई सीमाओं को ब्लॉक कर दिया। आने-जाने में दिक्कत और जाम को लेकर सुप्रीम कोर्ट में दी गई याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने केंद्र सरकार समेत राज्य सरकारों को नोटिस जारी किया। सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से कहा, ‘आपने ही सड़कें जाम कर रखी हैं।’ इसपर मेहता ने कहा, ‘मैंने ऐसा नहीं किया है।’

मेहता से जब पूछा गया कि दिल्ली में प्रवेश करने से किसानों को किसने रोका तो उन्होंने कहा, ‘हां, प्रशासन ने रोका है।’ सुनवाई कर रही बेंच ने कहा, ‘हम इस मामले का हल निकालने के लिए एक कमिटी बनाएंगे जिसमें सरकार, भारतीय किसान यूनियन और दूसरे किसान संगठनों के सदस्य शामिल होंगे।’ सॉलिसिटर जनरल ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि भारत सरकार किसानों से बात कर रही है और उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं करेगी।

याचिकाकर्ता ने कहा था कि प्रदर्शनकारी किसानों ने दिल्ली की सीमाओं पर जाम लगा दिया है। इससे यातायात बाधित हो रहा है और आम जन को मुसीबतों का सामना करना पड़ रहा है। कोविड19 के मरीजों को इलाज में भी काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। याचिकाकर्ता ऋषभ शर्मा के वकील दुष्यंत तिवारी ने कोर्ट का ध्यान शाहीन बाग के संबंध में दिए गए फैसले की तरफ खींचा। कोर्ट ने इस मामले में कहा था कि प्रदर्शन निर्धारित किए गए स्थान पर ही होना चाहिए।

सीजेआई ने वकील से पूछा, ‘क्या आप चाहते हैं कि सीमाएं खुल जाएँ।’ चीफ जस्टिस ने पूछा, ‘शाहीन बाग में कितने प्रदर्शनकारी थे।’ इसपर वकील ने जवाब दिया- कुछ लाख। चीफ जस्टिस ने पूछा, ‘शाहीन बाग में कितने लोगों ने सड़क जाम की थी? क्या लोगों की संख्या पर कुछ नहीं निर्भर करेगा? यह कौन बताएगा? कानून व्यवस्था बनाए रखना बहुत जरूरी है।’ बेंच ने कहा कि ज्यादातर याचिकाकर्ताओं ने फ्रीडम ऑफ मूवमेंट के अलावा कानूनी बातों पर ध्यान नहीं दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने सॉलिसिटर जनरल से प्रदर्शनकारी किसानों के नाम मांगे। सॉलिसिटर जनरल ने किसानों से बातचीत की बात कही तो चीफ जस्टिस ने कहा, बातचीत फिर फेल हो जाएगी, आप उन संगठनों का नाम दीजिए जो कोर्ट में पेश हो सकें।

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