किसान आंदोलनः SKM का मई में संसद मार्च का ऐलान, जानिए क्या है प्लान

कृषि कानूनों का विरोध कर रहे 40 किसान संगठनों के संयुक्त मंच, संयुक्त किसान मोर्चा, ने बुधवार को कहा कि मई महीने के शुरुआती दो हफ्तों में किसान संसद की ओर मार्च करेंगे।

farm laws. farmersकिसान कृषि कानूनों का विरोध कर रहे हैं। (Indian Express)।

कृषि कानूनों का विरोध कर रहे 40 किसान संगठनों के संयुक्त मंच, संयुक्त किसान मोर्चा, ने बुधवार को कहा कि मई महीने के शुरुआती दो हफ्तों में किसान संसद की ओर मार्च करेंगे। किसान यूनियन ने बताया कि इस मार्च में न सिर्फ किसान बल्कि मजदूर, दलित,आदिवासी,बहुजन, बेरोजगार और महिलाएं भी शामिल होंगी। समाज के हर तबके को इसमें शामिल करने का प्रयास किया जाएगा। संयुक्त किसान मोर्चे ने साफ किया ये मार्च पूरी तरह से शांतिपूर्ण तरीके से निकाला जाएगा।

किसानों ने योजना के बारे में बताया कि सबसे पहले तो किसान गांवों से दिल्ली के बॉर्डर पर पहुंचेंगे। इसके बाद किसान संसद की ओर मार्च करेंगे। किसान संगठनों ने कहा कि जल्द ही इस पैदल मार्च की एक निश्चित तारीख बताई जाएगी। किसानों ने कहा कि 26 जनवरी की घटना की पुनरावृत्ति न हो इसके लिए किसानों ने एक समिति बनाने की सोची है, जो देखेगी कि कहीं मार्च के दौरान कोई उपद्रव न होने पाए।

किसान नेता गुरनाम सिंह चढूनी ने कहा, ‘हम किसानों को बताएंगे कि अगर मार्च के दौरान पुलिस लाठीचार्ज या ऐसा कुछ करती है तो किसानों को क्या करना होगा? इसके लिए समिति बनाई जाएगी। किसानों को ये साफ कर दिया जाएगा कि संयुक्त किसान मोर्चा किसी भी तरह की हिंसा का समर्थन नहीं करेगा। अगर प्रदर्नशकारियों से इस बीच किसी सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचता है तो ऐसा करने वाले इसकी भरपाई करेंगे।’

गर्मियों के दौरान किसानों के विरोध की क्या योजना रहेगी आज इस पर विस्तृत चर्चा की गई। किसानों ने बताया कि 10 अप्रैल से कुंडली-मानेसर-पलवल एक्सप्रेस वे को ब्लॉक किया जाएगा।

6 मई को उन किसानों की याद में कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा जिन्होंने इस आंदोलन के दौरान अपनी जान गंवाई। इसके अलावा एक अप्रैल को मजदूर दिवस और 14 अप्रैल को अंबेडकर जयंती मनाई जाएगी।

किसानों ने कहा,“हम ऐसा इसलिए करने जा रहे हैं क्योंकि सरकार हमारी सुन नहीं रही है।ये सोई हुई सरकार को जगाने के लिए है।”

जानकारी दे दें कि आज कृषि कानून पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा बनाई गई कमेटी ने अपनी रिपोर्ट को कोर्ट को सौंप दिया। मालूम हो कि संयुक्त किसान मोर्चे ने कोर्ट की बनाई इस समिति को कानून समर्थक बताते हुए खारिज कर दिया था। वहीं, अदालत ने तीनों कृषि कानूनों को लागू करने पर रोक लगाई हुई है। कोर्ट ने सरकार और किसानों के बीच समाधान के लिए कमेटी बनाई थी।

बता दें कि कृषक उत्पाद व्यापार एवं वाणिज्य (संवर्धन और सुविधा) अधिनियम, 2020, मूल्य आश्वासन और कृषि सेवा पर किसानों के (सशक्तीकरण और संरक्षण) का समझौता अधिनियम 2020, आवश्यक वस्तु (संशोधन) अधिनियम, 2020 का किसान विरोध कर रहे हैं।

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