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किसान आंदोलनः राहुल बाबा जैसों को पता ही नहीं भिंडी कैसे लगती है, CM शिवराज का तंज; अर्णब बोले- भिंडी भी नहीं पता होगा उन्हें

शिवराज सिंह चौहान ने कहा, 'पश्चिम बंगाल में लाखों किसानों को सम्मान निधि नहीं मिलती। ये वो लोग हैं जो सोचते हैं कि हमारी एक आंख फूटे तो फूट जाए, सामने वाले की दोनों फूट जाए।'

shivraj singh chauhanकिसान आंदोलन को लेकर शिवराज ने राहुल गांधी पर किया तंज। तस्वीर- ANI

किसान आंदोलन को लेकर बीजेपी और कांग्रेस आमने सामने है। राहुल गांधी इस मामले में सरकार को लगातार घेरते रहे हैं और कृषि कानूनों को अलोकतांत्रिक बताते रहे हैं। अर्नब गोस्वामी के शो में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री ने राहुल गांधी को निशाने पर लिया। उन्होंने कहा, ‘जिनका खेती किसानी से कोई लेना देना नहीं है, राहुल बाबा जैसे लोगों को पता नहीं है कि भिंडी कैसे लगती है, आलू जमीन के ऊपर होता है या नीचे होता है।’ इसपर अर्नब बोल पड़े, उन्हें तो भिंडी भी नहीं पता होगी। उनको आप भिंडी बोलेंगे तो पता नहीं चलेगा।

अर्नब ने कहा, ये लोग विचारधारा विशेष के विरोधी हैं, मोदी जी के विरोधी हैं। गांव गली, पगडंडी देखी नहीं है वे लोग देश को भ्रमित करने की कोशिश करना चाहते हैं। उनसे सतर्क करने की जरूरत है। अब देश भ्रम में नहीं है। जल्द ही सबका भ्रम दूर हो जाएगा।’

शिवराज सिंह चौहान ने कहा, ‘मध्य प्रदेश के एक करोड़ लोगों ने प्रधानमंत्री जी को सुना। किसानों के बीच एक ही बात थी कि मोदी जी की बात सुनेंगे। कुछ लोग भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहे थे, उनका भ्रम दूर किया गया। विरोध करने वाले लोगों को किसानों से लेना देना नहीं है, किसान मरता है तो मरता रहे, बस मोदी का विरोध होना चाहिए।’

शिवराज सिंह चौहान ने कहा, ‘पश्चिम बंगाल में लाखों किसानों को सम्मान निधि नहीं मिलती। ये वो लोग हैं जो सोचते हैं कि हमारी एक आंख फूटे तो फूट जाए, सामने वाले की दोनों फूट जाए। ये लोग नफरत की राजनीति करते हैं। मध्य प्रदेश में तो भ्रम का सवाल ही नहीं है।’ उन्होंने कहा, मध्य प्रदेश के किसान इन कानूनों को किसानों के हक में मानते हैं लेकिन कुछ लोग जिन्होंने भ्रम फैलाया है वे छोटे हिस्से को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं।

शिवराज ने कहा, अब आंदोलन समाप्त हो जाना चाहिए। पीएम ने फिर भी कहा है कि किसी को भ्रम है तो वह चर्चा करे। किसानों की समस्या का समाधान इस आंदोलन का उद्देश्य नहीं है। केवल प्रधानमंत्री का विरोध करना है। जिन्होंने जमीन हड़पकर धन कमाया, वे राष्ट्रपति जी को ज्ञापन देने जाएंगे तो कौन उनकी सुनेगा?

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