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47 दिन में किसान आंदोलन के बीच बस गई टेंट सिटी, बोले पन्नू- हटने को कहेगा SC, फिर भी न हटेंगे

सरकार और किसान नेताओं के बीच कई दौर की वार्ता के बाद भी कोई समाधान नहीं निकला है ऐसे में केंद्र सरकार की निगाहें अब शीर्ष अदालत के फैसले पर टिकी हैं। आज 12 बजे इसे लेकर सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई होने वाली है।

supreme court on farmers protest today, supreme court on farmers protest in hindi, supreme court judgement news, sc on farmers protest, sc on farmers bill 2020, sc on farm laws, india News, india News in Hindi, Latest india Newsदिल्‍ली की कईं सीमाओं पर किसानों का विरोध प्रदर्शन 47 दिनों से जारी है। (file)

केंद्र सरकार के नए कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्‍ली की कईं सीमाओं पर किसानों का विरोध प्रदर्शन 47 दिनों से जारी है। सरकार और किसान नेताओं के बीच कई दौर की वार्ता के बाद भी कोई समाधान नहीं निकला है ऐसे में केंद्र सरकार की निगाहें अब शीर्ष अदालत के फैसले पर टिकी हैं। आज 12 बजे इसे लेकर सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई होने वाली है। इससे पहले किसान-मजदूर संघर्ष कमेटी के अध्यक्ष सतनाम सिंह पन्नू ने मीडिया से कहा है कि कोर्ट का फैसला जो भी हो वे लोग यहां से हटने वाले नहीं है।

सर्वोच्च अदालत की सुनवाई से पहले सतनाम सिंह पन्नू ने एबीपी न्यूज़ से बात करते हुए कहा “जो सुप्रीम कोर्ट में आज सुनवाई हो रही है। उसमें सारी वकील जरूर पेश हो रहे हैं। अगर कोर्ट कहेगा की कमेटी बना लो और बात करो तो वो हमें मंजूर नहीं है। सुप्रीम कोर्ट जो भी ऑर्डर से और सरकार जो भी लागू करना चाहे हम उनकी बात नहीं मनाने वाले। ये पहली बात नहीं है जब ऐसी कोई सुनवाई हो रही है पहले भी बहुत हुई हैं।”

पन्नू ने कहा कि जो भी इनके फैसले आते है चाहे हाई कोर्ट का हो या सुप्रीम कोर्ट का हो आंदोलनकारियों के खिलाफ ही आते हैं। पंजाब में हाई कोर्ट का फैसला भी हमारे खिलाफ ही आया है। ऐसा ही सुप्रीम कोर्ट में भी होगा। हम उनकी बात मानने को तैयार नहीं हैं। हमारी मांग कृषि कानूनों को रद्द कराने की है और वही रहेगी। यहीं पर मर जाएंगे लेकिन वापस जाएंगे नहीं।

लगभग डेढ़ महीने से लगातार प्रदर्शन कर रहे किसानों ने सिंघु बॉर्डर पर टेंट सिटी बसा ली है। कृषि कानूनों को रद्द कराने की मांग पर डटे किसानों के लिए दिल्ली-हरियाणा राजमार्ग पर ट्रॉलियां अब सोने के लिए पसंदीदा जगह बन गई हैं। अपनी अपनी ट्रॉली को ठंड और बारिश से बचाने के लिए तैयार कर लिया गया है ताकि रात के वक्त किसी को ठिठुरती सर्दी का अहसास न हो। यहां सैकड़ों की संख्या में टेंट लगे हैं। एक टेंट में दो बच्चों के साथ तीन से पांच व्यस्कों के लिए जगह है। ट्रॉली में अगर अधिक जगह हो तो आठ-10 पुरुषों के लिए भी यह पर्याप्त है।

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