‘अल्ला हू अकबर’ नारे पर बोले राकेश टिकैत, ये देश को तोड़ना चाहते हैं, हम जोड़ना चाहते हैं

राकेश टिकैट का कहना है कि करनाल में अब आंदोलन चलता रहेगा। किसान नेता ने कहा, “जिस तरह से एक अधिकारी ने किसानों पर बर्बरता पूर्ण अत्याचार किया वो उचित नहीं ठहराया जा सकता है। धरना ऐसे ही चलता रहेगा और भी तमाम किसान नेता वहां पर मौजूद हैं। आंदोलन तो अब वहां से तक तक नहीं हटेगा जब तक मांगें पूरी नहीं होंगी।

भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैट (express file)

मोदी सरकार के तीन कृषि क़ानूनों के खिलाफ किसानों का प्रदर्शन 9 महीने से भी ज्यादा समय से जारी है। देश के कई हिस्सों में किसान महापंचायत कर रहे हैं। इसी बीच करनाल में किसानों ने जिला मुख्यालय घेर लिया है और ‘‘अनिश्चितकाल’’ के लिए धरने पर बैठ गए हैं।

इसपर भारतीय किसान यूनियन (BKU) के नेता राकेश टिकैट का कहना है कि करनाल में अब आंदोलन चलता रहेगा। किसान नेता ने कहा, “जिस तरह से एक अधिकारी ने किसानों पर बर्बरता पूर्ण अत्याचार किया वो उचित नहीं ठहराया जा सकता है। धरना ऐसे ही चलता रहेगा और भी तमाम किसान नेता वहां पर मौजूद हैं। आंदोलन तो अब वहां से तक तक नहीं हटेगा जब तक मांगें पूरी नहीं होंगी।

राकेश टिकैत से ये भी सवाल पूछा गया कि जिस तरह से गाजीपुर बॉर्डर पर और अन्य किसान नेताओं में आपका ही चेहरा प्रमुख है इसलिए वहां के किसान नेताओं ने आपको वापस गाजीपुर बॉर्डर तो नहीं भेज दिया। इस पर राकेश टिकैत ने कहा कि ऐसा कुछ नहीं है। दिल्ली के तमाम बॉर्डर पर हमारा आंदोलन चल रहा है। वहां पर अन्य कई नेता मौजूद हैं इसलिए हम अपने आंदोलन स्थल पर आ गए हैं। धरना वहां पर लगातार जारी है और जारी रहेगा। हम संगठित हैं और मिलकर कार्य कर रहे हैं।

‘अल्ला हू अकबर’ के नारों को लेकर टिकैत ने कहा, “इन नारों से कोई नाराज़ नहीं है। हां बीजेपी आईटी सेल के लोग नाराज़ हो सकते हैं। ये नारे हमारे मीटिंग का हिस्सा रहे हैं। टिकैत साहब के समय से ये नारे लगते आए हैं। ये लोग देश को तोड़ने की बात करते हैं और हम जोड़ने की बात करेंगे।”

टिकैत ने कहा, ” इसी मुजफ्फरनगर की धरती से 2013 में इन्होंने तोड़ने की बात की थी। आज हम उसी धरती को जोड़ने का काम कर रहे हैं। बता दें किसानों ने कहा कि ये आंदोलन तब तक चलेगा जब तक उनकी मांगों को पूरा नहीं किया जाएगा। किसानों का ये भी कहना है कि जिस तरह से सरकार ने किसानों को लेकर ढुलमुल रवैया दिखाया है, उनपर लाठीचार्ज, वाटर कैनन का इस्तेमाल किया है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि सरकार किसानों के प्रति क्या रुख रखती है।

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