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कृषि कानूनों के अमल में आने पर लगाएं रोक वरना हम लगा देंगे- आंदोलन के बीच केंद्र से बोला SC

कोर्ट बोला, "हम फिलहाल इन कृषि कानूनों को निरस्त करने की बात नहीं कर रहे हैं, यह एक बहुत ही नाजुक स्थिति है। हमें नहीं मालूम कि आप (केंद्र) हल का हिस्सा हैं या फिर समस्या का। हमारे पास एक भी ऐसी याचिका नहीं है, जो कहती हो कि ये कानून किसानों के लिए फायदेमंद हैं।"

Author Edited By अभिषेक गुप्ता नई दिल्ली | Updated: January 11, 2021 3:25 PM
Farmers Protest, Agriculture Laws, SC, CJIनई दिल्ली में गाजीपुर बॉर्डर पर आंदोलन के दौरान बैठे किसान। (फोटोः पीटीआई)

केंद्र सरकार के लाए तीन कृषि कानूनों के खिलाफ अड़े अन्नदाताओं के आंदोलन के बीच सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में इस मसले पर सुनवाई हुई। टॉप कोर्ट ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली NDA सरकार से दो टूक कहा कि इन कानूनों को अमल में लाने पर रोक लगाएं, वरना कोर्ट खुद ऐसा कर देगा।

सीजेआई की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि नए कृषि कानूनों को लेकर जिस तरह से सरकार और किसानों के बीच बातचीत चल रही है, उससे हम बेहद निराश हैं। कोर्ट ने आगे यह भी पूछा- कुछ लोगों ने खुदकुशी कर ली। बुजुर्ग और महिलाएं भी इस आंदोलन का हिस्सा हैं। क्या चल रहा है? राज्य आपके कानूनों के खिलाफ बगावत कर रहे हैं।

कोर्ट बोला, “हम फिलहाल इन कृषि कानूनों को निरस्त करने की बात नहीं कर रहे हैं, यह एक बहुत ही नाजुक स्थिति है। हमें नहीं मालूम कि आप (केंद्र) हल का हिस्सा हैं या फिर समस्या का। हमारे पास एक भी ऐसी याचिका नहीं है, जो कहती हो कि ये कानून किसानों के लिए फायदेमंद हैं।”

कोर्ट ने कहा कि वह चाहता था कि बातचीत से मामले का हल निकले, लेकिन कृषि कानूनों पर फिलहाल रोक लगाने को लेकर केंद्र की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गई है। इन कानूनों को लेकर समिति की जरूरत को दोहराया और कहा कि अगर समिति ने सुझाव दिया तो, वह इसके अमल पर रोक लगा देगा।

कोर्ट ने कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे किसान संगठनों से कहा, ‘‘आपको भरोसा हो या नहीं, हम भारत की शीर्ष अदालत हैं, हम अपना काम करेंगे।’’ कोर्ट के मुताबिक, ‘‘हमें नहीं पता कि लोग सामाजिक दूरी के नियम का पालन कर रहे हैं कि नहीं लेकिन हमें उनके (किसानों) भोजन-पानी की चिंता है। हम अर्थव्यवस्था के विशेषज्ञ नहीं हैं। आप बताएं कि सरकार कृषि कानून पर रोक लगाएगी या हम लगाएं।’’

न्यायालय ने आगे कहा- किसान कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं, उन्हें समिति को अपनी आपत्तियां बताने दें। हम समिति की सिफारिशों को स्वीकार कर सकते हैं। हमें यह कहते हुए काफी खेद है कि केंद्र इस समस्या और किसान प्रदर्शन का समाधान नहीं कर पाई। हालांकि, अटॉर्नी जनरल केके. वेणुगोपाल ने कोर्ट से कहा, किसी कानून पर तब तक रोक नहीं लगाई जा सकती, जब तक वह मौलिक अधिकारों या संवैधानिक योजनाओं का उल्लंघन ना करें।

कोर्ट के अनुसार, “हम, हमारे द्वारा नियुक्त की जाने वाली समिति के माध्यम से कृषि कानूनों की समस्या के समाधान के लिए आदेश पारित करने का प्रस्ताव कर रहे हैं।” वहीं, सीजेआई बोले- मैं यह कहने का खतरा उठाना चाहता हूं कि प्रदर्शन कर रहे किसान अपने घरों को लौटें।

न्यायालय ने आर एम. लोढा सहित सभी पूर्व सीजेआई के नाम कृषि कानूनों के खिलाफ जारी प्रदर्शन के संभावित समाधान खोजने वाली समिति के अध्यक्ष पद के लिए दिए।

आगे एजी के. के. वेणुगोपाल के और समय मांगने पर कोर्ट ने कहा कि अटॉर्नी जनरल हम आपको बहुत समय दे चुके हैं। कृपया आप हमें संयम पर भाषण न दें। कोर्ट ने कहा कि वह अलग अलग हिस्सों में, किसान प्रदर्शन और नए कृषि कानूनों के क्रियान्वयन के संबंध में आदेश पारित करेगा।

जानिए, सुप्रीम सुनवाई की बड़ी बातेंः

– स्थिति संभालने में केंद्र नाकाम- SC
– 1 कमेटी बनाने पर विचार कर रहा कोर्ट
– कानून नहीं, अमल पर रोक लगाएंगे- कोर्ट
– किसान रामलीला मैदान जाने को राजी- दुष्यंत दवे
– 26 जनवरी की परेड को बाधित न करेंगे किसानः दवे

बता दें कि केंद्र और किसान संगठनों के बीच सात जनवरी को हुई आठवें दौर की बाचतीच में भी कोई समाधान निकलता नजर नहीं आया क्योंकि केंद्र ने विवादास्पद कानून निरस्त करने से इनकार कर दिया था जबकि किसान नेताओं ने कहा था कि वे अंतिम सांस तक लड़ाई लड़ने के लिये तैयार हैं और उनकी “घर वापसी” सिर्फ “कानून वापसी” के बाद होगी। सरकार और किसान नेताओं के बीच 15 जनवरी को अगली बैठक प्रस्तावित है। (भाषा इनपुट्स के साथ)

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