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किसानों को फुटबॉल मत बनाओ…उनसे पूछ तो लो दिक्कत क्या है, किसान नेता बीएम सिंह ने संबित पात्रा को दिया जवाब

किसान नेता ने कहा कि आज तक कभी ऐसा हुआ है कि एसडीएम को आदेश को कोर्ट का फैसला माना जाए। उन्होंने सवाल उठाया कि आपने इसमें प्रावधान बना दिया है कि इसमें एसडीएम के आदेश को कोर्ट का फैसला माना जाएगा।

farmers protest, agriculture bill, farmers on delhi bordersकिसान नेता बीएम सिंह। (फोटोः स्क्रीनग्रैब)

दिल्ली में हरियाणा, पंजाब और यूपी के किसान नए कृषि कानूनों के खिलाफ लगातार डटे हुए हैं। इस बीच किसान नेता सरकार व भाजपा नेताओं पर उनकी समस्याओं को नहीं सुनने का आरोप लगा रहे हैं। केंद्र सरकार जहां नए कृषि कानूनों को किसानों के हित में बता रही हैं, वहीं किसान संगठन लगातार इन कानूनों को वापस लेने की मांग पर अड़े हुए हैं।

इस बीच किसान नेता बीएम सिंह ने एक टीवी कार्यक्रम के दौरान भाजपा प्रवक्ता को किसानों के प्रदर्शन को लेकर खरी-खरी सुनाई। धरना स्थल से बीएम सिंह ने कहा कि उन्होंने कहा कि अगर आपको किसान को फुटबॉल बनाना है तो पिछले 70 साल में कांग्रेस और भाजपा उस रास्ते पर ले आए कि अब किसान आंदोलन की स्थिति में आ गया है। उन्होंने कहा कि कम से कम किसानों से तो पूछो कि दिक्कत क्या है। सिंह ने कहा कि मैं इनको बताता हूं।

उन्होंने कहा मैं संबित पात्रा को बताता हूं कि आज तक कभी ऐसा हुआ है कि एसडीएम को आदेश को कोर्ट का फैसला माना जाए। उन्होंने सवाल उठाया कि आपने इसमें प्रावधान बना दिया है कि इसमें एसडीएम के आदेश को कोर्ट का फैसला माना जाएगा। यह पहली बार आप लेकर आए हैं। उन्होंने कहा कि आप क्यों कहते हैं कि कानून में एमएसपी नहीं आ सकता है।

उन्होंने फिर दोहराया कि किसानों को फुटबॉल मत बनाओ…अब समय आ गया है जब किसान सरकार को फुटबॉल बनाकर बाहर निकाल देगा। दूसरी तरफ किसान शक्ति संघ के नेता चौधरी पुष्पेंद्र सिंह ने कहा कि एमएसपी को लेकर जीएसटी काउंसिल का उदाहरण लिया जा सकता है। उन्होंने कहा कि जिस तरह से जीएसटी काउंसिल तय करती है कि टैक्स की दर क्या होगी।

उन दरों को बार-बार संसद में ले जाने की आवश्यकता नहीं होती है। उसी तरह सरकार को एमएसपी को लेकर भी कानून में एक लाइन का प्रावधान करना था जिसमें कहा जाता कि सरकार की तरफ से लागू एमएसपी प्राइवेट सेक्टर पर भी लागू होगी। इससे होता कि प्रशासनिक रूप से सरकार की तरफ से जो जीएसटी तय किया जाता वह प्राइवेट सेक्टर पर भी लागू हो जाती।

सिंह ने कहा कि यह दो व्यवस्थाओं की लड़ाई है। एक व्यवस्था मंडी की है जहां पहले किसान बाध्य होता था कि उसे अपनी उपज वहीं बेचनी है। दूसरी व्यवस्था में अब सरकार कह रही है कि आप उससे बाहर भी बेच सकते हो। पहली व्यवस्था में एसएसपी लागू होती थी। उन्होंने कहा कि दूसरी व्यवस्था जो आपने मार्केट फ्री की है उसमें भी एमएसपी लागू कर दो। प्राइवेट सेक्टर हो या सरकारी सेक्टर दोनों में से कोई भी एमएसपी से नीचे ना खरीदें।

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