करनाल में किसानों ने डाला डेरा तो फिर बंद कर दी गईं इंटरनेट और SMS सुविधाएं, टिकैत बोले- अब यहां भी दिल्ली जैसा आंदोलन

किसानों ने राजधानी दिल्ली की तरह यहां भी पंडाल तैयार कर लिए हैं और कहा है कि मांगें पूरी नहीं हुई तो वे यहां भी लंबी लड़ाई के लिए तैयार हैं। इसको ध्यान में रखते हुए हरियाणा सरकार ने ज़िले में मोबाइल, इंटरनेट और एसएमएस सेवाओं को निलंबित कर दिया है।

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करनाल में किसानों धरना प्रदर्शन कर रहे हैं। (express file photo)

मोदी सरकार के तीन कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों का प्रदर्शन पिछले 9 महीने से जारी है। किसानों पर 28 अगस्त को हुए पुलिस के कथित लाठीचार्ज के विरोध में करनाल में किसानों धरना प्रदर्शन कर रहे हैं। किसानों ने राजधानी दिल्ली की तरह यहां भी पंडाल तैयार कर लिए हैं और कहा है कि मांगें पूरी नहीं हुई तो वे यहां भी लंबी लड़ाई के लिए तैयार हैं।

अन्नदाताओं के विरोध प्रदर्शन को ध्यान में रखते हुए हरियाणा सरकार ने ज़िले में मोबाइल, इंटरनेट और एसएमएस सेवाओं को निलंबित कर दिया है। हरियाणा के गृह विभाग की ओर से जारी आदेश के मुताबिक, करनाल में किसानों के आंदोलन के मद्देनजर हरियाणा सरकार ने “गलत सूचना के प्रसार को रोकने के लिए” जिले में मोबाइल इंटरनेट और एसएमएस सेवाओं को निलंबित कर दिया है। यह आदेश आज रात 11:59 बजे तक प्रभावी रहेगा।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक किसान नेताओं और पुलिस-प्रशासन के बीच सवा तीन घंटे में दो दौर की वार्ता हुई। पहले दौर की वार्ता में डीसी निशांत यादव व एसपी गंगाराम पूनिया ने प्रशासनिक टीम का नेतृत्व किया और दूसरे दौर में रेंज कमिश्नर की अगुवाई में बातचीत हुई।

भारतीय किसान यूनियन (BKU) के नेता राकेश टिकैत ने बैठक के बाद कहा कि प्रशासनिक टीम ने हर आधे घंटे बाद चंडीगढ़ बात की मगर ऐसा कोई सुझाव या प्रस्ताव नहीं आया, जिस पर सहमति बन सके। उनकी मांग है कि अधिकारी आयुष सिन्हा पर केस दर्ज कर निलंबित किया जाए। मगर सरकार ऐसा करने के लिए तैयार नहीं है। उन्होंने कहा कि जब तक सरकार उनकी मांगों को नहीं मान लेती करनाल सचिवालय के बाहर धरना जारी रहेगा।

टिकैत ने कहा, “हम करनाल में भी मोर्चा शुरू करेंगे जो दिल्ली की सीमाओं पर चल रहे विरोध प्रदर्शन के समानांतर होगा और हमारे नेता आगे की चर्चा के लिए यहां रहेंगे।” बता दें पिछले नौ महीनों से दिल्ली से सटी सिंघू, टिकरी, गाजीपुर और अन्य सीमाओं पर पंजाब, हरियाणा और अन्य उत्तर भारतीय राज्यों के हजारों किसान विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।

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