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किसान आंदोलन शांत कराने का रास्ता खोज चुकी है सरकार! आज लिख कर आपत्ति बताएंगे अन्नदाता, फिर कल होगी बात

ज्ञान भवन में लगभग साढ़े तीन घंटे चली बैठक के बाद कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने बताया, 'बैठक अच्छी थी। हमने 3 दिसंबर को अगले चरण की बातचीत करने के फैसला किया है।

farm bills, farmersसरकार ने किसानों से लिखित में अपने मुद्दे देने को कहा है। (फोटो- तोषी तोबग्याल)

नए किसान कानूनों के खिलाफ किसानों को शांत करने के लिए केंद्र सरकार ने मंगलवार को किसानों के प्रतिनिधियों के साथ बात की। किसानों ने कमिटी बनाने के प्रस्ताव को तो नकार दिया लेकिन वे बातचीत के लिए तैयार हैं। विज्ञान भवन में लगभग साढ़े तीन घंटे चली बैठक के बाद कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने बताया, ‘बैठक अच्छी थी। हमने 3 दिसंबर को अगले चरण की बातचीत करने के फैसला किया है। हम चाहते हैं कि छोटे समूह से बात हो लेकिन किसान चाहते हैं कि सबकी बात सुनी जाए। हमें इससे कोई दिक्कत नहीं है।’

इस बैठक में तोमर के साथ रेल मंत्री पीयूष गोयल, केंद्रीय मंत्री सोम प्रकाश मौजूद थे। इसमें किसानों के 35 प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। बाद में तोमर ने यूपी के किसान नेता राकेश टिकैत से भी बात की। तोमर ने कहा, ‘हमने उनसे लिखित में अपनी शिकायतें देने को कहा है। हम उनपर गौर जरूर करेंगे।’ विज्ञान भवन में बैठक के बाद किसान नेताओं ने उम्मीद जताई है कि उनकी मांगें मानी जाएंगी। मंत्रालय ने बताया कि बैठक के दौरान एक एक्सपर्ट कमिटी बनाने की बात कही गई थी लेकिन किसानों ने कहा है कि वे बातचीत करके हल निकालना चाहते हैं।

मंत्रालय ने कहा, ‘बातचीत के दौरान सरकार ने कहा है कि किसान नेता अपनी समस्याओं को 2 दिसंबर को साझा करें। ये सारे मुद्दे बातचीत के चौथे चरण यानी 3 दिसंबर को डिसकस किए जाएंगे।’ मंत्रालय का कहना है कि दो चरणों की बत दिल्ली की सीमा पर ही हो गई थी।

बैठक से निकलने के बाद भारतीय किसान यूनियन (पंजाब) के महासचिव जगमोहन सिंह ने कहा, ‘हमने उन्हें कहा है कि इस कानून में बहुत सारे प्रावधान हैं जो कि किसानों के खिलाफ हैं। उन्होंने कमिटी बनाने की बात कही थी लेकिन ये कमिटी और कमिशन ऐसी प्रक्रिया है जो कि कभी खत्म ही नहीं होती। हमने उनके इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया। इसके बाद सरकार ने कहा कि अपनी दिक्कतों के लिखित रूप में दे दीजिए। हमने कहा कि मेमोरैंडम में हम पहले ही सब कुछ दे चुके हैं। लेकिन उन्होंने कहा कि आप स्पेसिफिक इशू लिखकर दें।’

उन्होंने कहा, ‘सरकार ने कहा कि हो सकता है कल कुछ हल निकल आए वरना फिर बैठक होगी। हमने कहा कि संसद में भी दो महीने का सत्र होता है। कृषि देश की रीढ़ की हड्डी है। हम बैठकर बात करेंगे और जबतक मांगें पूरी नहीं हो जाती आंदोलन चलता रहेगा।’

जम्मूरी किसान सभा के महासचिव कुलवंत सिंह संधू ने कहा, ‘पहले वे पंजाब के किसान यूनियनों से ही बात करना चाहते थे लेकिन हमने कहा कि यह देशव्यापी आंदोलन है और सभी प्रतिनिधियों से बात करनी होगी। उन्होंने कमिटी बनाने का प्रस्ताव रखा जिसे अस्वीकार कर दिया गया। आंदोलन चलता रहेगा।’ ऑल इंडिया किसान सभा के पंजाब के महासचिव मेजर सिंह पुनावाल ने कहा, कमिटी बनाने के मतलब मुद्दे को ठंडे बस्ते में डाल देना। बातचीत सबके साथ होगी, हालांकि हम कुछ लोग ही बैठक में बोलेंगे।

सूत्रों का कहना है कि एमएसपी किसानों की प्रमुख मुद्दा है जिसे एग्जिक्यूटिव ऑर्डर के जरिए सरकार सुलझा सकती है। बीजेपी सरकार किसानों की दिक्कतों का हल निकालना चाहती है लेकिन इन कानूनों को वापस लेने के मूड में नहीं है। प्रधानमंत्री मोदी अपनी सभाओं ओर मन की बात कार्यक्रम में भी कह चुके हैं कि यह बिल कृषि और किसानों के लिए लाभदायी है। बीजेपी का आरोप है कि विपक्षी दल किसानों को बरगला रहे हैं।

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