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किसान आंदोलन: SC द्वारा गठित कमेटी के एक सदस्य ने खुद को कमेटी से किया अलग, भूपिंदर सिंह मान बोले- किसी भी पद की बलि दे सकता हूं

भूपिंदर सिंह मान ने कहा कि 'एक किसान और संगठन का नेता होने के नाते मैं किसानों की भावना जानता हूं। मैं अपने किसानों और पंजाब के प्रति वफादार हूं। इन के हितों से कभी कोई समझौता नहीं कर सकता। मैं इसके लिए कितने भी बड़े पद या सम्मान की बलि चढ़ा सकता हूं।'

farmers, farmers protestभूपिंदर सिंह मान। फोटो सोर्स – फेसबुक, @bhupinder singh mann

किसान आंदोलन को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने अभी हाल ही में चार सदस्यों की एक कमेटी बनाई थी। अब इस कमेटी से इसके एक सदस्य भूपिंदर सिंह मान ने खुद को अलग कर लिया है। भूपिंदर सिंह मान भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष और अखिल भारतीय किसान समन्वय समिति के अध्यक्ष भी हैं। भूपिंदर सिंह मान ने जो प्रेस स्टेटमेंट जारी किया है उसमें लिखा गया है कि ‘किसान संगठनों से बातचीत के लिए सुप्रीम कोर्ट ने 4 सदस्यों की कमेटी बनाई और इस कमेटी में मुझे शामिल किया गया इसके लिए बेहद शुक्रिया।

एक किसान और संगठन का नेता होने के नाते मैं किसानों की भावना जानता हूं। मैं अपने किसानों और पंजाब के प्रति वफादार हूं। इन के हितों से कभी कोई समझौता नहीं कर सकता। मैं इसके लिए कितने भी बड़े पद या सम्मान की बलि चढ़ा सकता हूं। मैं कोर्ट की ओर से दी गई जिम्मेदारी नहीं निभा सकता। मैं खुद को इस कमेटी से अलग करता हूं।

सुप्रीम कोर्ट ने किसान और सरकार के बीच गतिरोध को खत्म करके समाधान निकालने के लिए चार सदस्यीय कमेटी बनाई है। इस कमेटी में ऑल इंडिया किसान कॉर्डिनेशन कमेटी के प्रमुख और पूर्व राज्यसभा सांसद भूपिंदर सिंह मान को भी शामिल किया गया था। उनके संगठन के तहत कई किसान संगठन आते हैं। किसानों के बीच भूपिंदर सिंह मान की गहरी पैठ मानी जाती है।

तीन कृषि कानूनों के खिलाफ कई दिनों से प्रदर्शन कर रहे किसानों से बातचीत करने के लिए शीर्ष अदालत की तरफ से बनाई गई चार सदस्यों की समिति में BKU के अध्यक्ष भूपिंदर सिंह मान, शेतकारी संगठन (महाराष्ट्र) के अध्यक्ष अनिल घनवत, अंतरराष्ट्रीय खाद्य नीति शोध संस्थान दक्षिण एशिया के निदेशक प्रमोद कुमार जोशी और कृषि अर्थशास्त्री अशोक गुलाटी शामिल हैं। प्रदर्शनकारी किसानों का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा बनाई गई कमेटी के कई सदस्य कृषि कानूनों के समर्थक हैं।

 

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