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आपको MSP की सारी जानकारी किसान आंदोलन के बाद मिली है क्या? एंकर ने पवन खेड़ा से पूछा सवाल तो मिला ये जवाब

कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि एमएसपी कौन लाया? मोदी जी तो नहीं लाए ना। हरित क्रांति के बाद जो कृषि सुधार हुए तो न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) उसका हिस्सा बनी। ये कांग्रेस सरकार लाई...किसानों के हितों के लिए लाई।

कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा। (फाइल फोटो)

केन्द्र के नए तीन कृषि कानूनों को वापस लिए जाने की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे हजारों किसान शुक्रवार को लगातार नौंवे दिन कड़ी सुरक्षा के बीच राष्ट्रीय राजधानी से लगी सीमाओं पर डटे हैं। वहीं, टीवी पर कांग्रेस और भाजपा नेता लगातार एक दूसरे को  किसानों की दुर्दशा का जिम्मेदार ठहराने में लगे हैं।

किसानों के विरोध प्रदर्शन को लेकर टीवी डिबेट में कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने किसानों के मन में जो डर है उस बात को भाजपा नेता भी स्वीकार कर रहे हैं। पवन खेड़ा ने कहा कि शांता कुमार समिति ने भी इसकी तरफ इशारा किया था। भाजपा नेता ओपी धनखड़ की तरफ से एमएसपी पर विचार करने की बात पर कांग्रेस नेता ने कहा कि इस पर विचार करने का समय जून के अध्यादेश के कहीं पहले था। उन्होंने कहा कि जुलाई में जब किसान अध्यादेश के खिलाफ सड़कों पर उतरे तो शायद तब भी इस पर विचार किया जा सकता था।

पवन खेड़ा ने कहा कि अब विचार का समय नहीं है अब तो सरकार को तीनों काले कानून को वापस लेना होगा। फिर चाहे सरकार आराम से एमएसपी पर विचार करे। कांग्रेस प्रवक्ता की इस बात पर न्यूज एंकर ने कहा कि एमएसपी के महत्व के बारे में सारी जानकारी आप लोगों को किसानों के आंदोलन या कृषि बिल के आने के बाद पता चली है क्या? या फिर अपने दशकों के शासन काल में आपको इस बात का पता था कि किसानों को एमएसपी देना चाहिए।

एंकर ने आगे कहा कि एमएसपी को कानूनी रूप से  बाध्य करने पर आप क्यों इतनी गहरी नींद में थे। इस पर कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि एमएसपी कौन लाया? मोदी जी तो नहीं लाए ना। पवन खेड़ा ने कहा कि हरित क्रांति के बाद जो कृषि सुधार हुए तो न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) उसका हिस्सा बनी।

ये कांग्रेस सरकार लाई…किसानों के हितों के लिए लाई। उन्होंने आगे कहा कि आज किसान जिस तरह से आक्रोशित होकर एमएसपी को कानूनी जामा पहनाने की मांग कर रहे हैं, उससे पहले इतने क्रोध में उन्होंने यह मांग इसलिए भी नहीं की थी क्योंकि उन्हें सरकारों पर विश्वास था भले ही वह वाजपेयी जी की सरकार रही हो या कांग्रेस की सरकार रही हो।

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