किसान आंदोलन: अन्नदाताओं ने ठुकराया केंद्र का प्रस्ताव, जानिए 20 पन्नों में क्या थे सरकार के सुझाव

बुधवार को केंद्र ने किसानों को एक प्रस्ताव भेजकर उनकी मांगों के संबंध में बिलों में कुछ संशोधन करने के संकेत दिए थे।

farmers protestदिल्ली-हरियाणा बॉर्डर पर प्रदर्शन कर रहे क्रांतिकारी किसान यूनियन के अध्यक्ष दर्शन पाल ने सरकार के प्रस्ताव को ठुकरा दिया। (ANI)

तीन नए कृषि बिलों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे किसानों ने भारत सरकार के प्रस्ताव को ठुकरा दिया है। बुधवार को केंद्र ने किसानों को एक प्रस्ताव भेजकर उनकी मांगों के संबंध में बिलों में कुछ संशोधन करने के संकेत दिए थे। मगर दिल्ली-हरियाणा बॉर्डर पर प्रदर्शन कर रहे क्रांतिकारी किसान यूनियन के अध्यक्ष दर्शन पाल ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में सरकार के प्रस्ताव को ठुकरा दिया। उन्होंने कहा कि हम सरकार के प्रस्ताव को अस्वीकार करते हैं।

बता दें कि इससे पहले प्रदर्शनकारी किसानों को भारत सरकार ने 20 पन्नों का एक प्रस्ताव भेजा। इसमें कहा गया कि सरकार कृषि कानून के उन प्रावधानों पर विचार करने के लिए तैयार है जिनपर किसानों को आपत्ति है। प्रस्ताव के अनुसार किसानों को लगता है कि इन कानूनों के बाद मंडी समितियों की मंडियां कमजोर हो जाएंगी और अन्नदाता निजी मंडियों के चंगुल में फंस जाएगा।

मगर नए प्रावधान में ऐसा नहीं है। इसका मकसद फसल बेचने के नए विकल्प मुहैया कराना भी है। इससे फसल खरीद पर प्रतिस्पर्धा हो सकेगी और किसानों को अधिक मूल्य मिलेगा। प्रस्ताव में केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि किसानों को फसल बेचने के विकल्प के अतिरिक्त पहले की तरह मंडी में बेचने और एमएसपी पर सरकारी खरीद का विकल्प रहेगा।

इस संबंध में पूरा मामला यहां पढ़ें-

केंद्र सरकार ने किसानों की दूसरी चिंता जिसमें उन्हें पंजीकरण की जगह पैन कार्ड से फसल खरीद से धोखा होने की आशंका है। सरकार ने कहा कि नए अधिनियमों में किसानों को अधिक विकल्प देने के लिए ऐसा किया गया। अगर उन्हें आशंका है तो इसके समाधान के लिए पंजीकरण नियम बनाए जा सकते हैं। राज्य सरकारें अपने हिसाब से किसानों के हित में नियम बना सकेंगी।

यहां देखें पूरा प्रस्ताव-

आंदोलन कर रहे किसानों का एक बड़ा मुद्दा है कि किसी विवाद की स्थिति में उनके पास सिविल कोर्ट में जाने का विकल्प नहीं है। इससे उन्होंने इंसाफ ना मिलने का डर सता रहा है। सरकार ने कहा कि इसके समाधान के लिए नए कानूनों में सिविल कोर्ट में जाने का विकल्प दिया जा सकता है।

देखें-

किसानों का एक मुद्दा ये भी है कि कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग में रजिस्ट्रेशन की व्यवस्था नहीं है। इसपर सरकार ने कहा कि जब तक राज्य सरकारें पंजीकरण की व्यवस्था नहीं बनातीं तब तक लिखित करार की एक कॉपी 30 दिन के भीतर एसडीएम ऑफिस में उपलब्ध कराने की व्यवस्था होगी।

देखें सरकार का प्रस्ताव-

प्रदर्शनकारी किसानों की एक मांग ये भी है कि नए कृषि बिलों के लागू होने के बाद उद्योगपति किसानों की जमीनों पर कब्जा कर लेंगे और अन्नदाता के पास जमीन नहीं बचेगी। इस इस पर सरकार ने सफाई दी है।

देखें-

सरकार ने प्रस्ताव में और क्या कहा, यहां देखें

प्रस्ताव के आखिर में केंद्र सरकार ने किसानों से अपील की कि पूरी संवेदना के साथ उनके मुद्दों को हल करने का प्रयास किया गया। इसलिए सभी किसान यूनियनों से अपील है कि वो अपना आंदोलन खत्म करें।

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