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सरकार ने 10 साल पुराने ट्रैक्टरों पर बैन लगाया है, पर हम उन्हें ही दिल्ली की सड़कों पर चलाकर दिखाएंगे- बोले किसान नेता राकेश टिकैत

भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता राकेश टिकैत का कहना है कि अगर आंदोलन में कोई देश विरोधी बातें कर रहा है तो सरकार उसे गिरफ़्तार करे।

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भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता राकेश टिकैत का कहना है कि अगर आंदोलन में कोई देश विरोधी बातें कर रहा है तो सरकार उसे गिरफ़्तार करे। कृषि क़ानून कैसे ख़त्म हो सरकार इस पर काम करे। सरकार ने 10 साल पुराने ट्रैक्टर पर बैन लगाया है तो हम 10 साल पुराने ट्रैक्टर को दिल्ली की सड़कों पर चला कर दिखाएंगे।

बता दें कि आज पंजाब में किसानों ने कृषि कानून के विरोध में लोहड़ी के मौके पर कई स्थानों पर केंद्र सरकार द्वारा लाए गए तीन नए कृषि कानूनों की प्रतियां जलाईं। मालूम हो कि लोहड़ी का त्योहार पंजाब, हरियाणा और उत्तर भारत के अन्य हिस्सों में मनाया जाता है। विभिन्न किसान यूनियन से जुड़े किसानों ने राज्य के कई स्थानों पर विरोध प्रदर्शन किया और नए कृषि कानूनों की प्रतियां जलाईं।

किसानों ने भाजपा के नेतृत्व वाले केंद्र के खिलाफ भी नारेबाजी की और सरकार से उनकी मांगों को नहीं मानने के लिए नारेबाजी की। उन्होंने मांग की कि नए कृषि कानूनों को निरस्त किया जाना चाहिए। किसान मजदूर संघर्ष समिति के बैनर तले महिलाओं सहित किसानों ने अमृतसर के पंढेरकलान गांव में विरोध प्रदर्शन किया।

समिति के महासचिव सरवन सिंह पंढेर ने कहा, “हमने इन कानूनों के विरोध में कृषि कानूनों की प्रतियां जलाईं।” इसी तरह का विरोध प्रदर्शन अमृतसर में अन्य स्थानों पर भी किया जा रहा है। पंढेर ने कहा,”जब तक केंद्र किसानों की सभी मांगों को स्वीकार नहीं करता, तब तक हमारा आंदोलन जारी रहेगा।”

एक प्रदर्शनकारी ने कहा, “हम इन कृषि कानूनों को स्वीकार नहीं करेंगे क्योंकि ये किसान समुदाय के हित में नहीं हैं और सरकार को इन कानूनों को निरस्त करना चाहिए।” किसानों ने राज्य के होशियारपुर, संगरूर और कपूरथला सहित कई स्थानों पर नए कृषि कानूनों की प्रतियां भी जलाईं।

बता दें कि किसान, जो दिल्ली की सीमाओं पर डेरा डाले हुए हैं, कृषि कानूनों को निरस्त करने और फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य की कानूनी गारंटी की मांग कर रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को विवादास्पद नए कृषि कानूनों को अगले आदेशों तक लागू करने पर रोक लगा दी थी और केंद्र और दिल्ली की सीमाओं पर विरोध कर रहे किसान यूनियनों के बीच गतिरोध को हल करने के लिए 4 सदस्यीय समिति गठित करने का फैसला किया।

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