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किसानों के सवाल बड़े हैं या 2000 रुपए का सम्मान? ‘सम्मान निधि’ ट्रांसफर पर रवीश कुमार ने उठाया सवाल, पोस्ट वायरल

नये कृषि कानूनों के विरोध में करीब एक माह से चल रहे किसान आंदोलन के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को कहा कि सरकार उन लोगों के साथ भी बातचीत करने को तैयार है जो अलग विचारधारा के चलते सरकार के खिलाफ हैं। लेकिन यह भी कहा कि ‘बातचीत तर्कसंगत, तथ्यों और मुद्दों पर आधारित होनी चाहिये।’

Author Edited By अभिषेक गुप्ता नई दिल्ली | Updated: December 26, 2020 11:37 AM
farmers protest, farm laws, farmers, delhi, narendra modiदिल्ली में किसानों के आंदोलन को शनिवार तक 31 दिन हो चुके हैं। केंद्र के लाए तीन कृषि कानूनों के खिलाफ अन्नदाता इस आंदोलन पर अड़े हैं। उनकी मांग है कि केंद्र इन्हें वापस ले। (फोटोः पीटीआई)

किसान आंदोलन के बीच अन्नदाताओं को पीएम किसान सम्मान निधि की रकम ट्रांसफर किए जाने पर NDTV के पत्रकार रवीश कुमार ने सवाल उठाया है। उन्होंने पूछा है कि किसानों के सवाल बड़े हैं या फिर 2000 रुपए का सम्मान? यह बात उन्होंने शुक्रवार को अपने एक फेसबुक पोस्ट के जरिए कही। उन्होंने पीएम द्वारा किसानों के खाते में रकम जारी किए जाने से पहले लिखा था, “किसानों के सवाल बड़े हैं या 2000 रुपये का सम्मान बड़ा है। अटल बिहारी वाजपेयी जयंती (25 दिसंबर) पर पीएम किसानों को सम्मानित करेंगे। 9 करोड़ किसानों के खाते में 2000 की किश्त जाएगी।”

बकौल रवीश, “प्रधानमंत्री को पैसे की ताक़त में बहुत यक़ीन है। इसलिए वे आंदोलनरत किसानों से बात नहीं कर इस राशि के बहाने किसानों से बात करेंगे। उन्हें यक़ीन है कि खाते में पैसा जाते ही किसान किश्त की बात करने लगेंगे। किश्त की जयकार करते हुए क़ानून के जयकारे लगाने लगेंगे। यह राशि किसानों के सम्मान और आंदोलन के बीच एक रेखा है। किसानों को तय करना है कि दो हज़ार के साथ दलाल और आतंकवादी कहा जा सकता है या दो हज़ार के साथ मांगे मान कर सम्मान चाहिए।”

उन्होंने लिखा था- आयोजन के लिए जो पैसा खर्च हो रहा है उसका कोई हिसाब नहीं। अनुमान ही लगा सकते हैं कि जब ज़िला से लेकर पंचायत स्तर पर कार्यक्रम होंगे तो उस पर कितने पैसे खर्च होंगे। किराये के टीवी स्क्रीन से लेकर कुर्सी वग़ैरह का इंतज़ाम होगा। अलग अलग योजनाओं के पैसे इसके आयोजन पर खर्च किए जा रहे हैं या अलग से बजट होता है। प्रधानमंत्री को बताना चाहिए कि आज के आयोजन पर पाँच सौ करोड़ ख़र्च हो रहा है या छह सौ करोड़ या दो सौ करोड़। हाल ही में गुजरात और मध्य प्रदेश के किसानों से बात करने का आयोजन किया गया जिस पर भी कुछ पैसे खर्च हुए ही होंगे।

बता दें कि नये कृषि कानूनों के विरोध में करीब एक माह से चल रहे किसान आंदोलन के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को कहा कि सरकार उन लोगों के साथ भी बातचीत करने को तैयार है जो अलग विचारधारा के चलते सरकार के खिलाफ हैं। लेकिन यह भी कहा कि ‘बातचीत तर्कसंगत, तथ्यों और मुद्दों पर आधारित होनी चाहिये।’ मोदी, पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के जन्म दिवस पर ‘प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि’ योजना की नयी किस्त में नौ करोड़ से अधिक किसानों के लिए औपचारिक रूप से 18,000 करोड़ रुपये की राशि जारी करने के बाद वीडियो कांफ्रेस के जरिए देश के किसानों को संबोधित कर रहे थे।

इसी बीच, कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहीं किसान यूनियनों ने शुक्रवार को आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का भाषण किसानों को ”बांटने और गुमराह” करने का प्रयास प्रतीत होता है। उन्होंने कहा कि वे न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को लेकर कानूनी गारंटी चाहते हैं। राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों द्वारा अपना एजेंडा आगे बढ़ाने के लिये आंदोलन का इस्तेमाल करने के प्रधानमंत्री के आरोप पर प्रतिक्रिया देते हुए किसान नेता अभिमन्यु कोहाड़ ने कहा कि यूनियन ने कभी भी किसी राजनीतिक दल को अपना मंच इस्तेमाल नहीं करने दिया।

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