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किसानों को 7 समुंदर पार से मिला सपोर्ट, बोले टिकैत- विदेशियों से हमारा मतलब नहीं; ब्रिटिश नेता बोले- ये भारत का अंदरूनी मसला

विदेशियों द्वारा किसान आंदोलन के समर्थन पर किसान नेता नरेश टिकैत का कहना है कि विदेश से हमारा कोई मतलब नहीं है।

Author Edited By subodh gargya नई दिल्ली | February 12, 2021 7:52 PM
naresh tikaitकिसान नेता नरेश टिकैत ने कहा कि विदेश से उन्हें कोई मतलब नहीं है। (PTI)

विदेशियों द्वारा किसान आंदोलन के समर्थन पर किसान नेता नरेश टिकैत का कहना है कि विदेश से हमारा कोई मतलब नहीं है। हमारा तो यही कहना है विदेशों में भी बात तो जाती है और सरकार की छवि खराब हो रही है तो इस तरह की नौबत क्‍यों ला रहे हैं। वहीं, ब्रिटेन की संसद के निचले सदन ‘हाउस ऑफ कॉमंस’ के नेता ने भारत में नये कृषि कानूनों के खिलाफ चल रहे किसानों के प्रदर्शन पर अपनी सरकार के रुख को प्रदर्शित करते हुए कहा है कि कृषि सुधार उसका (भारत का) घरेलू मुद्दा है।

आज भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष नरेश टिकैत ने शुक्रवार को किसान आंदोलन के मसले पर कहा कि अगर सरकार अपना अड़ि‍यल रवैया छोड़ दे और किसानों के मान सम्मान से खिलवाड़ ना करे तो मामला सुलझ सकता है। उन्‍होंने कहा कि सबकुछ सरकार पर निर्भर है। टिकैत ने कहा, ‘‘कृषि घाटे का सौदा हो गई है और वे (सरकार) कह रहे हैं कि इसमें फायदा है, हमें अपना नफा-नुकसान पता है, इसलिए वे इस तरह का रवैया ना अपनावें।’’

बता दें कि केंद्र के नये कृषि कानूनों के खिलाफ जारी आंदोलन के लिए समर्थन जुटाने को लेकर भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत हरियाणा, राजस्थान और महाराष्ट्र में ‘‘किसान महापंचायत’’ में शामिल होंगे। यह रविवार से शुरू होने जा रही है। बीकेयू के मीडिया प्रभारी धर्मेंद्र मलिक ने बताया कि किसानों की बैठकें संयुक्त किसान मोर्चा के संपर्क कार्यक्रम का हिस्सा हैं। यह 23 फरवरी को संपन्न होगी। उन्होंने बताया कि किसान महापंचायत हरियाणा के करनाल, रोहतक, सिरसा और हिसार जिलों में, राजस्थान के सीकर में और महाराष्ट्र के अकोला में करने का कार्यक्रम है।

वहीं, ब्रिटेन की संसद के निचले सदन ‘हाउस ऑफ कॉमंस’ के नेता ने भारत में नये कृषि कानूनों के खिलाफ चल रहे किसानों के प्रदर्शन पर अपनी सरकार के रुख को प्रदर्शित करते हुए कहा है कि कृषि सुधार उसका (भारत का) घरेलू मुद्दा है। इस मुद्दे पर चर्चा कराने की बृहस्पतिवार को विपक्षी लेबर सांसदों की मांग पर जैकब रेस-मॉग ने स्वीकार किया कि यह मुद्दा सदन के लिए और ब्रिटेन में समूचे निर्वाचन क्षेत्रों के लिए चिंता का विषय है।

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