ताज़ा खबर
 

किसानों का दावा, सरकार ने अदालत जाने को कहा; कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर ने इससे किया इनकार

वार्ता के बाद तोमर ने कहा, ‘हम लोकतांत्रिक देश हैं। जब कोई कानून बनता है तो उच्चतम न्यायालय को इसकी समीक्षा करने का अधिकार है। हर कोई शीर्ष अदालत के प्रति प्रतिबद्ध है। सरकार उच्चतम न्यायालय के आदेशों का पालन करने के लिए प्रतिबद्ध है।’

farmers meetingतीन कृषि कानूनों को लेकर शुक्रवार को नौवें दौर की वार्ता के दौरान किसान। (फोटो- एजेंसी)

सरकार और किसान संगठनों के प्रतिनिधियों के बीच तीन कृषि कानूनों को लेकर शुक्रवार को नौवें दौर की वार्ता बेनतीजा रही। अगली बैठक 15 जनवरी को हो सकती है। कुछ किसान नेताओं ने यह कहा कि सरकार की तरफ से किसानों को उच्चतम न्यायालय में चल रही सुनवाई में पक्षकार बनने को कहा गया। हालांकि कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर ने किसानों के इस दावे का खंडन किया।

उन्होंने कहा कि चूंकि सर्वोच्च अदालत में 11 जनवरी को इस मामले की सुनवाई होनी है, इसलिए यह मामला सामने लाया गया। इसके साथ ही किसान नेताओं ने कहा कि समस्या के समाधान के लिए एक कमेटी बनाने का भी सुझाव दिया गया, जिसमें केंद्र और किसान संघों के प्रतिनिधि को शामिल करने की बात कही गई है।

बैठक के दौरान प्रमुख किसान नेता बलवीर सिंह राजेवाल ने कहा कि उच्चतम न्यायालय के पूर्व के कई फैसलों में स्पष्ट किया गया है कि कृषि राज्य का विषय है लेकिन किसान संगठन अदालत का रुख करना नहीं चाहते। कृषि कानूनों को निरस्त करने की अपनी मांग पर अड़े किसान नेताओं ने सरकार से दो टूक कहा कि उनकी ‘घर वापसी’ तभी होगी, जब इन कानूनों को वापस ले लिया जाएगा। वार्ता में शामिल केंद्रीय मंत्रियों ने कानूनों को पूरी तरह से निरस्त करने की मांग खारिज करते हुए इसके विवादास्पद बिंदुओं तक चर्चा सीमित रखने पर जोर दिया।

वार्ता के बाद तोमर ने कहा, ‘हम लोकतांत्रिक देश हैं। जब कोई कानून बनता है तो उच्चतम न्यायालय को इसकी समीक्षा करने का अधिकार है। हर कोई शीर्ष अदालत के प्रति प्रतिबद्ध है। सरकार उच्चतम न्यायालय के आदेशों का पालन करने के लिए प्रतिबद्ध है।’ सरकारी सूत्रों ने कहा कि उच्चतम न्यायालय किसान आंदोलन से जुड़े अन्य मुद्दों के अलावा तीनों कानूनों की वैधता पर भी विचार कर सकता है।

बातचीत के दौरान किसानों के तेवर काफी कड़े थे। उन्होंने सरकार पर यह आरोप भी लगाया कि शायद उसका मन मामले के निपटारे पर नहीं है। किसान संगठनों ने आगे की रणनीति पर चर्चा करने के लिए 11 जनवरी को बैठक बुलाई है। उसी दिन सुप्रीम कोर्ट में इस मामले में सुनवाई है। बैठक के बाद किसान नेता जोगिंदर सिंह उगराहां ने कहा कि बैठक बेनतीजा रही और अगली वार्ता में कोई नतीजा निकलेगा, इसकी संभावना भी नहीं है।

उन्होंने कहा, ‘हम तीनों कानूनों को निरस्त करने के अलावा कुछ और नहीं चाहते।’ किसान नेता हन्नान मोल्ला ने कहा कि किसान जीवन के अंतिम क्षण तक लड़ने को तैयार है। उन्होंने अदालत का रुख करने के विकल्प को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि किसान संगठन 11 जनवरी को आपस में बैठक कर आगे की रणनीति पर चर्चा करेंगे।

सरकार और प्रदर्शनकारी किसानों के 41 सदस्यीय प्रतिनिधियों के साथ आठवें दौर की वार्ता में सत्ता पक्ष की ओर से दावा किया गया कि विभिन्न राज्यों के किसानों के एक बड़े समूह ने इन कानूनों का स्वागत किया है। सरकार ने किसान नेताओं से कहा कि उन्हें पूरे देश का हित समझना चाहिए। कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, रेलवे-वाणिज्य व खाद्य मंत्री पीयूष गोयल और वाणिज्य राज्य मंत्री व पंजाब से सांसद सोम प्रकाश ने किसान संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ विज्ञान भवन में वार्ता की। दो घंटे तक चली वार्ता में किसान अपना लंगर ले गए थे।

अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति (एआइकेएससीसी) की कविता कुरुगंती ने बताया कि सरकार ने किसानों से कहा है कि वह इन कानूनों को वापस नहीं ले सकती और ना लेगी। कविता भी बैठक में शामिल थीं।
इससे पहले, चार जनवरी को हुई वार्ता बेनतीजा रही थी क्योंकि किसान संगठन तीनों कृषि कानूनों को निरस्त करने की अपनी मांग पर डटे रहे, वहीं सरकार समस्या वाले प्रावधानों या गतिरोध दूर करने के लिए अन्य विकल्पों पर ही बात करना चाहती है। किसान संगठनों और केंद्र के बीच 30 दिसंबर को छठे दौर की वार्ता में दो मांगों पराली जलाने को अपराध की श्रेणी से बाहर करने और बिजली पर सबसिडी जारी रखने को लेकर सहमति बनी थी।

Next Stories
1 कृषि पद्धति में सुधार से पूरा होगा सभी के लिए भोजन का लक्ष्य, सही बीजों का चयन और बेहतर फसल उत्पादन ज़रूरी
2 ‘अकाली दल को अर्णब गोस्वामी अहिंसा पर पाठ पढ़ाएगा’, Republic TV पर बोले महिंदर सिंह ग्रेवाल
3 बिहार में रोजगार के लिए हाहाकार! कहीं नियुक्ति पत्र के लिए अभ्यर्थियों का हंगामा तो कहीं BTech पास भर रहे चपरासी का फॉर्म; विपक्ष ने कसा तंज
ये पढ़ा क्या?
X