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केजरीवाल भाषण देते रहे और गजेंद्र जिंदगी की जंग हार गया

भूमि अधिग्रहण अध्यादेश के खिलाफ आम आदमी पार्टी की जंतर-मंतर पर आयोजित रैली के दौरान बुधवार को राजस्थान के एक किसान ने पेड़ से लटककर अपनी जान दे दी...

Author April 23, 2015 11:03 am
खुद को फांसी लगाने के पहले गजेंद्र सिंह आप की रैली में।

अमलेश राजू

भूमि अधिग्रहण अध्यादेश के खिलाफ आम आदमी पार्टी की जंतर-मंतर पर आयोजित रैली के दौरान बुधवार को राजस्थान के एक किसान ने पेड़ से लटककर अपनी जान दे दी। भारी संख्या में मौजूद आम आदमी पार्टी के समर्थकों और पुलिस दस्तों के सामने यह हादसा हुआ और ये सभी घटना के मूकदर्शक बने रहे।

इतना ही नहीं, किसान गजेंद्र सिंह की खुदकुशी के बाद भी मंच से अरविंद केजरवाल व दूसरे आप नेताओं के भाषण चलते रहे। भाषण पूरे होने के बाद आप नेताओं का ध्यान किसान की मौत की तरफ दिलाया गया तो वे मृतक के बारे में दरियाफ्त करने के लिए राममनोहर लोहिया अस्पताल पहुंचे। कांग्रेस नेता राहुल गांधी व अन्य नेता भी अस्पताल पहुंचे। वहां डॉक्टरों ने पुष्टि की कि गजेंद्र की मौत ठौर पर ही हो गई थी।

इस बीच गृह मंत्रालय ने किसान की खुदकुशी के मामले में जांच के आदेश दिए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस घटना पर दुख जताया है। भाजपा ने इस दुखद घटना के लिए आप को लताड़ते हुए कहा है कि उसे किसान की मौत पर सियासत से बाज आना चाहिए। विरोधियों ने घटना के बाद भी रैली जारी रखने पर इस ‘अति संवेदनहीनता’ को लेकर केजरीवाल पर निशाना साधा है। उन्होंने आप के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज करने की मांग की।

उधर कांग्रेस ने इस हादसे के लिए भाजपा और आप, दोनों पर निशाना साधा है। दूसरी ओर आप के नेताओं ने घटना के लिए रैली के दौरान निष्क्रिय रहीपुलिस को दोषी ठहराया है।

जंतर-मंतर पर बुधवार दोपहर डेढ़ बजे के करीब आप की रैली के दौरान राजस्थान के दौसा वासी किसान गजेंद्र सिंह ने नीम के एक पेड़ पर चढ़कर गमछे से फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली। लोगों का कहना है कि दोपहर पौने एक बजे वह पेड़ पर चढ़ा था। उसके हाथ में लंबी झाड़ू थी और 25 मिनट तक वह पेड़ पर बैठा रहा। उसे कुछ नारे भी लगाए। रैली में मौजूद लोगों को उसके इरादे की कतई भनक नहीं थी। थोड़ी देर में उसने जब गले में गमछे का फंदा लगाना शुरू किया तो लोगों ने उसे आवाज देकर बुलाने की कोशिश की। लेकिन गजेंद्र पर इसका असर नहीं दिखा। बेहोश होने के पहले उसने एक कागज फेंका, जिसमें उसने उम्र 41 साल बताते हुए लिखा कि उसकी फसल बरबाद हो चुकी है और पिता ने उसे घर से निकाल दिया है…।

गजेंद्र को पहले जिंदा समझकर अस्पताल ले जाया गया, पर उसकी मौत पहले ही हो चुकी थी। पर घटना का शर्मनाक और दुखद पहलू यह कि मंच पर आसीन नेताओं की तकरीर थमी नहीं। वे सरकार को कोसते रहे। केजरीवाल मोदी पर निशाना साधते हुए किसानों के हितों पर बोलते रहे और उधर गजेंद्र जिंदगी की जंग हार चुका था। इस रैली में हजारों लोग थे और भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया था। पर चश्मदीदों के मुताबिक, किसी ने भी समय रहते उसे बचाने का प्रयास नहीं किया।

हालांकि इस घटना को देखकर चंडीगढ़ के जोगेंद्र देशवार ने पेड़ पर चढ़कर उसे बचाने की कोशिश की, पर वे इसमें सफल नहीं हो सके और गजेंद्र पेड़ की टहनियों के साथ नीचे गिर गया। देशवार ने बताया कि पुलिस वालों ने किसी भी स्तर पर न तो उसे उतारने की और न ही खुदकुशी से बचाने की कोशिश की। पुलिस मूकदर्शक बनकर सब कुछ देख रही थी और किसान गर्दन में गमछा बांध रहा था। इंसानियत के नाते वह पेड़ पर चढ़ा, पर तब तक देर हो चुकी थी। आप नेताओं के अनुसार, पार्टी के कुछ कार्यकर्ताओं ने पेड़ पर चढ़कर उसे बचाने का प्रयास किया था।

देशवार ने यह भी बताया कि मरने वाले किसान के अगल-बगल की डालों पर और दो-तीन लोग बैठे थे पर किसी ने उसे उतारने की कोशिश नहीं की। पुलिस और आप नेताओं के सामने यह तमाशा चलता रहा और लोग रैली में मशगूल रहे। खुदकुशी करने वाले किसान के पास से मिले सुसाइड नोट के मुताबिक, उसने अपनी तंगहाली से आजिज आकर जान दी। कागज की एक छोटी से मिली पर्ची में उसने मोबाइल नंबर के साथ ‘जय जवान जय किसान, जय राजस्थान’ लिखा था। पर्ची में उसने अपनी परेशानी का भी जिक्र किया है। ऐसा लगा कि वह बेमौसम बारिश से पैदा हुई किसानों की विपदा की ओर ध्यान खींचने का प्रयास कर रहा है। किसान ने यह भी लिखा कि उसके तीन बच्चे हैं और वह परेशान है।

दौसा जिले के नांगल झामरवाड़ा के रहने वाले गजेंद्र सिंह ने 10वीं तक पढ़ाई की थी। सिंह के दो लड़कियां और एक बेटा है। दो भाइयों में गजेंद्र सिंह बड़ा था। एक छोटा भाई भी है। दौसा में गजेंद्र की पहचान किसान नेता के तौर पर थी। बताया जा रहा है कि बुधवार को ही उसके परिवार में किसी संबंधी की शादी भी थी। घटना के समय भारी संख्या में सीआरपीएफ और दिल्ली पुलिस के जवानों सहित कई आला अधिकारी भी मौजूद थे। दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर पर एक पुलिस चौकी भी बना रखी है जहां हमेशा पुलिस वालों की तैनाती रहती है। चूंकि बुधवार को आप कार्यकर्ताओं की योजना संसद मार्च की थी, इसलिए पुलिस की भारी तैनाती की गई थी।

घटना की सूचना मिलते ही केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने दिल्ली के पुलिस आयुक्त भीमसेन बस्सी को घटना की जांच के निर्देश दिए। मंत्री का निर्देश मिलते ही पुलिस आयुक्त ने घटना की तत्काल जांच नई दिल्ली के संयुक्त पुलिस आयुक्त से करने को कहा। उधर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भी गजेंद्र के परिवार के प्रति संवेदना जताते हुए इस घटना की मजिस्ट्रेटी जांच के आदेश दिए है।

इस मामले में राजस्थान कांग्रेस अध्यक्ष सचिन पायलट ने कहा कि वह किसान के परिवार की हर संभव मदद करेंगे। उन्होंने कहा कि इस घटना से जाहिर होता है कि किसान किस हालत में जी रहे हैं। किसान की मौत के बाद राममनोहर लोहिया अस्पताल पहुंचे दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल ने कहा कि रैली के दौरान उन्होंने और कार्यकर्ताओं ने किसान को पेड़ से उतरने के लिए कहा, लेकिन उसने किसी की नहीं सुनी और आत्महत्या कर ली।

बहरहाल किसान की मौत से बेखबरी दिखात हुए रैली में केजरीवाल ने कहा कि भूमि अधिग्रहण अध्यादेश तब लाया जाता है जब कोई मजबूरी हो। नरेंद्र मोदी सरकार के सामने ऐसी कौन-सी मजबूरी थी। केजरीवाल ने आरोप लगाया कि शायद मोदी सरकार किसी उद्योगपति को फायदा पहुंचाना चाहती थी तभी अध्यादेश लाकर इस कानून को लागू करने की कोशिश कर रही है।

उन्होंने कहा कि दिल्ली में जमीन हमारे अधिकार में नहीं है, लेकिन हम पूरी कोशिश करेंगे कि किसानों के साथ अन्याय न हो। दिल्ली के किसानों की जमीन नहीं लेने देंगे। आप नेताओं ने आरोप लगाया कि दिल्ली पुलिस मूकदर्शक बनी रही और किसान का जीवन बचाने के लिए कुछ नहीं किया। आप के कार्यकर्ताओं ने उससे अपील की कि वह नीचे उतर आए और उसे नीचे उतारने का प्रयास भी किया। परंतु जब तक वे गजेंद्र सिंह तक पहुंचते, तब तक उसने खुद को फांसी लगा ली थी। कार्यकर्ताओं ने उस तक पहुंचकर डाल से गमछे की गांठ खोलने की कोशिश की तो वह नीचे गिर गई।

तंगहाल गजेंद्र की मौत के बाद भी चलती रही आप नेताओं की भाषणबाजी बाद में आप नेताओं का ध्यान किसान की मौत की तरफ दिलाया गया तो वे मृतक के बारे में दरियाफ्त करने राममनोहर लोहिया अस्पताल पहुंचे।

प्रधानमंत्री ‘दुखी व निराश’
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रैली में किसान की आत्महत्या का जिक्र करते हुए ट्वीट किया, ‘गजेंद्र की मौत से देश दुखी है। हम काफी दुखी और निराश हैं। उनके परिवार को सांत्वना। मेहनती किसान को कभी भी नहीं सोचना चाहिए कि वह अकेला है। भारत के किसानों के लिए बेहतर कल बनाने में हम सभी साथ हैं।’

मुआवजे की मांग
आप के सांसद भगवंत मान पार्टी के नेता कुमार विश्वास, संजय सिंह और आशुतोष के साथ बैठक के बाद केंद्रीय कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह ने कहा कि आप के नेताओं ने दिल्ली रैली में किसान की आत्महत्या का मसला उठाया और उसके परिवार के लिए मुआवजे की मांग की।

किसानों को भरोसा
कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने सावधानी बरतते हुए कहा कि ‘दुख की इस घड़ी’ में वह कोई बयान नहीं देना चाहते लेकिन किसानों को आश्वस्त किया कि उनकी पार्टी किसानों के साथ मजबूती से खड़ी है।

घटना दुखद : वाम दल
माकपा महासचिव सीताराम येचुरी ने कहा कि यह दिखाता है कि देश में कृषि कितने गहरे संकट में है और किसान कितने दुखी। उन्होंने केंद्र सरकार को इस बारे में सोचने की सलाह दी। उधर भाकपा नेता डी. राजा ने कहा कि घटना से किसानों की गहरी निराशा झलकती है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार को भूमि अधिग्रहण विधेयक को टाल देना चाहिए और किसानों की समस्याओं पर ध्यान देना चाहिए।

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