पंजाब, विशेष रूप से इसका दोआबा क्षेत्र लंबे समय से आलू के बीज (Seed Potato) के एक प्रमुख केंद्र के रूप में जाना जाता है। यहां आलू की कई किस्मों का उत्पादन करता है जो ज्यादातर बाहर से भूरे और अंदर से सफेद या पीले रंग के होते हैं। हालांकि, फरीदकोट जिले के मट्ठा गांव के एक युवा प्रगतिशील किसान गुरजोत सिंह अब इस क्षेत्र को आलू की एक नई और अनोखी किस्म के बीज बनाने के लिए काम कर रहे हैं जो बाहर और अंदर दोनों तरफ से बैंगनी रंग का होता है। किसान के अनुसार, बैंगनी आलू के उत्पादन से गुणवत्ता और विपणन के आधार पर प्रति एकड़ 6 लाख से 20 लाख रुपये तक की कमाई हो सकती है।

मट्ठा स्थित नवराज सीड फार्म के गुरजोत ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया, “पारंपरिक आलूओं के विपरीत यह किस्म गहरे बैंगनी रंग की होती है, इसमें चीनी नहीं होती, यह विटामिन सी और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होती है और इसे डायबिटीज या जोड़ों के दर्द जैसी समस्याओं से जूझ रहे लोगों के लिए भी उपयुक्त माना जाता है। इसमें एंथोसायनिन की उच्च मात्रा होती है इसलिए बैंगनी आलू पोषक तत्वों से भरपूर और स्वास्थ्यवर्धक भोजन के रूप में ध्यान आकर्षित कर रहा है। अब हम बीज और खाने वाले आलू दोनों का उत्पादन कर रहे हैं।”

बैंगनी आलुओं की कीमत 280 से 400 रुपये प्रति किलोग्राम

किसान ने बताया कि उन्होंने सबसे पहले इस तरह के आलू दिल्ली और चंडीगढ़ के बड़े खुदरा स्टोरों में देखे थे , जिनकी कीमत 280 से 400 रुपये प्रति किलोग्राम के बीच थी। गुरजोत ने बताया कि जब उन्होंने पहली बार चंडीगढ़ की एक दुकान में ये आलू देखे तो उन्होंने अपने खेतों में उगाने की कोशिश करने के लिए कुछ किलोग्राम आलू खरीद लिए। हालांकि, उस खरीद से उन्हें कोई बीज कंद नहीं मिला इसलिए उन्होंने बीज आयात करने का फैसला किया।

2022 में किसान ने दक्षिण अमेरिका के बोलिविया से बैंगनी आलू के कुछ बोरे बीज मंगवाए। उन्होंने पंजाब की मिट्टी और जलवायु में फसल की पैदावार देखने के लिए कुछ मरला जमीन पर बीज बोए। यह प्रयोग सफल रहा। उस छोटे से खेत से ही उन्हें तीन कनाल जमीन में बोने के लिए पर्याप्त बीज मिल गए। अगले मौसम में, उन कनालों से प्राप्त बीजों को फिर से उगाया गया और लगभग तीन एकड़ जमीन पर बोया गया। कुछ ही वर्षों में फसल तेजी से फैल गई। चौथे वर्ष तक गुरजोत अपनी लगभग 35 एकड़ जमीन पर बैंगनी आलू की खेती कर रहे थे।

बैंगनी आलुओं की फसल पंजाब की जलवायु के अनुकूल अच्छी तरह से ढल जाती है

बैंगनी आलू की उत्पत्ति दक्षिण अमेरिका के एंडियन क्षेत्र में विशेष रूप से बोलीविया और पड़ोसी पेरू में मानी जाती है जहां सदियों से रंगीन आलू की खेती की जाती रही है। इन आलूओं का महत्व विश्व स्तर पर बढ़ता जा रहा है क्योंकि इनमें एंथोसायनिन की उच्च मात्रा पाई जाती है जो एंटीऑक्सीडेंट हैं और इनके गहरे बैंगनी रंग के लिए जिम्मेदार हैं। एंथोसायनिन का अधिक सेवन कई स्वास्थ्य लाभों से जुड़ा हुआ है जिनमें कोलेस्ट्रॉल के स्तर में सुधार, आंखों की बेहतर सेहत और हृदय रोग, कुछ प्रकार के कैंसर और मधुमेह के जोखिम में कमी शामिल है।”

गुरजोत के अनुसार, “यह फसल पंजाब की जलवायु परिस्थितियों के अनुकूल अच्छी तरह से ढल जाती है जो रोग-मुक्त बीज आलू के उत्पादन के लिए उपयुक्त है। इनका प्रति एकड़ औसत उत्पादन लगभग 50 किलोग्राम के 400 बोरे तक पहुंच सकता है। उन्होंने आगे बताया कि इन आलुओं की शेल्फ लाइफ सामान्य आलूओं की तुलना में लगभग दोगुनी होती है क्योंकि इनका छिलका मोटा होता है।”

गुरजोत ने बीज उत्पादन पर ध्यान केंद्रित किया है, जिससे अधिक लाभ मिलता है। पिछले सीजन में उन्होंने बैंगनी आलू के बीज 50 किलोग्राम के एक बोरे के लिए 5,000 रुपये प्रति बोरा के भाव से बेचे। एक एकड़ खेत से लगभग 200 क्विंटल बीज का उत्पादन हुआ।

बैंगनी आलुओं की फसल प्रति एकड़ 6 लाख से 20 लाख रुपये तक की आय दे सकती है

गुरजोत ने कहा कि अगर किसानों को उपज या कीमत में थोड़ी कमी भी आती है तो भी यह फसल प्रति एकड़ 6 लाख से 20 लाख रुपये तक की आय दे सकती है जबकि खर्च 50,000 से 60,000 रुपये प्रति एकड़ से अधिक नहीं होगा। उन्होंने आगे कहा कि अगर भविष्य में अधिक किसान इसकी खेती शुरू करते हैं तो कीमतें कम हो सकती हैं लेकिन फिर भी यह पंजाब में प्रचलित आलू की किस्मों की तुलना में अधिक लाभदायक रहेगी क्योंकि इसमें उच्च पोषक तत्व होते हैं और यह उन लोगों के लिए भी उपयुक्त है जो स्टार्च और चीनी की अधिक मात्रा के कारण सामान्य आलू खाने से परहेज करते हैं।

जब बाजार में सामान्य आलू मात्र 2 से 3 रुपये प्रति किलोग्राम बिक रहे थे, गुरजोत ने बताया कि वे थोक बाजार में बैंगनी आलू लगभग 28 रुपये प्रति किलोग्राम के भाव से बेच पाए। इस किस्म के ताजे आलू दिल्ली जैसे बाजारों में भी बिकते हैं जहां कम कीमत के मौसम में इनकी कीमत सामान्य आलू की तुलना में काफी अधिक रहती है।

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