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किसान आंदोलन: केंद्र सरकार सख्त, पर हरियाणा के सत्ताधारी नेता मांग रहे माफी, वापस ले रहे एफआईआर

किसान नेताओं पर ये  एफ़आईआर हिंसा करने के मामले में दर्ज की गयी है। लेकिन किसी भी बड़े किसान नेता को गिरफ्तार नहीं किया गया है।

Translated By कविता मिश्रा नई दिल्ली | June 10, 2021 11:06 AM
मोदी सरकार के लाए तीन कृषि कानूनों को लेकर केंद्र और आंदोलन किसानों के बीच फिलहाल गतिरोध बरकरार है। किसान भारी संख्या में अभी भी दिल्ली की सीमाओं पर डटे हैं। (फाइल फोटोः पीटीआई)

अब जनता का ध्यान दिल्ली की सीमाओं पर किसान विरोध से हट गया है। लेकिन किसानों की तरफ से हरियाणा में सत्तारूढ़ भाजपा और जजपा के खिलाफ प्रतिक्रिया में कोई कमी नहीं आई है। जिसके कारण भाजपा के नेताओं को हरियाणा दौरा रद्द करने पड़ रहा है। इसके साथ प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज  एफ़आईआर वापस लेने के लिए मजबूर किया गया है।और हरियाणा के सत्ताधारी नेता सार्वजानिक रूप से माफ़ी मांग रहे है।

आपको बता दें कि किसान नेताओं पर ये  एफ़आईआर हिंसा करने के मामले में दर्ज की गयी है। लेकिन किसी भी बड़े किसान नेता को गिरफ्तार नहीं किया गया है। दरअसल इसके पीछे का कारण यह है कि किसान नेता थानों के बाहर रैलियां और विरोध प्रदर्शन कर रहे है। किसान नेताओं द्वारा पुलिस थानों का घेराव करके गिरफ्तार किए गए लोगों को  रिहा करने की धमकी दी जा रही है। जिसकी वजह से गिरफ्तार किए गए कुछ लोगों को जमानत पर रिहा करना पड़ा है।

अभी हाल के दिनों में जेजेपी के नेता देवेंद्र बबली के काफिले पर कुछ लोगों के द्वारा उनके काफ़िले पर हमला भी किया था। हमले में उनके पीए राधे बिश्नोई के सिर में गंभीर चोटें आईं थी। जिसके बाद पुलिस ने दोषियों के ख़िलाफ़ मामला दर्ज कर लिया था। लेकिन तीन दिन बाद देवेंद्र बबली ने तीन दिन बाद ने कहा  कि उन्होंने  हमलावरों को माफ कर दिया है। उनकी तरफ से  एक हलफनामा देते हुए कहा गया है कि मेरी तरफ से दर्ज केस को वापस लेने पर कोई आपत्ति नहीं है। जिन लोगों ने गालियां देते हुए मेरे काफ़िले पर हमला किया था उन्होंने अपनी गलती के लिए माफ़ी मांग लिया है।

प्रदर्शनकारियों को मिल गयी जमानत: इस मामले में पुलिस ने देवेंद्र बबली के आवास के पास से तीन प्रदर्शनकारी गिरफ़्तार किए गए थे। जिसके बाद किसान नेता राकेश टिकैत और गुरनाम सिंह चादुनी ने टोहाना में पुलिस स्टेशन के बाहर टेंट में डेरा डाल दिया था। इसके साथ ही उन्होंने सड़क जाम करने और राज्य भर के पुलिस थानों का घेराव करने की भी धमकी दी थी। बाद में गिरफ़्तार तीनों प्रदर्शनकारियों जमानत पर रिहा कर दिया गया था।

पिछले महीने जींद निर्वाचन क्षेत्र में मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर कोरोना स्थिति का जायजा लेने के लिए आने वाले थे। उन्हें किसानों के विरोध का सामने न करना पड़े इसके लिए वहां प्रदर्शन कर रहे किसानों से जींद विधायक कृष्ण मिधा ने माफी मांगी थी। लेकिन विरोध कर रहे किसानों ने कृष्ण मिधा पर आरोप लगाते हुए कहा था कि मनोहर लाल खट्टर के दौरे का विरोध करने पर उनके द्वारा किसानों पर आपत्तिजनक टिप्पणी की गयी थी। कुछ लोगों ने यह भी आरोप लगाया था कि उनके परिवार के सदस्यों ने उन पर बंदूक तान दी थी। जिसके बाद स्थानीय खाप ने इस मामले को संज्ञान में लेते हुए जींद विधायक कृष्ण मिधा को फटकार लगाई थी।

विधायक ने किसानों से मांगी माफी:  विधायक कृष्ण मिधा ने किसानों से माफ़ी मांगी थी। खाप के नेता आजाद पलवा और सतबीर पहलवान ने बताया कि हमनें  उन्हें माफ कर दिया है। साथ उन्होंने यह भी बताया कि मिधा के परिवार के सदस्यों पर बंदूक से किसानों को धमकाने का आरोप लगाने वाली पुलिस शिकायत वापस ले ली गई है। इस मामले में विधायक कृष्ण मिधा ने द इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि उनके और किसानों के बीच जो ग़लतफ़हमी थी उसे दूर कर लिया गया है।

इस मामले के दिन बाद मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर हिसार के ओपी जिंदल स्कूल में बने चौधरी देवी लाल संजीवनी हॉस्पिटल का शुभारंभ करने पहुंचे थे। उस दौरान विरोध प्रदर्शन के लिए इकट्ठा हुए किसानों और पुलिस के बीच झड़प हो गयी थी। जिसके बाद किसानों को हिरासत में ले लिया गया था। प्रदर्शनकारियों की गिरफ़्तारी के बाद गुरनाम सिंह चढ़ूनी सहित कई और किसान नेताओं ने किसानों ने पुलिस महानिरीक्षक कार्यालय और आवास के बाहर विरोध प्रदर्शन किया था।

उसके साथ ही उन्होंने अगली सुबह राष्ट्रीय राजमार्गों को बंद करने की भी धमकी दी थी। जिसके बाद शाम तक उन सभी को रिहा कर दिया गया था। किसानों की रिहाई के बाद  गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने दावा किया था कि जिला प्रशासन ने उनसे माफी मांगी है। उनकी तरफ से  आश्वासन दिया है कि किसानों के खिलाफ दर्ज मामले वापस ले लिए जाएंगे। जब किसानों से यह सवाल पूछा गया कि क्या किसानों ने भाजपा को बैकफुट पर धकेल दिया है? इसपर जवाब देते हुए पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष ओम प्रकाश धनखड़ ने इसपर टिप्पणी करने  से इनकार करते हुए कहा कि राज्य सरकार चल रहे विरोध प्रदर्शन के बारे में बेहतर जवाब दे सकती है।

दुष्यंत चौटाला को रद्द करना पड़ा दौरा: हाल में ही दो बार जजपा नेता और डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला को अपने निर्वाचन क्षेत्र उचाना के अपने निर्धारित दौरे रद्द करना पड़ा था। दरअसल उनके कार्यक्रम के बारे में जानकारी होने के बाद किसान विरोध प्रदर्शन के लिए इकट्ठा होने लगे थे। इससे पहले हरियाणा के गृह मंत्री अनिल विज को भी विरोध का सामना करना पड़ा था। जिसके बाद उन्होंने कहा था कि  कानून व्यवस्था में व्यवधान और  हिंसा को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इसके लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

विपक्ष के नेता और कांग्रेस नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि भाजपा-जजपा सरकार किसानों के साथ जुड़ने में विफल रही है। उन्होंने इस मामले में कहा कि किसान हरियाणा में विरोध कर रहे हैं। केंद्र सरकार और किसानों के बीच बातचीत शुरू करने और मध्यस्थ के रूप में कार्य करने की मुख्य जिम्मेदारी मुख्यमंत्री की होती है। अभी तक मुख्यमंत्री ने खुद किसानों से बात नहीं की है। सरकार को तुरंत किसानों के साथ बातचीत शुरू करनी चाहिए।

वही संयुक्त किसान मोर्चा के नेता योगेंद्र यादव ने कहा कि हरियाणा सरकार ने किसानों के साथ अपना विश्वास खो दिया है। सरकार अपने बल का उपयोग करके किसान आंदोलन को कमजोर करना चाहती है। सरकार की ये नीति हम सफल नहीं होने देंगे। टोहाना ने एक बार फिर दिखाया कि इस तरह के प्रयास उलटा असर डालते हैं। बता दें कि किसानों ने अपने-अपने क्षेत्रों में सत्तारूढ़ गठबंधन के नेताओं के बहिष्कार की घोषणा की है।

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