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किसान आंदोलनः कनाडाई PM के दखल पर भारत ने समझाया, फिर भी बोले जस्टिन ट्रूडो- अधिकारों के लिए हमेशा खड़े रहेंगे हम

दरअसल, ट्रूडो ने भारत में आंदोलन कर रहे किसानों का समर्थन करते हुए कहा था कि शांतिपूर्ण विरोध के अधिकारों की रक्षा के लिए कनाडा हमेशा साथ रहेगा। इसके साथ ही उन्होंने स्थिति पर चिंता जतायी थी।

Author Edited By अभिषेक गुप्ता नई दिल्ली | Updated: December 5, 2020 9:42 AM
Farmer Protests, Canada, Canada PM, Justin Trudeau, Indian Farmersविदेश मंत्रालय ने कहा था, “कनाडाई उच्चायुक्त को आज विदेश मंत्रालय में तलब किया गया और सूचित किया गया कि भारतीय किसानों से संबंधित मुद्दों पर कनाडाई प्रधानमंत्री, कुछ कैबिनेट मंत्रियों और सांसदों की टिप्पणी हमारे आंतरिक मामलों में अस्वीकार्य हस्तक्षेप के समान है।’’

किसान आंदोलन को लेकर कनाडाई प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो के दलख पर भारत ने सख्त रुख अपनाते हुए शुक्रवार को नाराजगी जाहिर की थी। स्पष्ट कर दिया था कि वह आंतरिक मसले में दखल को स्वीकार नहीं करेगा। हालांकि, इसके बाद भी ट्रूडो अपने बयान पर कायम हैं और बोले हैं कि शांति पूर्ण प्रदर्शन के अधिकारों के लिए कनाडा हमेशा खड़ा रहेगा।

ओटावा में जब उनसे भारत के हालिया कदम (उच्चायुक्त को तलब करने पर) पूछा गया तो उन्होंने कहा- कनाडा दुनिया में कहीं भी शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकारों के लिए हमेशा खड़ा रहेगा। और, हम पीछे हटने और संवाद की ओर बढ़ते कदम से खुश हैं।

भारत ने कल कनाडा के उच्चायुक्त नादिर पटेल को तलब किया था। उनसे कहा था कि किसानों के आंदोलन के संबंध में ट्रूडो और वहां के कुछ अन्य नेताओं की टिप्पणी देश के आंतरिक मामलों में एक “अस्वीकार्य हस्तक्षेप” के समान है। विदेश मंत्रालय ने बताया था कि कनाडाई राजनयिक से यह भी कहा गया गया कि ऐसी गतिविधि अगर जारी रही तो इससे द्विपक्षीय संबंधों को ‘गंभीर क्षति’ पहुंचेगी।

विदेश मंत्रालय ने कहा था, “कनाडाई उच्चायुक्त को आज विदेश मंत्रालय में तलब किया गया और सूचित किया गया कि भारतीय किसानों से संबंधित मुद्दों पर कनाडाई प्रधानमंत्री, कुछ कैबिनेट मंत्रियों और सांसदों की टिप्पणी हमारे आंतरिक मामलों में अस्वीकार्य हस्तक्षेप के समान है।’’ साथ ही कनाडाई राजनयिक को आपत्ति पत्र (डिमार्श) भी सौंपा गया।

मंत्रालय के मुताबिक, किसानों के मुददे पर कनाडा के नेताओं द्वारा की गई टिप्पणी की वजह से कनाडा में हमारे मिशन के सामने भीड़ जमा हुयी जिससे सुरक्षा का मुद्दा खड़ा होता है। आगे बयान में कहा गया, “हम उम्मीद करते हैं कि कनाडाई सरकार भारतीय राजनयिकों की पूर्ण सुरक्षा सुनिश्चित करेगी।

इससे पहले मंगलवार को विदेश मंत्रालय ने कनाडाई नेताओं के बयानों पर कड़ी टिप्पणी की थी। मंत्रालय ने कहा था, ‘‘हमने कनाडाई नेताओं द्वारा भारत में किसानों से संबंधित कुछ ऐसी टिप्पणियों को देखा है जो भ्रामक सूचनाओं पर आधारित हैं। इस तरह की टिप्पणियां अनुचित हैं, खासकर जब वे एक लोकतांत्रिक देश के आंतरिक मामलों से संबंधित हों। बेहतर होगा कि कूटनीतिक बातचीत राजनीतिक उद्देश्यों के लिए गलत तरीके से प्रस्तुत नहीं की जाये।’’

दरअसल, ट्रूडो ने भारत में आंदोलन कर रहे किसानों का समर्थन करते हुए कहा था कि शांतिपूर्ण विरोध के अधिकारों की रक्षा के लिए कनाडा हमेशा साथ रहेगा। इसके साथ ही उन्होंने स्थिति पर चिंता जतायी थी।

बता दें कि तीन नए कृषि कानूनों के खिलाफ पंजाब, हरियाणा और कई अन्य राज्यों के हजारों किसान दिल्ली की सीमाओं पर पिछले नौ दिनों से प्रदर्शन कर रहे हैं। जानकारी के मुताबिक, इनमें सबसे अधिक दिक्कत पंजाब के बताए जा रहे हैं, जबकि कनाडा में भारतीयों की खासी संख्या है और उनमें से अधिकतर पंजाब से हैं। (भाषा इनपुट्स के साथ)

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