पंजाब की तर्ज पर किसानों के घावों पर मरहम लगाए केंद्र, चढ़ूनी बोले- मृत किसानों के परिजनों को 5 लाख मुआवजे के साथ मिले नौकरी

किसान नेताओं का कहना है कि मुआवजे को लेकर केंद्र सरकार को पंजाब सरकार की तरह फैसला लेना चाहिए। किसान आंदोलन के भविष्य पर बुधवार को फैसला लिया जा सकता है।

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मृत किसानों के परिवारों को मिले पंजाब मॉडल के तहत मुआवजा- गुरनाम सिंह चढ़ूनी (फोटो- ANI)

किसान आंदोलन पर फैसला अब जल्द हो सकता है। बुधवार को होने वाली किसान संगठनों की मीटिंग में इस पर फैसला आ सकता है। उससे पहले मंगलवार को एक बार फिर से किसान नेताओं ने आंदोलन के दौरान मारे गए किसानों के परिवारों के लिए मुआवजों की मांग की है। इसके लिए सरकार को पंजाब मॉडल अपनाने की सलाह भी दी गई है।

किसान नेता गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने मंगलवार को कहा है कि मुआवजे को लेकर केंद्र सरकार को पंजाब सरकार की तरह फैसला लेना चाहिए। चढ़ूनी ने मीडिया से बात करते हुए कहा- “700 से अधिक मृतक किसानों के परिजनों को मुआवजे के लिए, हम चाहते हैं कि केंद्र पंजाब मॉडल का पालन करे। पांच लाख रुपये का मुआवजा और पंजाब सरकार द्वारा घोषित नौकरी को भारत सरकार द्वारा भी लागू किया जाना चाहिए”।

वहीं संयुक्त किसान मोर्चा की तरफ से कहा गया है कि सरकार का प्रस्ताव कहता है कि जब हम आंदोलन समाप्त करेंगे, तभी वे किसानों के खिलाफ मामले वापस लेंगे… हम इसके बारे में आशंकित हैं…सरकार को तुरंत मामलों की वापसी प्रक्रिया शुरू करनी चाहिए। कल की बैठक में दोपहर दो बजे अंतिम फैसला होगा”।

वहीं मंगलवार को सरकार की तरफ से किसानों के बाकी मुद्दों पर प्रस्ताव भेजा गया। इसमें एमएसपी, किसानों पर दर्ज केस वापसी और बिजली विधेयक के बारे में सरकार की ओर से प्रस्ताव दिया गया था। इस प्रस्ताव को लेकर किसान नेताओं की तरफ से अब जवाब आ गया है। अभी किसानों की कुछ आपत्तियां थी, जिसके बारे में सरकार को अवगत करवा दिया गया है।

मिली जानकारी के अनुसार किसानों के खिलाफ दर्ज मामलों को लेकर हरियाणा के किसान संगठन सरकार से असंतुष्ट बताए जा रहे हैं। इसे लेकर सरकार को जवाब भेजा गया है, इस पर बुधवार दोपहर तक सरकार जवाब दे सकती है। इसके बाद आगे का फैसला लिया जाएगा।

बता दें कि पंजाब की कांग्रेस सरकार ने 403 मृतक किसानों के परिजनों को पांच-पांच लाख रुपये का मुआवजा दिया है। इसके साथ ही 152 मृतक किसानों के परिवारों के सदस्यों को नौकरी दी है। इसी तरह की राहत की मांग किसान संगठन केंद्र सरकार से भी कर रहे हैं।

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