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कृषि कानूनः चार माह से केंद्र-किसानों में नहीं हुई बात! कोरोना के बीच आंदोलन स्थलों पर बोले टिकैत- ये गांव-कॉलोनी हमारे, ऐसे न हटेंगे

किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा है कि गांव और शहरों की तुलना में किसान आंदोलन में जनसंख्या का घनत्व कम है। इसलिए यहां पर कोरोना संक्रमण होने का ज्यादा खतरा नहीं है।

किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा कि आंदोलन के छह महीने पूरे होने पर हम 26 मई को काला दिवस मनाएंगे और सरकार का पुतला फूंकेंगे। (फोटो – पीटीआई)

कोरोना महामारी के बावजूद किसानों का आंदोलन जारी है। किसान अभी भी दिल्ली की सीमाओं पर डटे हुए हैं। किसान संगठनों और केंद्र सरकार के बीच बीते चार महीने से कोई बातचीत नहीं हुई है। कोरोना के बेकाबू होते संक्रमण के बीच दिल्ली की सीमाओं पर जारी आंदोलन को लेकर किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा है कि ये हमारे गांव और कॉलोनी बन गए हैं और ये ऐसे नहीं हटेंगे।

किसान नेता राकेश टिकैत ने टीवी चैनल न्यूज 24 को दिए साक्षात्कार में कहा है कि गांव और शहरों की तुलना में किसान आंदोलन में जनसंख्या का घनत्व कम है। इसलिए यहां पर कोरोना संक्रमण होने का ज्यादा खतरा नहीं है। इसलिए सरकार कोरोना का बहाना देकर हमें नहीं हटा सकती है। यहां हम 6 महीने से रह रहे हैं। यहां अब गांव और पक्की कॉलोनियां बन चुकी है। अब ये सिर्फ बातचीत से ही हट सकती है. अगर कोरोना काल में बिल और कानून आ सकता है तो अबकी बार भी लाया जा सकता है। 

इसके अलावा जब किसान नेता राकेश टिकैत से यह पूछा गया कि क्या आपको नहीं लगता है कि आप लोग जान हथेली पर लेकर आंदोलन कर रहे हैं। इसपर किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा कि मौत तो होगी..आंदोलन लड़ लेंगे तो सिर्फ कोरोना से जंग रहेगी… अगर यहां से चले गए तो गांव में सरकार भी मारेगी और कोरोना भी मारेगा। यहां तो सिर्फ एक ही तरह से मरेंगे। जबतक सरकार बातचीत नहीं करेगी। तबतक यह आंदोलन ख़त्म नहीं होगा।

साथ ही राकेश टिकैत ने कहा कि किसान आंदोलन के छह महीने पूरे होने पर हम 26 मई को काला दिवस मनाएंगे और सरकार का पुतला फूंकेंगे। अब किसान ऐसे ही घर नहीं जाएगा। जबतक सरकार बातचीत नहीं करेगी और सभी मसलों का हल नहीं करेगी तब तक किसान वापस अपने घर नहीं जाएंगे। राकेश टिकैत ने यह भी कहा कि दिल्ली के टिकरी बॉर्डर पर 22 किमी लंबा मोर्चा लगा हुआ है और करीब 1 लाख से ज्यादा किसान बैठे हुए हैं। 

इसके अलावा राकेश टिकैत ने विधानसभा चुनाव में भाजपा की हार को लेकर कहा कि पश्चिम बंगाल में भी बीजेपी हारी है और उत्तरप्रदेश के निकाय चुनाव में करीब 3000 सीटों में सिर्फ 600 के आसपास ही बीजेपी सीट जीत पाई है। इसलिए अगर हमारी बात नहीं सुनी गई तो हम उत्तरप्रदेश के विधानसभा चुनाव में भी जाएंगे और हराएंगे। बता दें कि देशभर से आए किसान पिछले पांच महीने से अधिक समय से दिल्ली की सीमाओं पर डटे हुए हैं। किसान केंद्र सरकार द्वारा पारित तीनों कृषि कानूनों को रद्द करने की मांग कर रहे हैं। इसके अलावा किसान न्यूनतम समर्थन मूल्य के क़ानूनी गारंटी की भी मांग कर रहे हैं।

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