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गाजीपुर बॉर्डर पर आंदोलन तेज! ‘ये मोदी बर्बाद कर देगा’, बोले किसान- नहीं जाएंगे, यहीं डटना है, यहीं मरना है…

कई किसानों ने तो यहाँ तक कहना शुरू कर दिया है कि जबतक कानून वापस नहीं होंगे हम अपने घर को नहीं जायेंगे। इतना ही नहीं कई किसानों ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि ये मोदी हमें बर्बाद कर देगा इसलिए हम कहीं नहीं जायेंगे, हम यहीं डटे रहेंगे और यहीं मरेंगे।

नई दिल्ली में शनिवार को गाजीपुर बॉर्डर पर बापू की पुण्यतिथि पर अनशन करते हुए किसान। (फोटोः पीटीआई)

दिल्ली के सटे अलग अलग सीमाओं पर देशभर के किसान कृषि कानून के खिलाफ आंदोलन कर रहे हैं। राकेश टिकैत के रोने के बाद से गाजीपुर बॉर्डर पर किसानों की संख्या में काफी इजाफा हो रहा है. पंजाब , हरियाणा , राजस्थान और पश्चिमी यूपी के किसान वापस से गाजीपुर बॉर्डर पर जुटने लगे हैं। कई किसानों ने तो यहाँ तक कहना शुरू कर दिया है कि जबतक कानून वापस नहीं होंगे हम अपने घर को नहीं जायेंगे। इतना ही नहीं कई किसानों ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि ये मोदी हमें बर्बाद कर देगा इसलिए हम कहीं नहीं जायेंगे, हम यहीं डटे रहेंगे और यहीं मरेंगे।

इसी बीच संयुक्त किसान मोर्चा ने आज प्रेस रिलीज जारी करते हुए कहा कि सर्वदलीय बैठक में प्रधानमंत्री द्वारा प्रदर्शनकारी किसानों के बारे में केंद्र सरकार द्वारा दिए गए अपने प्रस्ताव के बारे में बयान पर संज्ञान लिया। किसान अपनी चुनी हुई सरकार को मनाने के लिए दिल्ली की चौखट पर आए हैं और इसलिए सरकार से बातचीत पर किसान संगठनों का दरवाजा बंद करने का कोई सवाल ही नहीं है। साथ ही संयुक्त किसान मोर्चा ने यह भी कहा कि किसान तीनों कृषि कानूनों को पूर्ण रूप से निरस्त करना चाहते हैं और सभी किसानों के लिए सभी फसलों पर MSP की कानूनी गारंटी चाहते है।

इसके अलावा संयुक्त किसान मोर्चा ने यह भी बताया कि आज शनिवार को सद्भावना दिवस मनाते हुए एक दिन का उपवास दिल्ली की सभी सीमाओं और पूरे भारत में रखा गया। किसानों ने महात्मा गांधी जी के शहीदी दिवस पर उनको श्रद्धांजलि दी।साथ ही किसानों ने गांधीजी के जीवन से सीख लेते हुए इस आंदोलन को शांतिपूर्ण ढंग से लड़ते रहने का संकल्प लिया।इस दौरान किसानों ने इस आंदोलन के शहीद किसानों को भी दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि दी।

साथ ही संयुक्त किसान मोर्चा ने सुरक्षा बलों के द्वारा गैरकानूनी तरीके से आंदोलन को खत्म करने के प्रयासों की भी निंदा की। संयुक्त किसान मोर्चा ने आगे कहा कि पुलिस और भाजपा के गुंडों द्वारा लगातार हो रही हिंसा, सरकार की बौखलाहट को साफ रूप से दिखाती है। पुलिस अमानवीय ढंग से प्रदर्शनकारियों और पत्रकारों को धरना स्थलों से गिरफ्तार कर रही है। हम सभी शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों की तत्काल रिहाई की मांग करते हैं। हम उन पत्रकारों पर पुलिस के हमलों की भी निंदा करते हैं जो लगातार किसानों के विरोध को कवर कर रहे हैं।

इसी बीच दिल्ली पुलिस को गणतंत्र दिवस पर किसानों की ट्रैक्टर परेड के दौरान हुई हिंसा से संबंधित अब तक 1,700 वीडियो क्लिप और सीसीटीवी फुटेज जनता से प्राप्त हुई हैं तथा इस सामग्री का विश्लेषण करने और दोषियों की पहचान करने के लिए फॉरेंसिक विशेषज्ञों की मदद ली जा रही है। संयुक्त पुलिस आयुक्त (अपराध) बी. के. सिंह ने शनिवार को यह जानकारी दी।

उन्होंने कहा कि लालकिले और आईटीओ पर हुई हिंसा से जुड़े नौ मामलों की जांच कर रही अपराधा शाखा मोबाइल फोन कॉल के ‘डंप डेटा’ और ट्रैक्टरों की पंजीकरण संख्या की भी जांच कर रही है। सिंह ने कहा कि नेशनल फॉरेंसिक साइंसेज यूनिवर्सिटी की एक टीम को हिंसा से संबंधित वीडियो क्लिप और सीसीटीवी फुटेज का विश्लेषण करने के लिए बुलाया गया है। हिंसा में 394 पुलिसकर्मी घायल हो गए थे। उस दिन एक प्रदर्शनकारी की मौत भी हो गई थी।

किसान संगठनों की ट्रैक्टर परेड में हुई हिंसा के कुछ दिनों बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शनिवार को विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं से कहा कि कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे किसानों को उनकी सरकार की ओर से दिया गया प्रस्ताव ‘‘अब भी बरकरार’’ है तथा बातचीत में सिर्फ एक फोन कॉल की दूरी है। संसद सत्र से पहले पारंपरिक सर्वदलीय बैठक में मोदी ने गणतंत्र दिवस के दिन हुई ‘दुर्भाग्यपूर्ण घटना’ का विपक्षी नेताओं की ओर से किए गए उल्लेख का जवाब देते हुए कहा कि ‘‘कानून अपना काम करेगा।’’

यह डिजिटल बैठक प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में हुई और इसमें रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह तथा विभिन्न दलों के सदनों के नेता शामिल हुए। इस बैठक के ब्योरे की जानकारी देते हुए संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री ने विश्वास दिलाया कि केंद्र सरकार किसानों के मुद्दे पर खुले मन से आगे बढ़ रही है।’’ जोशी ने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री ने बैठक में कहा कि केंद्र का रुख वही है जो 22 जनवरी को किसान नेताओं और केंद्र के बीच हुई आखिरी बैठक में था तथा कृषि मंत्री (नरेंद्र तोमर) की ओर से दिया गया प्रस्ताव आज भी बरकरार है। मोदी जी ने वही बात कही जो तोमर जी ने कहा था कि बातचीत में सिर्फ एक फोन कॉल की दूरी है।’’

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