राकेश टिकैत बोले, कोरोना का रास्ता अस्पताल और किसान का रास्ता संसद जाता है, किसान यहीं डटा रहेगा

किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा कि जब तक सरकार MSP पर क़ानून नहीं बनाती और किसानों के सभी मसलों पर बातचीत नहीं करेगी तब तक किसान यहां से नहीं जाएगा।

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किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा कि कोरोना का रास्ता अस्पताल जाता है और किसान का रास्ता पार्लियामेंट जाता है, दोनों के रास्ते अलग है। (एक्सप्रेस फोटो: भूपेंद्र राणा)

किसान आंदोलन को छह महीने पूरे होने को हैं। भीषण गर्मी और भयंकर कोरोना महामारी के बावजूद किसान दिल्ली से सटे सभी सीमाओं पर धरना दे रहे हैं। इसी बीच भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने कहा है कि कोरोना का रास्ता अस्पताल और किसान का रास्ता संसद तक जाता है कि इसलिए किसान धरना स्थल खाली नहीं करेगा और यहीं डटा रहेगा।

हरियाणा के रेवाड़ी में मीडिया से बातचीत करते हुए किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा कि जब तक सरकार MSP पर क़ानून नहीं बनाती और किसानों के सभी मसलों पर बातचीत नहीं करेगी तब तक किसान यहां से नहीं जाएगा, वह यहां पर डटा रहेगा। कोरोना का रास्ता अस्पताल जाता है और किसान का रास्ता पार्लियामेंट जाता है, दोनों के रास्ते अलग है। 

इसके अलावा किसान नेता राकेश टिकैत ने अपने ट्विटर हैंडल से किए गए ट्वीट में कृषि कानूनों के खिलाफ जमकर हमला बोला। राकेश टिकैत ने ट्वीट करते हुए लिखा कि केवल व्यापारिक पक्ष के लिए बनाए कानून समाज को गुलाम बना देंगे, यह कृषि कानून केवल और केवल कृषि व्यापार के पक्ष में हैं,ये बड़े बड़े उद्योगपति तो 500% गुना तक मुनाफा कमाएंगे और किसान को कुछ नहीं.!

बुधवार को संयुक्त किसान मोर्चा ने भी सरकार को कहा कि हमारी धैर्य की परीक्षा ना लें और हमारी मांगों को मान लें। संयुक्त किसान मोर्चा ने अपने बयान में कहा कि किसान आंदोलन में 470 से अधिक किसानों की मौत हो चुकी है। सरकार अगर अपने किसानों की चिंता करती है तो उनकी मांगें माननी चाहिए। साथ ही मोर्चा ने सरकार को चेतावनी दी कि किसानों के धैर्य की परीक्षा न लें।

बता दें कि देशभर से आए किसान पिछले पांच महीने से अधिक समय से दिल्ली की सीमाओं पर डटे हुए हैं। किसान केंद्र सरकार द्वारा पारित तीनों कृषि कानूनों को रद्द करने की मांग कर रहे हैं। इसके अलावा किसान न्यूनतम समर्थन मूल्य के क़ानूनी गारंटी की भी मांग कर रहे हैं। हालांकि जनवरी महीने के बाद से किसान संगठनों और केंद्र सरकार के बीच कोई बातचीत नहीं हुई है और अभी तक गतिरोध जारी है।

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