राकेश टिकैत का बड़ा बयान, बोले- यूपी में जनता वोट नहीं देगी लेकिन जीत भाजपा की ही होगी

किसान आंदोलन को 11 महीने से भी अधिक का समय हो चुका है। इतने दिन बीत जाने के बावजूद अभी तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया है। जनवरी महीने के बाद से ही किसान संगठनों और केंद्र सरकार के बीच कोई बातचीत नहीं हुई है।

किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा कि भाजपा जहां भी जाती है वहां जोड़ने नहीं तोड़ने का काम करती है। (एक्सप्रेस फोटो)

अगले साल की शुरुआत में ही उत्तरप्रदेश में विधानसभा चुनाव होने को हैं। आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर किसान नेता राकेश टिकैत ने बड़ा बयान देते हुए कहा है कि इन चुनावों में उत्तरप्रदेश की जनता बीजेपी को वोट नहीं देगी लेकिन इसके बावजूद जीत भाजपा की ही होगी। 

पिछले 11 महीने से भी अधिक समय से दिल्ली की सीमाओं पर चल रहे किसान आंदोलन का मुख्य चेहरा बन चुके किसान नेता राकेश टिकैत ने अंदेशा जताया है कि आगामी विधानसभा चुनावों में बीजेपी सरकारी मशीनरी का गलत इस्तेमाल कर फिर सत्ता में काबिज हो सकती है। इसके अलावा भाजपा दूसरे दलों के प्रत्याशियों को नामांकन करने भी नहीं दे सकती है और नामांकन खारिज भी करा सकती है। यूपी विधानसभा चुनाव में जनता बीजेपी को वोट नहीं देगी लेकिन फिर भी जीत उनकी ही होगी।

इसके अलावा राकेश टिकैत ने कहा कि भाजपा जहां भी जाती है तोड़ने का काम करती है। बीजेपी ने बिहार में लालू प्रसाद यादव, उत्तरप्रदेश में मुलायम सिंह यादव और हरियाणा में ओम प्रकाश चौटाला का परिवार तोड़ा। साथ ही टिकैत ने कहा कि किसान अपनी मांग पूरी होने तक यहां से नहीं हटेंगे। 

किसान नेता राकेश टिकैत ने आंदोलनरत किसानों से बातचीत नहीं करने को लेकर भी केंद्र की मोदी सरकार पर हमला बोला। टिकैत ने कहा कि सरकार ने किसानों से बातचीत की पहल नहीं की। याद रखा जाएगा कि एक ऐसी सरकार थी, जिसने एक साल लंबे चले आंदोलन के बाद भी किसानों से बातचीत नहीं की। 26 नवंबर को आंदोलन का एक साल पूरा हो जाएगा लेकिन सरकार की ओर से 22 जनवरी के बाद बातचीत का कोई न्योता नहीं मिला। अगर दिल्ली बॉर्डर खुला तो किसानों के ट्रैक्टर दिल्ली की तरफ रवाना होंगे। हम सही दाम पर संसद में ही फसलों को बेचने की कोशिश करेंगे, क्योंकि मंडियां तो बंद हो गई हैं।  

गौरतलब है कि किसान आंदोलन को 11 महीने से भी अधिक का समय हो चुका है। इतने दिन बीत जाने के बावजूद अभी तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया है। जनवरी महीने के बाद से ही किसान संगठनों और केंद्र सरकार के बीच कोई बातचीत नहीं हुई है। केंद्र सरकार ने आखिरी मीटिंग में तीनों कानूनों को डेढ़ साल तक निलंबित करने का प्रस्ताव भी दिया था लेकिन किसान संगठनों ने इसे नामंजूर कर दिया था। प्रदर्शनकारी किसान तीनों कानूनों की वापसी को लेकर अड़े हुए हैं।

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