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राकेश टिकैत बोले-वो दिन दूर नहीं कि जनता तोड़ देगी गोदाम, आंदोलन कमजोर हुआ तो किसान को मार देंगे

किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा कि पहले व्यापारियों के गोदाम बने फिर उसके बाद कानून लाए गए। इसका मतलब है कि ये तीनों कृषि कानून व्यापारियों की सांठ गांठ से बने हैं।

Rakesh Tikait, farmer protest , farm lawsकिसान नेता राकेश टिकैत (फोटो- पीटीआई)

किसान आंदोलन के प्रमुख चेहरों में शामिल राकेश टिकैत अब दिल्ली की सीमाओं के अलावा देशभर में किसान महापंचायत कर रहे हैं। इन महापंचायतों में भारी भीड़ जुट रही है. इसी बीच किसान नेता राकेश टिकैत ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा है कि वो दिन दूर नहीं है जब जनता गोदाम को तोड़ देगी। साथ ही उन्होंने कहा है कि अगर यह आंदोलन कमजोर हुआ तो किसान मारे जायेंगे। पिछले 90 दिन से अधिक समय से देशभर के किसान दिल्ली से सटे सीमाओं पर बैठकर सरकार द्वारा पारित किए गए तीनों कृषि कानून को रद्द करने की मांग कर रहे हैं।

बागपत में आयोजित प्रेस कांफ्रेस में किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा कि पहले व्यापारियों के गोदाम बने फिर उसके बाद कानून लाए गए। इसका मतलब है कि ये तीनों कृषि कानून व्यापारियों की सांठ गांठ से बने हैं। वो दिन दूर नहीं है जब जनता इन गोदामों को तोड़ेगी। इसलिए सरकार इन गोदामों का अधिग्रहण कर ले। आगे उन्होंने कहा कि चौधरी चरण सिंह मंडी एक्ट लेकर आये थे जिसको सर छोटूराम राम ने पंजाब में लागू करवाया। जिसकी वजह से आज पंजाब के किसानों की फसल एमएसपी पर खरीदी जाती है।

इसके अलावा उन्होंने कहा कि अगर ये आंदोलन ना होता तो सरकार गन्ने की कीमत बढ़ाने के बजाय घटा देती। जिस दिन ये आंदोलन कमजोर हुआ तो उस दिन किसान मारे जाएंगे। आगे प्रेस कांफ्रेंस में किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा कि 2021 आंदोलन का साल है और ट्रैक्टर किसानों का प्रतीक बन गया है। साथ ही जब उनसे पूछा गया कि आप किसान आंदोलन का चेहरा बन गए हैं तो उन्होंने कहा कि सिर्फ मैं ही बल्कि 40 लोगों को देश के किसानों ने चुना है। मैं तो एक छोटा सा किसान हूँ जिसके गन्ने का अभी तक भुगतान नहीं हुआ है। 

पिछले दिनों राकेश टिकैत ने एक सभा में कहा था कि तिरंगा भी फहरेगा और पार्लियामेंट पर फहरेगा। ये कान खोलकर सुन लो, ये ट्रैक्टर जाएंगे वहीं जाएंगे और हल के साथ जाएंगे। उन पार्कों में जाएंगे जहाँ पार्लियामेंट के बाहर साल 1988 में आंदोलन हुआ था। आगे उन्होंने कहा था कि वहां के पार्कों में ट्रैक्टर चलेगा और वहां पर खेती होगी। इसलिए सरकार बिल वापस ले लें और एमएसपी पर क़ानून बनाएं नहीं तो दिल्ली की पक्की घेराबंदी होगी।

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