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लालकिला तो कुछ भी नहीं, अब संसद जाएंगे ट्रैक्टर, बोले राकेश टिकैत

किसान नेता राकेश टिकैत ने यह भी कहा कि 26 जून को देश के सभी राज्यों के राज्यपाल भवन पर किसान धरना प्रदर्शन करेंगे। किसान राज्यपाल को अपना ज्ञापन भी सौंपेंगे।

राकेश टिकैत ने कहा सरकार ने अपने मंत्रियों को फैसले लेने की ताकत नहीं दी है। (एक्सप्रेस फोटो)

देशभर से आए किसान पिछले छह महीने से भी अधिक समय से केंद्र सरकार द्वारा पारित किए गए तीनों कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली की सीमाओं पर धरना दे रहे हैं। किसान इन कानूनों को रद्द करने की मांग कर रहे हैं। इसी बीच किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा है कि लालकिला तो कुछ भी नहीं, अबकी बार ट्रैक्टर सीधे संसद तक जाएंगे।

समाचार चैनल एनडीटीवी से बातचीत के दौरान जब किसान नेता राकेश टिकैत से यह पूछा गया कि अगली बड़ी रणनीति क्या होगी। तो उन्होंने कहा कि कहा कि अबकी बार लालकिला तो कुछ भी नहीं, अब सीधे संसद तक ट्रैक्टर से जाएंगे। सरकार यह याद रख ले कि वे चार लाख ट्रैक्टर और 25 लाख आदमी भी यहीं हैं और 26 तारीख भी हर महीने आती है।  

बातचीत के दौरान किसान नेता राकेश टिकैत ने यह भी कहा कि 26 जून को देश के सभी राज्यों के राज्यपाल भवन पर किसान धरना प्रदर्शन करेंगे। किसान राज्यपाल को अपना ज्ञापन भी सौंपेंगे। हालांकि किसान नेता राकेश टिकैत ने यह साफ़ कर दिया कि इस दौरान कोई भी मार्च नहीं निकाला जाएगा और दूसरे राज्यों के किसान दिल्ली की सीमा को पार नहीं करेंगे। दिल्ली के किसान ही वहां के उप राज्यपाल को अपना ज्ञापन देंगे।

राकेश टिकैत ने यह भी ऐलान किया कि वह आने वाले उत्तरप्रदेश के विधानसभा चुनाव में भाजपा के खिलाफ प्रचार करेंगे और लोगों से वोट ना देने की अपील करेंगे। राकेश टिकैत ने कहा कि उत्तरप्रदेश के लोगों को यह बताया जाएगा कि यहां बिजली के रेट सबसे ज्यादा हैं और यहां के किसानों को ना तो गन्ने का उचित भाव मिल रहा है और ना ही गेहूं की खरीद बढ़ी है। इसलिए वे बीजेपी को वोट ना दें। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि वह कोई भी चुनाव नहीं लड़ेंगे।

बता दें कि किसान संगठनों और केंद्र सरकार के बीच 22 जनवरी के बाद कोई बातचीत नहीं हुई है। केंद्र सरकार ने तीनों कृषि कानूनों को डेढ़ साल तक निलंबित करने का प्रस्ताव दिया था लेकिन किसान संगठनों ने इसे ठुकरा दिया था। किसान संगठनों ने साफ़ कर दिया था कि तीनों कृषि कानूनों को रद्द करने के अलावा कोई और प्रस्ताव मंजूर नहीं होगा। हालांकि केंद्र सरकार ने भी यह कह दिया है कि वे किसान संगठनों के साथ किसी भी प्रावधानों पर बातचीत करने को तैयार हैं लेकिन कृषि कानूनों को वापस लेने पर कोई बात नहीं होगी।

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