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ऐंकर ने याद दिलाई पुरानी बात, चुनाव लड़ने के सवाल पर बोले राकेश टिकैत, बहुत बड़ी बीमारी है

खुद के चुनाव लड़ने के सवाल पर राकेश टिकैत ने कहा कि मैं चुनाव नहीं लडूंगा। चुनाव लड़ना एक बड़ी बीमारी है।

rakesh tikait , farmer protest, electionकिसान नेता राकेश टिकैत (फोटो – पीटीआई)

26 जनवरी को किसान आंदोलन के दौरान दिल्ली में हिंसा भड़क गयी थी। जिसके बाद उत्तरप्रदेश सरकार ने गाजीपुर बॉर्डर पर चल रहे धरने को ख़त्म कराने के आदेश दे दिए थे। प्रशासन के इस आदेश से किसान नेता राकेश टिकैत भावुक हो गए थे और उन्होंने रोते हुए कहा था कि वे आत्महत्या कर लेंगे लेकिन धरनास्थल छोड़ कर नहीं जायेंगे। तब से राकेश टिकैत किसान आंदोलन के केंद्र में हैं। राकेश टिकैत से जब चुनाव लड़ने को लेकर सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा कि यह बहुत बड़ी बीमारी है।   

न्यूज 24 पर आयोजित एक कार्यक्रम में जब एंकर संदीप चौधरी ने राकेश टिकैत से पूछा कि क्या आप आने वाले उत्तर प्रदेश के पंचायत चुनाव में किसी पार्टी को समर्थन देंगे या अपना उम्मीदवार खड़ा करेंगे। इसके जवाब में राकेश टिकैत ने कहा कि हम कुछ नहीं करते हैं बल्कि जनता अपने आप करती है। हमको तो किसानों को गन्ने के भाव बताने हैं, उनके फसलों के दाम उन्हें बताने हैं। आगे टिकैत ने कहा कि जनता अपने लोकल उम्मीदवारों को खुद ही देखकर वोट देती है।

इसके अलावा राकेश टिकैत से जब यह पूछा गया कि क्या आपके संगठन के भी लोग चुनाव लड़ेंगे तो जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि यहाँ तो स्थानीय निकाय चुनावों में कोई पार्टी नहीं होती है बल्कि यह चुनाव तो व्यक्तिगत लड़ा जाता है। आगे खुद के चुनाव लड़ने के सवाल पर राकेश टिकैत ने कहा कि मैं चुनाव नहीं लडूंगा। चुनाव लड़ना एक बड़ी बीमारी है। चुनाव से तो ही दूर रहना चाहिए. चुनाव तो जनता लड़ेगी। हम चुनाव नहीं लड़ते हैं। 

  

आपको बता दूँ कि पिछले दिनों जब राकेश टिकैत से उनकी विचारधारा को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि सबकी अपनी विचारधारा होती है। आगे उन्होंने कहा था कि हर आदमी पोलिटिकल होता है। अगर कोई पोलिटिकल नहीं है तो देश में उससे खतरनाक आदमी कोई नहीं है. बता दूँ कि राकेश टिकैत दो बार चुनाव लड़ चुके हैं। एक बार वह निर्दलीय उम्मीदवार थे और दूसरी बार उन्होंने लोकदल के टिकट पर चुनाव लड़ा था। 

किसान नेता राकेश टिकैत 13 मार्च को बंगाल में होने वाले किसान महापंचायत में भी शामिल होंगे। इस दौरान किसान नेता लोगों को भाजपा की किसान विरोधी नीतियों के बारे में बतायेंगे और लोगों को भाजपा के खिलाफ वोट नहीं देने की अपील करेंगे।

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