कृषि मंत्री रटी-रटाई एक ही भाषा का करते हैं इस्तेमाल, 3 साल तक ऐसे ही बोलते रहे तो दूसरों से बात करेंगे- बोले टिकैत

किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा कि कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने बातचीत के लिए शर्त रख दी है। अगर वे शर्तों के साथ बात करना चाहते हैं तो हम कैसे उनके साथ बातचीत करेंगे।

राकेश टिकैत ने कहा कि जब कृषि मंत्री कह देंगे कि हम बिना किसी शर्त के बात करने को तैयार हैं तो किसान उनसे बातचीत करेगा। (फोटो – पीटीआई)

बीते 7 महीने से भी अधिक समय से दिल्ली की सीमाओं पर किसानों का आंदोलन जारी है। किसान केंद्र सरकार द्वारा पारित किए गए तीनों कानूनों को वापस लेने की मांग कर रहे हैं। प्रदर्शनकारी किसान संसद भवन से कुछ ही दूरी पर मौजूद जंतर मंतर पर अपनी संसद भी चला रहे हैं। इसी बीच किसान आंदोलन का प्रमुख चेहरा बन चुके किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा है कि कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर एक ही रटी रटाई भाषा का इस्तेमाल करते हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि अगर वे 3 साल तक ऐसे ही बोलते रहेंगे तो हम दूसरों से बात करेंगे।

गाजीपुर बॉर्डर पर संवाददाताओं से बातचीत करते हुए किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा कि कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने बातचीत के लिए शर्त रख दी है। अगर वे शर्तों के साथ बात करना चाहते हैं तो हम कैसे उनके साथ बातचीत के लिए जाएंगे। साथ ही उन्होंने कहा कि कृषि मंत्री एक ही भाषा का इस्तेमाल करते हैं, एक ही शब्द का इस्तेमाल करते हैं। वे तमिल भाषा में ही भाषण देना जानते हैं अगर उनको संस्कृत में भाषण देने को कहा जाए तो वो नहीं दे पाएंगे क्योंकि वे एक ही रटी रटाई भाषा का इस्तेमाल करते हैं। 

आगे राकेश टिकैत ने कहा कि जब वो कह देंगे कि हम बिना किसी शर्त के बात करने को तैयार हैं तो किसान उनसे बातचीत करेगा। अभी 3 साल तक उनकी सत्ता है, अगर 3 साल तक इसी भाषा का इस्तेमाल करेंगे तो जो दूसरे लोग आएंगे, हम उनसे बात करेंगे। इसके अलावा जंतर मंतर पर चल रहे किसान संसद को लेकर राकेश टिकैत ने कहा कि हमें नहीं पता कि इससे हल निकलेगा या नहीं लेकिन हम अपनी बात अपने तरीके से कह रहे हैं। 

गौरतलब है कि प्रदर्शनकारी किसान संसद में चल रहे मानसून सत्र की तरह ही जंतर मंतर पर अपनी संसद चला रहे हैं। किसान संसद में हर दिन करीब 200 किसान भाग लेते हैं। 26 जुलाई और 9 अगस्त को किसानों ने महिला संसद चलाने का निर्णय लिया है। इस दिन महिलाएं ही किसान संसद का संचालन करेगी। इसको लेकर किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा कि महिला संसद के दिन संचालन से लेकर सारी जिम्मेदारियों को महिलाएं ही निभाएंगी। महिलाएं ही अपनी बात भी रखेंगी और उसको सुनेंगी भी।   

बता दें कि किसान आंदोलन को 7 महीने से भी अधिक का समय हो चुका है। इतने दिन बीत जाने के बावजूद अभी तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया है। जनवरी महीने के बाद से ही किसान संगठनों और केंद्र सरकार के बीच कोई बातचीत नहीं हुई है। केंद्र सरकार ने आखिरी मीटिंग में तीनों कानूनों को डेढ़ साल तक निलंबित करने का प्रस्ताव भी दिया था लेकिन किसान संगठनों ने इसे नामंजूर कर दिया था। प्रदर्शनकारी किसान तीनों कानूनों की वापसी को लेकर अड़े हुए हैं। 

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