पांच साल तक चल सकता है किसान आंदोलन, दिवाली के मौके पर बोले राकेश टिकैत

राकेश टिकैत ने हाल ही में संयुक्त किसान मोर्चा से सस्पेंड किए गए योगेंद्र यादव को लेकर कहा कि उन्हें कोई बुक लिखनी है। इसलिए वह छुट्टी पर गए हैं। कोई उसे सस्पेंड कहता है तो कोई उसे छुट्टी कहता है। अभी वो आराम कर रहे हैं।

आगामी 26 नवंबर को किसान आंदोलन के एक साल पूरे हो जाएंगे। (एक्सप्रेस फोटो)

पिछले 11 महीने से भी अधिक समय से दिल्ली की सीमाओं पर किसानों का आंदोलन चल रहा है। प्रदर्शनकारी किसान केंद्र सरकार द्वारा पारित किए गए तीनों कृषि कानून को वापस लेने और न्यूनतम समर्थन मूल्य पर क़ानूनी गारंटी की मांग कर रहे हैं। किसान आंदोलन का मुख्य चेहरा बन चुके किसान नेता राकेश टिकैत ने गाजीपुर बॉर्डर पर ही गुरुवार को दिवाली मनाई। इस दौरान उन्होंने किसान आंदोलन के दौरान शहीद हुए किसानों को भी याद किया और कहा कि यह आंदोलन पांच साल तक भी चल सकता है।

समाचार चैनल एनडीटीवी से बात करने के दौरान किसान नेता राकेश टिकैत से जब यह पूछा गया कि आंदोलन कबतक जारी रहेगा तो उन्होंने कहा कि सरकार पांच साल ही रहती है। जब सरकार पांच साल चल सकती है तो आंदोलन भी पांच साल चल जाएगा। साथ ही टिकैत ने कहा कि हमने सरकार को 26 नवंबर तक का अल्टीमेटम दिया है। ट्रैक्टर 2 घंटे के अल्टीमेटम पर हैं। इस बार ट्रैक्टरों में बड़े बंपर लगवाए गए हैं।

इसके अलावा राकेश टिकैत ने कहा कि सरकार ने आखिरी बार 22 जनवरी को ही बातचीत की थी। साथ ही उन्होंने धरनास्थल पर कम भीड़ को लेकर कहा कि यह कोई मुद्दा नहीं है। आंदोलन सिर्फ शारीरिक उपस्थिति से ही बड़ा नहीं होता है। बल्कि लोगों के विचार आंदोलन को बड़ा बनाते हैं। इसलिए धरनास्थल पर कम भीड़ कोई मुद्दा नहीं है।

इस दौरान राकेश टिकैत ने हाल ही में संयुक्त किसान मोर्चा से सस्पेंड किए गए योगेंद्र यादव को लेकर कहा कि उन्हें कोई बुक लिखनी है। इसलिए वह छुट्टी पर गए हैं। कोई उसे सस्पेंड कहता है तो कोई उसे छुट्टी कहता है। अभी वो आराम कर रहे हैं और 21 तारीख को वे फिर आ जाएंगे। इस दौरान उनसे जब यह पूछा गया कि किसान नेताओं के बीच कोई आपसी विवाद भी है तो उन्होंने साफ़ कहा कि किसान नेताओं के बीच कोई आपसी विवाद नहीं है।

गौरतलब है कि किसान आंदोलन को 11 महीने से भी अधिक का समय हो चुका है। इतने दिन बीत जाने के बावजूद अभी तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया है। जनवरी महीने के बाद से ही किसान संगठनों और केंद्र सरकार के बीच कोई बातचीत नहीं हुई है और गतिरोध जारी है। केंद्र सरकार ने आखिरी मीटिंग में तीनों कानूनों को डेढ़ साल तक निलंबित करने का प्रस्ताव भी दिया था लेकिन किसान संगठनों ने इसे नामंजूर कर दिया था। प्रदर्शनकारी किसान तीनों कानूनों की वापसी को लेकर अड़े हुए हैं। हालांकि कृषि मंत्री ने भी साफ़ कर दिया है कि तीनों कृषि कानूनों को रद्द करने पर कोई बात नहीं होगी, आंदोलनकारी किसान तीनों कानूनों के प्रावधानों पर बात कर सकते हैं।

पढें राष्ट्रीय समाचार (National News). हिंदी समाचार (Hindi News) के लिए डाउनलोड करें Hindi News App. ताजा खबरों (Latest News) के लिए फेसबुक ट्विटर टेलीग्राम पर जुड़ें।

अपडेट