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जब राकेश टिकैत से पूछा गया, सरकार पर आपको भरोसा है? दिया यह जवाब

गुरुवार को सरकार के कृषि सचिव संजय अग्रवाल की तरफ से भेजे गए प्रस्ताव के बाद किसान संगठनों ने आपसी सहमति बनाकर आंदोलन ख़त्म करने की घोषणा की। इस प्रस्ताव में सरकार ने किसान संगठनों की अधिकतर मांगे मान ली।

गुरुवार को आंदोलन ख़त्म होने की घोषणा के बाद जश्न मनाते प्रदर्शनकारी किसान (एक्सप्रेस फोटो)

गुरुवार को केंद्र सरकार के साथ सहमति बनने के बाद किसान संगठनों ने दिल्ली की सीमाओं पर चल रहा प्रदर्शन समाप्त करने का ऐलान किया। 11 दिसंबर से किसान अपने अपने घरों को लौटना शुरू करेंगे। एक साल से भी अधिक समय तक चले इस किसान आंदोलन का प्रमुख चेहरा बन चुके किसान नेता राकेश टिकैत से जब सवाल पूछा गया कि क्या सरकार पर आपको भरोसा है तो उन्होंने जवाब देते हुए कहा कि इस बात पर अभी कुछ कहना ठीक नहीं है।

टीवी चैनल न्यूज 24 से बातचीत करने के दौरान किसान नेता राकेश टिकैत ने एमएसपी की क़ानूनी गारंटी की मांग दोहराई और कहा कि इससे 3 लाख करोड़ का फायदा किसान को हो सकता है। यह बाजार से आएगा और इसके ऊपर लगने वाला टैक्स सरकार तक भी जाएगा। किसान नेता के इतना कहने के बाद एंकर संदीप चौधरी ने उनसे पूछा कि इसका मतलब है कि क़ानूनी गारंटी नहीं होने तक आप नहीं मानेंगे।

एंकर के सवाल के जवाब में किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा कि अभी जो खरीद होती है वो सस्ते में होती है, बाद में बड़ा व्यापारी उसे एमएसपी पर बेचता है। क़ानूनी गारंटी मिलने से कम पर खरीद नहीं होगी और इसका फायदा सीधे सीधे किसानों के खाते में जाएगा। इसपर एंकर ने राकेश टिकैत से सवाल पूछते हुए कहा कि क्या आपको भरोसा है कि सरकार गारंटी देगी। इसके जवाब में टिकैत ने कहा कि आज इस बात पर कहना ठीक नहीं है। लेकिन भविष्य में क्या करना है इसपर सब लोग बैठकर चर्चा करेंगे। 

किसान आंदोलन समाप्त होने के ऐलान के बाद किसान नेता राकेश टिकैत ने यह जीत आंदोलन के दौरान शहीद हुए किसानों को समर्पित की। किसान नेता राकेश टिकैत ने ट्वीट करते हुए लिखा कि 1 साल 13 दिन चला किसानों का आंदोलन समस्याओं के समाधान की परिणति को प्राप्त हुआ। किसान एकता से मिली यह कामयाबी 709 शहीदों को समर्पित। किसान हकों की लड़ाई जारी रहेगी।

बता दें कि गुरुवार को सरकार के कृषि सचिव संजय अग्रवाल की तरफ से भेजे गए प्रस्ताव के बाद किसान संगठनों ने आपसी सहमति बनाकर आंदोलन ख़त्म करने की घोषणा की। इस प्रस्ताव में सरकार ने किसान संगठनों की अधिकतर मांगे मान ली। सरकार और किसान संगठनों के बीच जिन मुद्दों को लेकर सहमति बनी है उसमें एमएसपी को लेकर एक कमेटी बनाने, आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारी किसानों पर दर्ज हुए मुकदमे वापस लेने और मृतक किसानों के परिवारजनों को मुआवजा देने जैसे मुद्दे शामिल हैं।        

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