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नरेंद्र मोदी सरकार के फैसले के ख़िलाफ़ बोले BJP नेता, कहा- पार्टी सुन ही नहीं रही हमारी बात, Congress उठा रही फायदा

ज्ञानी के मुताबिक, "जहरीली शराब से होने वाली करीब 200 मौतों की त्रासदी के मुद्दे पर Congress बैकफुट पर थी। साथ ही कैबिनेट मंत्री द्वारा किए गए कथित एससी स्कॉलरशिप स्कैम को लेकर भी निशाने पर थी। पर उसके बजाय आज भाजपा बैकफुट पर है।"

Author Edited By अभिषेक गुप्ता चंडीगढ़ | Updated: November 7, 2020 8:33 AM
Farm Laws, Farmers, Punjab, BJP, INCकृषि कानून के खिलाफ पंजाब के बठिंडा शहर में भाई कन्हैया चौक बाधित कर विरोध करते हुए किसान। (फोटोः PTI)

किसान कानून पर नरेंद्र मोदी सरकार के फैसले के खिलाफ BJP के ही एक नेता ने आवाज उठाई है। सूबे के पूर्व मंत्री और पार्टी नेता सुरजील कुमार ज्ञानी ने किसानों के मुद्दे पर अपनी बात बीजेपी में न सुने जाने पर उन्होंने पार्टी नेतृत्व को निशाने पर लिया है। उनका कहना है कि पार्टी ने बड़े स्तर पर होने वाले किसानों के प्रदर्शनों को लेकर गलत रुख अपनाया। ज्ञानी के मुताबिक, “जहरीली शराब से होने वाली करीब 200 मौतों की त्रासदी के मुद्दे पर Congress बैकफुट पर थी। साथ ही कैबिनेट मंत्री द्वारा किए गए कथित एससी स्कॉलरशिप स्कैम को लेकर भी निशाने पर थी। पर उसके बजाय आज भाजपा बैकफुट पर है।”

बकौल ज्ञानी, “हमें किसानों की बात सुननी चाहिए, पर पार्टी नेतृत्व उनकी सुनने को राजी नहीं है। अगर हम कुछ कानून लाते हैं और किसान उन्हें ‘काला कानून’ तहते हैं, तब हमें उन्हें मनाना चाहिए या फिर कुछ बेहतर लेकर आना चाहिए। केंद्रीय नेतृत्व नहीं सुन रहा है, इसलिए मैं मीडिया के जरिए उनसे ये बात कह रहा हूं।”

भाजपा नेता ने कहा कि केंद्रीय नेतृत्व को किसानों के साथ बैठना चाहिए। ज्ञानी बोले- भगवान के लिए उनसे बात करिए। मेरी बीजेपी चीफ जेपी नड्डा, गृह मंत्री अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से गुजारिश है कि वे किसानों की बात सुनें, जो वे कहना चाह रहे हैं।

ज्ञानी बीजेपी के उस पैनल के भी अध्यक्ष हैं, जिसे किसानों से बात करने और समझाने के लिए गठित किया गया था। उनके अनुसार, किसान संगठन के प्रतिधिनियों को अक्टूबर में दिल्ली बैठक के लिए बुलाया गया था, पर वहां उनका अपमान हुआ। ऐसा इसलिए, क्योंकि कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने उन लोगों से मुलाकात ही नहीं की।

ज्ञानी ने आगे बताया, “किसान रेल पटरियों पर आनंद या खुशी के लिए नहीं बैठे हैं। कौन ऐसी चीजें करना पसंद करता है? केंद्र को आगे आना चाहिए और उनसे बात कर ट्रैक खाली कराने चाहिए। मुझे किसानों की समस्या का हल करने के लिए समिति का प्रमुख बनाया गया था, पर ऐसे पद का क्या मतलब जब आप हमारी बात ही नहीं सुन रहे हैं।”

दरअसल, मोदी सरकार के लाए कृषि कानूनों पर फिलहाल पंजाब और हरियाणा समेत कुछ सूबों में रार हैं। किसान इन्हें काला कानून बताते हुए वापस लेने की मांग पर अड़े हैं। कुछ जगह तो वे रेल पटरी पर बैठकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। रेल ट्रैक्स बाधित होने के कारण पंजाब में ऊर्जा और खाद की किल्लत हो रही है। खबर लिखे जाने तक सिर्फ होजरी क्षेत्र में इस चक्कर में 8,500 करोड़ का फटका लग चुका है।

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