बोले टिकैत- हारे BJP कैंडिडेट भी आप जिताओगे, एंकर ने टोका- दो बार आप हारे थे, मीडिया ने हरवाया था?

दरअसल, टिकैत कृषि कानूनों और दिल्ली की सीमाओं पर अपनी मांगों को लेकर अडिग अन्नदाताओं आदि के मुद्दे पर इंटरव्यू में बात कर रहे थे।

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दिल्ली के गाजीपुर बॉर्डर के पास किसान साथियों के साथ बीकेयू प्रवक्ता राकेश टिकैत। (एक्सप्रेस आर्काइव फोटोः प्रेमनाथ पांडे)

भारतीय किसान यूनियन (बीकेयू) के प्रवक्ता राकेश टिकैत शनिवार (चार सितंबर, 2021) को आरोप लगाने लगे कि मीडिया हारे हुए भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के उम्मीदवारों को भी जिताएगी।

किसान नेता ने यह बात हिंदी समाचार चैनल एबीपी न्यूज पर ऐंकर अखिलेश आनंद से कही थी। हालांकि, इस पर पत्रकार ने उन्हें टोका और दो टूक पूछा कि आप भी तो दो बार चुनाव हारे गए थे, तब क्या मीडिया ने आपको हरवा दिया था?

दरअसल, टिकैत कृषि कानूनों और दिल्ली की सीमाओं पर अपनी मांगों को लेकर अडिग अन्नदाताओं आदि के मुद्दे पर इंटरव्यू में बात कर रहे थे। एक पल ऐसा भी आया, जब पत्रकार ने उनसे पूछा कि यूपी में किसानों का असल हितैषी कौन है? इस सवाल के बाद टिकैत कुछ क्षणों के लिए तो चुप रहे। फिर एंकर ने टोका, तो वह बोले कि आवाज नहीं आई। बकौल टिकैत, “कुछ टेक्निकल फॉल्ट या और बात है, जो बार-बार आवाज चली जाती है।”

हालांकि, पत्रकार ने टिकैत के इस जवाब पर कहा कि शायद आप जवाब नहीं देना चाह रहे, इसलिए बार-बार चुप हो जाते हैं। वैसे, बाद में टिकैत ने कहा कि हितैषी सब रहते भी हैं और नहीं भी। जो जनता की बात मानता है, वह हितैषी होता है। सीएम योगी से किसानों की बात हुई। कहा गया कि सूबे में बिजली के रेट अधिक हैं। गन्ना भुगतान भी बहुत बकाया है। गन्ने की फसल के रेट भी पांच साल से नहीं बढ़े। आलू के और कुछ अन्य किसानों का भी ऐसा ही हाल है। स्थितियां नहीं बदली हैं।

आगे ऐंकर ने सलाह दी कि आप फिर सीधा चुनाव लड़ लीजिए और हालात बदल लीजिए? टिकैत का जवाब आया कि वह उस लाइन पर नहीं हैं। इंटरव्यू के दौरान आगे गर्माते हुए बोले- अरे, सुनो…हम अपनी बात कहेंगे, कोई नहीं रोकेगा।

टिकैत ने इसके अलावा यह भी साफ किया कि वह पांच सितंबर को यूपी के मुजफ्फरनगर में होने वाली किसानों की महापंचायत में पहुंचेंगे, लेकिन अपने घर नहीं जाएंगे। टिकैत के मुताबिक, उनका घर कार्यक्रमस्थल के आसपास ही है। लगभग 50 मीटर की दूरी पर। वह घर की तरफ देखेंगे जरूर, मगर वहां जाएंगे नहीं।

बता दें कि किसान मोदी सरकार के लाए तीन कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग पर अड़े हैं और उन्होंने साफ ऐलान कर रखा है कि जब तक कानून वापसी नहीं, तब तक घर वापसी नहीं। टिकैत भी इसी बात पर अभी तक अपने घर नहीं गए (जब से आंदोलन चालू हुआ है, तब से) हैं।

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