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26 जनवरीः ट्रैक्टर परेड से पहले ही दिल्ली में घुसे किसान, 2 बॉर्डर्स पर बैरिकेड तोड़ ली एंट्री

हैरत की बात है कि किसानों की दिल्ली में यह एंट्री वक्त से पहले थी। ऐसा इसलिए, क्योंकि किसानों ने प्रवेश सुबह आठ से नौ बजे के बीच लिया, जबकि उन्हें अनुमति गणतंत्र दिवस की मुख्य परेड के कार्यक्रम समाप्त होने के बाद अपनी ट्रैक्टर परेड निकालने की मंजूरी मिली थी।

Author Edited By अभिषेक गुप्ता नई दिल्ली | Updated: January 26, 2021 11:41 AM
Farmers, Tractor Parade, India Newsनई दिल्ली के बॉर्डर्स पर मंगलवार सुबह ट्रैक्टर परेड के वक्त (दिल्ली पुलिस द्वारा दिए गए) से पहले ही किसान दिल्ली में प्रवेश करते नजर आए। (फोटोः पीटीआई/रॉयटर्स)

72 वें गणतंत्र दिवस पर मंगलवार को किसानों की ट्रैक्टर रैली के दौरान सुबह दो जगह हंगामा हुआ। पहला- दिल्ली के सिंघु बॉर्डर पर। वहां किसानों के जत्थे ने राष्ट्रीय राजधानी में पुलिस बैरिकेडिंग तोड़ते हुए एंट्री ले ली। घटना से जुड़ा एक वीडियो भी कुछ टीवी चैनलों और सोशल मीडिया के जरिए सामने आया, जिसमें भारी संख्या में किसान ट्रैक्टरों के साथ नारे लगाते हुए आगे बढ़ते दिख रहे थे।

थोड़ी ही देर बाद दूसरी जगह भी किसान आपा खो बैठे और पुलिस के बैरिकेड तोड़कर दिल्ली-हरियाणा टिकरी बॉर्डर पर आगे बढ़ चले। कुछ देर तक तो किसान बैरिकेड्स की पीछे और उन पर रुके रहे। पर कुछ ही क्षणों बाद वे आगे बढ़े और एकदम से बैरिकेड हटाते और कूदते-भागते हुए आगे बढ़ने लगे। टिकरी से दिल्ली में जो किसानों का जत्था प्रवेश हुआ, उसमें जो कई वाहनों में भोपू लगे थे। संदेश दिया जा रहा था- पंजाब का किसान खालिस्तानी, आतंकी और माओवादी नहीं है।

हैरत की बात है कि किसानों की दिल्ली में यह एंट्री वक्त से पहले थी। ऐसा इसलिए, क्योंकि किसानों ने प्रवेश सुबह आठ से नौ बजे के बीच लिया, जबकि उन्हें अनुमति गणतंत्र दिवस की मुख्य परेड के कार्यक्रम समाप्त होने के बाद अपनी ट्रैक्टर परेड निकालने की मंजूरी मिली थी।

दिल्ली पुलिस ने इस बारे में स्पष्ट निर्देश भी दिए थे। किसानों की ट्रैक्टर परेड दोपहर 12 बजे से होनी थी। हालांकि, दिल्ली की सीमाओं पर किसानों के जत्थे सुबह आठ बजे से ही जुटना चालू हो गए थे। दिल्ली पुलिस ने तीन रूट्स (सिंघु, टिकरी और गाजीपुर) पर किसानों को यह परेड निकालने की इजाजत दी है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सिंघु के पास पांच हजार से अधिक आंदोलनकारी ट्रैक्टर मार्च के लिए आगे रवाना हुए।

वहीं, स्वराज अभियान के योगेंद्र यादव ने किसानों की ओर से सोमवार को ऐलान किया था कि किसानों की ट्रैक्टर परेड नौ जगह से निकलेगी और किसान दिल्ली नहीं बल्कि दिल जीतने आ रहे हैं।

बता दें कि दिल्ली की यही सीमा इस आंदोलन का केंद्र बिंदु है, जहां पिछले साल नवंबर में केंद्र के लाए तीन कृषि कानूनों के खिलाफ ‘दिल्ली चलो’ के नारे तहत किसानों का आंदोलन शुरू हुआ था। सरकार के साथ किसानों की 11 दौर की बात हो चुकी है, पर अब तक कुछ नतीजा नहीं निकला है।

हाल ही में केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा था, “सरकार, किसानों को इससे बढ़िया ऑफर (एक से डेढ़ साल तक स्थगित करना) नहीं दे सकती थी।” हालांकि, उन्होंने यह भी उम्मीद जताई कि जल्द ही केंद्र और किसानों के बीच समस्या का समाधान निकलेगा। उधर, किसान इन्हें ‘काले कानून’ करार दे रहे हैं और इन्हें पूरी तरह से रद्द करने की मांग पर अड़े हैं।

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