रिकॉर्ड पैदावार है देश में!- केंद्र का जिक्र कर बोलीं ऐंकर, टिकैत ने कहा- इन्हें हल का पता है कि कहां से फायदेमंद है?

बकौल बीकेयू नेता, सबको पता है, तब देश भुखमरी की कगार पर था। टिकैत (महेंद्र सिंह टिकैत) साहब को तब के PM मनमोहन सिंह ने बात करने को बुलाया कि देश में गेहूं की पैदावार कैसे बढ़ाई जाए तब एक घंटे की मुलाकात में टिकैत साहब ने उन्हें फॉर्मूला बताया।

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नई दिल्ली में जंतर-मंतर पर होने वाली किसान संसद के दौरान अपना संबोधन देते हुए बीकेयू नेता राकेश टिकैत। (फोटोः पीटीआई)

भारतीय किसान यूनियन (बीकेयू) नेता राकेश टिकैत ने कहा है कि उन्हें प्रधानमंत्री से मिलने का कोई शौक नहीं है। वह 18-18 घंटे तक पीएम आवास में रह चुके हैं, इसलिए वह पीएम से नहीं मिलना चाहते हैं। हालांकि, उनका कहना है कि वह भारत सरकार के मंत्रियों से भेंट करना चाहते हैं।

ये बातें उन्होंने गुरुवार को हिंदी समाचार चैनल आज तक की ऐंकर अंजना ओम कश्यप को दिए इंटरव्यू के दौरान कहीं। हुआ यूं कि किसान नेता से सवाल उठाते हुए सरकार का बयान दोहराया था कि “रिकॉर्ड पैदावार हो रही है। ये (किसान) मुट्ठी भर ऐसे नेता हैं, जिनके पास न कोई एजेंडा है। न कोई योजना। हर रोज अपनी बात बदलते हैं। ये विरोध कर रहें हैं। बाकी सारे किसान देश भर में कुशल हैं और देश में रिकॉर्ड पैदावार है।”

टिकैत ने इस पर जवाब दिया, “रिकॉर्ड पैदावार इन्होंने करी? इनको हल का पता है कि किधर से घिसने पर हानिकारक होता है और कहां से घिसने पर लाभदायक होता है। ये बता दें? ये किसान ने पैदावार की है…देश में। गेहूं साल 2007 में भारत सरकार बाहर से खरीदती थी। सबको पता है, तब देश भुखमरी की कगार पर था। टिकैत (महेंद्र सिंह टिकैत) साहब को तब के PM मनमोहन सिंह ने बात करने को बुलाया कि देश में गेहूं की पैदावार कैसे बढ़ाई जाए तब एक घंटे की मुलाकात में टिकैत साहब ने उन्हें फॉर्मूला बताया। आज 14 साल हो गए एक किलो गेहूं भी बाहर से नहीं आता।”

इस जवाब पर एंकर ने सवाल उठाया और आगे पूछा, “क्या आप को मोदी जी से मिलना है?” टिकैत का जवाब आया, “नहीं, मुझे पीएम से मिलने का कोई शौक नहीं है। मुझे तो सरकार के मंत्री से बयान की उम्मीद है। मैं तो 18-18 घंटे पीएम हाउस में रहा हूं। मुझे कोई शौक नहीं है, प्रधानमंत्री से मिलने का।”

बता दें कि केंद्र के तीन कृषि कानूनों के विरोध में किसानों ने गुरुवार (22 जुलाई) को दिल्ली के जंतर मंतर पर ‘किसान संसद’ का आयोजन किया था। संसद से चंद मीटर की दूरी पर आयोजित ‘किसान संसद’ यह दिखाने के लिए की थी कि किसान आंदोलन अभी भी जिंदा है। साथ ही केंद्र को बताना था कि वे भी संसद चलाना जानते हैं।

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