अंबानी की कंपनी का जिक्र कर बोलीं टिकैत की बहू- तब JIO सिम फ्री दिए थे, पर अब छोटा रीचार्ज भी महंगा है

निकिता ने यह उदाहरण यह बताने के लिए दिया कि अगर किसान धरना खत्म कर देते हैं, तो आगामी दिनों में मोदी सरकार के लाए तीन कृषि कानून की वजह से किसानों को भी भारी दिक्कत का सामना करना पड़ेगा।

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बीकेयू नेता के परिवार का साफ कहना है कि जब तक तीन काले कानून वापस नहीं लिए जाते हैं, तब तक वे लोग वापस नहीं जाएंगे। दाहिनी ओर खड़ी टिकैत की वधु और बेटी। (फोटोः टि्वटर वीडियो स्क्रीनग्रैब/@news24tvchannel)

नरेंद्र मोदी सरकार के लाए तीन कृषि कानूनों को लेकर न बीकेयू प्रवक्ता राकेश टिकैत का परिवार लंबे समय से इस आंदोलन का हिस्सा बना हुआ है।

मौजूदा समय में किसान नेता राकेश टिकैत का पूरा परिवार हर 10 से 15 दिन के अंतराल पर दिल्ली की सीमाओं पर चल रहे आंदोलन स्थलों पर अपना समर्थन देने पहुंच जाता है। इस दौरान घर के बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे भी वहां हाजिरी लगा दूसरों का मनोबल बढ़ाते हैं। इसी बीच, शुक्रवार को जब टिकैत के परिवार से उनकी बहू और बेटी गाजीपुर पहुंची, तो वे मीडिया से मुखातिब हुईं। हिंदी समाचार चैनल न्यूज 24 से बातचीत में राकेश टिकैत की बहू निकिता ने बिना मुकेश अंबानी का नाम लिए उनकी कंपनी जियो का जिक्र किया और बताया कि कैसे कृषि कानून भी अन्नदाताओं को नुकसान पहुंचा सकते हैं। वह बोलीं- पहले जियो के फोन आए थे। फिर कंपनी के फ्री सिम दिए गए। आज महीने में 28 दिन का जियो का सबसे छोटा रीचार्ज जो पहले 75 रुपए का हुआ करता था, वह भी अब 149 रुपए का हो चुका है। ये शुरू में तो बहुत प्रोत्साहित कर देते हैं, पर बाद में परेशान करते हैं।”

निकिता ने यह उदाहरण यह बताने के लिए दिया कि अगर किसान धरना खत्म कर देते हैं, तो आगामी दिनों में मोदी सरकार के लाए तीन कृषि कानून की वजह से किसानों को भी भारी दिक्कत का सामना करना पड़ेगा।

टिकैत की बेटी वंशिका चौधरी से जब पूछा गया कि क्या लगता है और सरकर क्यों नही मान रही है? जवाब आया- शायद सरकार के ईगो (अहं) पर बात आ गई है। शायद सरकार का यह सोचना है कि वह कुछ भी कर सकती है और उसकी बात सबको मानना अनिवार्य है। पर सरकार को यह समझना होगा कि सब अपने हक के लिए खड़े हो सकतें है। किसान अपने हक के लिए अड़ा है और सरकार अपने ईगो पर अड़ी है।

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