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“मोदी जी बोलते बहुत हैं, जो बोलते हैं वे काम करते नहीं”, PM की ‘नेतागिरी’ पर बोले टिकैत

टिकैत ने कहा, "बीजेपी में पता चला है कि आपस में वहां तोड़-फोड़ हो रही है।" पत्रकार ने इसी पर मुस्कुराते हुए सवाल दागा- कुछ लोग संपर्क में हैं टिकैत साहब? BKU नेता भी इस पर हंसने लगे। हालांकि, जवाब आया- हमारी तो अंदर बात होती है। पर उन्होंने किसी नेता का नाम नहीं लिया।

Author Edited By अभिषेक गुप्ता नई दिल्ली | Updated: February 16, 2021 9:25 AM
Rakesh Tikait, BKU, Narendra Modiकेंद्र सरकार के लाए तीन कृषि कानूनों को लेकर केंद्र और किसान यूनियनों के बीच फिलहाल गतिरोध बना हुआ है। दिल्ली के तीन बॉर्डर्स पर बड़े स्तर पर आंदोलन चल रहे हैं, जिनमें से गाजीपुर बॉर्डर पर बीकेयू के राकेश टिकैत नेतृत्व कर रहे हैं। (फोटोः एजेंसी)

BKU नेता राकेश टिकैत ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बोलते बहुत हैं। जो बोलते हैं, वह काम करते नहीं। टिकैत ने यह दावा भी किया कि प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) के अफसर पीएम को गलत कागज-पत्तर पकड़ा देते हैं। ये बातें सोमवार को उन्होंने हिंदी चैनल Aaj Tak को दिए एक इंटरव्यू के दौरान कहीं।

टिकैत इस दौरान गाजीपुर बॉर्डर वाले इलाके में एक ट्रैक्टर पर सवार थे, जबकि उनके साथ चैनल की दो पत्रकार मौजूद थीं। अंजना ओम कश्यप सामने बैठकर सवाल पूछ रही थीं, जबकि चित्रा त्रिपाठी भी ट्रैक्टर चलाने के साथ किसान आंदोलन और कृषि कानूनों से जुड़ों मुद्दे पर प्रश्न कर रही थीं। इसी बीच, अंजना ने पूछा था- आपको नरेंद्र मोदी कैसे नेता लगते हैं? इस पर उन्होंने कहा- महंगाई बढ़ी…वह बोलते ज्यादा हैं। जो कहते हैं, वह काम करते नहीं हैं। उन्हें जो दस्तावेज दिए जाते हैं, वे गलत होते हैं। पीएमओ से, जो भी उनके संबंधित अधिकारी होते हैं, वे उन्हें गलत डॉक्यूमेंट दे देते हैं और कुछ वे भी बोलते हैं।

टिकैत ने कहा, “बीजेपी में पता चला है कि आपस में वहां तोड़-फोड़ हो रही है।” पत्रकार ने इसी पर मुस्कुराते हुए सवाल दागा- कुछ लोग संपर्क में हैं टिकैत साहब? BKU नेता भी इस पर हंसने लगे। हालांकि, जवाब आया, “हमारी तो अंदर बात होती है।” पर उन्होंने किसी नेता का नाम नहीं लिया।

दूसरी जर्नलिस्ट ने सवाल दागा- सरकार कह रही है कि दो-तीन राज्य छोड़ कर किसी को आपत्ति नहीं है। पुरानी व्यवस्था रहेगी। पर पूरे देश का समर्थन आपको नहीं है? टिकैत ने कहा- हम भी तो कह रहे हैं कि एमएसपी पर कानून बनने के बाद असम का किसान भी लाभान्वित होगा। जिसने कभी एमएसपी नहीं देखी होगी, वह भी अपनी धान उस पर बेचेगा। उनके गोदाम पहले बन गए, पर कानून बाद में आए। सरकार कोई किसान संगठन की एडवाइजरी बॉडी थोड़ी न है, जो उसकी कही गई बात के हिसाब से हम चलेंगे।

सरकार तक क्या संदेश पहुंचाना चाहेंगे, ताकि गतिरोध खत्म हो और बात हो? टिकैत बोले- इसे लाइव चलवा दो और मीटिंग करा दो कि वो क्या कह रहे और हम क्या कह रहे। इसी पर अंजना ने पूछा- पीएम के साथ ऐसे ट्रैक्टर पर बैठ कर बात करने का मन है? टिकैत ने कहा- नहीं। उन्हें फिलहाल बीच में नहीं आना चाहिए। उनकी जो कमेटी और उनके मंत्री हैं, वे आएं। समझौता हो जाए, फिर आएं।

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