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कृषि कानूनः ‘BJP में जितने सांसद, उतने दिन तो चलेगा आंदोलन’, BKU के टिकैत का दावा- जल्द आ रहा है इनके MP का इस्तीफा

BKU प्रवक्ता ने इसके अलावा यह भी कहा कि केंद्र में सत्तारूढ़ दल में जितने सांसद हैं, उतने दिन ही तीन विवादित कृषि कानूनों के खिलाफ यह आंदोलन चलेगा।

Rakesh Tikait, BKU, India Newsकिसान नेता और BKU प्रवक्ता राकेश टिकैत। (एक्सप्रेस आर्काइव फोटोः प्रेमनाथ पांडे)

किसान नेता और BKU प्रवक्ता राकेश टिकैत ने बड़ा दावा किया है कि किसान आंदोलन के समर्थन में BJP के सांसद इसी महीने अपना इस्तीफा दे देंगे। उन्होंने इसके अलावा यह भी कहा कि केंद्र में सत्तारूढ़ दल में जितने सांसद हैं, उतने दिन ही तीन विवादित कृषि कानूनों के खिलाफ यह आंदोलन चलेगा।

गुरुवार को उन्होंने हिंदी चैनल ‘Aaj Tak’ से बात करते हुए कहा, “चीजें एमएसपी पर नहीं बिक रहीं। हमने कहा- दिल्ली में नई मंडी खुल गई। वहां ले कर आ जाओ…वहां बिकेगा। गेहूं, 1975 रुपए है…अगर उसकी नहीं खरीद हो रही, तब पांच क्विंटल रखे और एक आदमी आ जाए, उसका भी तर्जुबा हो जाएगा कि जिसको उसने वोट दिया…। नई मंडी खुली है।”

बकौल टिकैत, “पीएम ने कहा है- कहीं भी बेच लो। कहीं का से मतलब है कि सड़क पर चलते जो भी विभाग उसे रोकेगा, उसका वह खरीद ले। आगे नहीं रोकेगा, कभी भी बेचेगा। हम तो दिल्ली में बेचेंगे। दिल्ली में हमारा एमएसपी पर बिकेगा। संसद के गेट पर बिकेगा। वहां कोई न कोई व्यापारी मिलेगा, क्योंकि कानून वहीं बने हैं।…तो आएगा किसान आएगा वहीं।”

यह पूछे जाने पर कि इतना लंबा आंदोलन चलेगा…सोचा था? टिकैत ने साफ कहा- नहीं…इतनी उम्मीद नहीं थी। इनके सांसद इस्तीफे देंगे। पहला इस्तीफा आ रहा है जल्दी। इनका बीजेपी का सांसद छोड़ रहा है। जितनी इनके (भाजपा-एनडीए) पास सीटे हैं, उतने दिन तो कम से कम आंदोलन चलेगा। एक सांसद, एक सीट, एक दिन…।”

वहीं, एक अन्य इंटरव्यू में उन्होंने हिंदी खबरिया चैनल ‘News 24’ को बताया, “अरे, नफा-नुकसान तो हर आदमी देखेगा। वोट लेकर गए और काम किया दूसरा। महंगाई कहां जा रही है, तीन बिल कौन लेकर आए व एमएसपी पर बिल नहीं बन रहा।” उनकी यह टिप्पणी उस सवाल के जवाब के रूप में आई, जिसमें पूछा गया था कि अचानक ऐसा क्या बदल गया कि किसान कहेंगे कि बीजेपी को वोट नहीं देगा है?

इस सवाल पर कि शुरुआत में कहा था कि किसी राजनीतिक पार्टी के खिलाफ नहीं हैं। फिर अब खिलाफत क्यों? टिकैत का जवाब आया- खिलाफत नहीं करेंगे तो क्या करेंगे। लड्डू बांटेंगे क्या? हम अपनी बात कह रहे हैं, बस क्षेत्र बदल गया है।

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