झारखंड के एक गांव में ईसाई धर्म अपनाने के बाद चार परिवारों को सामाजिक बहिष्कार का सामना करना पड़ा। यह घटना पश्चिम सिंहभूम जिले के जगन्नाथपुर ब्लॉक के हल्दी पोखर गांव में हुई जहां चार परिवारों के ईसाई धर्म अपनाने के चलते ग्रामीणों ने उनके कई सार्वजनिक चीजों के इस्तेमाल पर रोक लगा दी। ग्रामीणों ने सार्वजनिक जल स्रोतों, वन उत्पादों और अन्य सार्वजनिक सुविधाओं तक उनकी पहुंच को प्रतिबंधित कर दिया।
शनिवार को पुलिस प्रशासन के संज्ञान में मामला आने के बाद पुलिस और राजस्व अधिकारियों ने हस्तक्षेप किया। अधिकारियों ने बताया कि कानूनी कार्रवाई की चेतावनी के बाद ग्राम स्तरीय बैठक के माध्यम से मामले का समाधान किया गया। प्रभावित परिवारों ने आरोप लगाया कि उन्हें गांव के तालाब, कुएं, हैंडपंप और दुकानों का उपयोग करने से रोका गया और जंगल से लकड़ी और पत्तियां इकट्ठा करने से भी मना किया गया। सरना धर्म से संबंधित ग्रामीणों ने दावा किया कि यह निर्णय उनके धर्म, संस्कृति और पारंपरिक विश्वास प्रणाली की रक्षा के लिए लिया गया था। उनका तर्क था कि निरंतर धर्मांतरण से उनके वन देवता, संस्कृति और पारंपरिक सामाजिक संरचना प्रभावित होगी।
चार परिवार के ईसाई धर्म में परिवर्तन का मामला
आधिकारिक जानकारी के अनुसार, तीन परिवार पहले ही ईसाई धर्म में परिवर्तित हो चुके थे जबकि यह मुद्दा हाल ही में चौथे परिवार के अन्य सदस्यों द्वारा ईसाई धर्म में परिवर्तित होने के बाद सामने आया। कुमारदुंगी पुलिस स्टेशन के प्रभारी अधिकारी रंजीत ओरांव ने कहा कि पुलिस अधिकारियों ने व्यक्तिगत रूप से गांव का दौरा किया और दोनों पक्षों के साथ बैठक की। अधिकारी ने कहा, “हम खुद गांव गए और सभी से बात की। गांव के मुखिया समेत पूरे गांव को बुलाया गया। सर्कल ऑफिसर भी मौजूद थे। सभी को स्पष्ट रूप से बताया गया कि सामाजिक बहिष्कार एक दंडनीय अपराध है।”
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अधिकारी ने आगे बताया कि दोनों पक्षों को सलाह दी गई थी कि वे मामले को अपने हाथ में न लें और भविष्य में किसी भी समस्या की स्थिति में तुरंत पुलिस से संपर्क करें। उन्होंने कहा, “हमने उन्हें स्पष्ट रूप से कहा था कि वे कोई भी निर्णय अपने आप न लें। कोई छोटी सी भी समस्या हो तो वे हमें सूचित करें और हम वहां पहुंच जाएंगे। यह इलाका बहुत दूरदराज है और यहां तक कि फोन नेटवर्क भी ठीक से काम नहीं करते।” सर्किल ऑफिसर मुक्ता सोरेन ने कहा कि धार्मिक आधार पर किसी भी प्रकार का भेदभाव अवैध और असंवैधानिक है। उन्होंने कहा कि पुलिस स्थिति पर कड़ी नजर रख रही है।
वहीं, दूसरी ओर ग्रामीणों ने दावा किया कि आखिरकार यह फैसला लिया गया कि धर्मांतरित परिवार गांव की मुख्य सार्वजनिक सुविधाओं का उपयोग नहीं करेंगे बल्कि उन्हें अपने घरों के सामने स्थित एक अलग कुएं से पानी लेने की अनुमति दी जाएगी।
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