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फर्जी जॉब पोर्टल ने 27,000 बेरोजगारों को दिया धोखा, ठगे 1.09 करोड़ रुपए

पुलिस ने गुरुवार को पांच संदिग्धों को गिरफ्तार किया है। ये केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के नाम से एक नौकरी रैकेट चला रहे थे। इन लोगों ने एक महीने में देश भर के 27000 बेरोजगारों को सरकारी नौकरी का झांसा देकर करीब 1.09 करोड़ रुपए ठगे हैं।

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दिल्ली पुलिस के साइबर सेल ने एक बड़ा खुलासा किया है। पुलिस ने गुरुवार को पांच संदिग्धों को गिरफ्तार किया है। ये केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के नाम से एक नौकरी रैकेट चला रहे थे। इन लोगों ने एक महीने में देश भर के 27000 बेरोजगारों को सरकारी नौकरी का झांसा देकर करीब 1.09 करोड़ रुपए ठगे हैं।

पीड़ितों की संख्या को देखते हुए पुलिस ने कहा कि पुलिस द्वारा पकड़ा गया यह अबतक का सबसे बड़ा फ़्रॉड है। साइबर सेल के डीसीपी अन्येष रॉय के मुताबिक, जांच में सबसे पहले टीम ने हरियाणा के हिसार से जींद निवासी 27 वर्षीय अमनदीप को एटीएम से कैश निकालते समय रंगे हाथों गिरफ्तार किया। इसके बाद 35 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर जोगिंदर सिंह, 50 वर्षीय रामधारी, 32 वर्षीय संदीप कुमार और भिवानी निवासी 50 वर्षीय सुरेंद्र को गिरफ्तार किया गया।

इन लोगों ने स्वास्थ्य एवं जन कल्याण संस्थान नामक फर्जी वेबसाइट बनाकर एलडीसी, यूडीसी, एंबुलेंस ड्राइवर व नर्स समेत अन्य पदों के लिए 13 हजार भर्तियाँ निकाली थी। पुलिस को आरोपियों के पास से 49 लाख रुपए, 3 लैपटॉप और 7 मोबाइल फोन मिले हैं।

साइबर सेल के डीसीपी ने बताया कि इनमें अमनदीप, नौकरी के लिए युवाओं द्वारा जमा कराए गए पैसे हिसार स्थित एटीएम से निकालने का काम करता था। सुरेंद्र सिंह को खाता धारक बनाया गया था। संदीप ने फर्जी वेबासाइट डिजाइन की थी। वह सॉफ्टवेयर इंजीनियर है।

अन्येष रॉय ने बताया कि वेबसाइटों को इतनी दृढ़ता से डिजाइन किया गया था कि कुछ समाचार और नौकरी सूचना पोर्टलों को लगा की यह सही है। इसके लिए आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों से 500/400 रुपये ऑन लाइन वेबसाइट पर गेटवे के जरिए लिए जा रहे थे। सूचना के बाद पुलिस की टीम ने वेबसाइट की जांच की तो दोनों ही वेबसाइट फर्जी मिलीं। अभ्यर्थी जिस गेटवे के जरिए पैसे ट्रांसफर कर रहे थे, उनकी जांच की गई तो पता चला कि गेटवे से कुछ खाते जुड़े हैं, उन खातों से हिसार के कुछ एटीएम में रुपये निकाले जा रहे हैं। यहीं से सुराग मिलता चला गया।

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