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रामपुर हमला: 12 साल बाद रिहा हुआ फहीम अंसारी, जताई कभी न पूरी हो सकने वाली ख्वाहिश

अंसारी अपने 9 भाई-बहनों में सबसे छोटा है। 2008 में दुबई स्थित प्रिंटिंग प्रेस में काम करने से पहले उसका अधिकतर वक्त मुंबई में ही बीता था। नौकरी के 2 साल बाद वह छुट्टियों में घर आया था और उसे गिरफ्तार कर लिया गया था।

Author मुंबई | Updated: November 8, 2019 9:28 AM
रामपुर हमले में 12 साल बाद रिहा हुआ फहीम अंसारी, फोटो सोर्स- इंडियन एक्सप्रेस

मुंबई में अपना अधिकतर समय बिताने वाला फहीम अंसारी 12 साल बाद जेल से रिहा हुआ। बुधवार (6 नवंबर) को जब वह उत्तर प्रदेश की बरेली जेल से बाहर निकला तो उसे ऐसी ख्वाहिश जाहिर की, जो कभी पूरी नहीं हो सकेगी। दरअसल, 49 वर्षीय फहीम अंसारी ने रिहा होने के बाद कहा, ‘‘अपनी रिहाई के बाद मैं 2 लोगों से मिलना चाहता था, लेकिन अब वे इस दुनिया में नहीं हैं। मुझे इसका हमेशा अफसोस रहेगा।’’ बता दें कि फहीम अंसारी पर 26/11 मुंबई आतंकी हमले में मदद करने के आरोप लगे थे, जिसमें उसे 9 साल पहले बरी कर दिया गया था। हालांकि, उसे एक दूसरे मामले में काफी समय जेल में गुजारना पड़ा।

अंसारी ने जताई यह ख्वाहिश: रिहा होने के बाद फहीम अंसारी मुंबई पहुंचा। यहां जमीयत-ए-उलेमा महाराष्ट्र के ऑफिस में उसने कहा, ‘‘जेल से रिहा होने के बाद मैं 2 लोगों से मिलना चाहता था। इनमें एक वकील शाहिद आजमी थे, जिन्होंने 26/11 केस में मेरा बचाव किया। वहीं, दूसरे एटीएस के चीफ हेमंत करकरे थे, जिन्होंने अधिकारियों को बताया था कि मैं बेगुनाह हूं। दुख इस बात का है कि दोनों आतंकियों की गोलियों का शिकार हो गए।’’

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26/11 में फहीम पर लगा था यह आरोप: बता दें कि फहीम अंसारी अपने भाई की प्रिंटिंग यूनिट में बतौर कैलिग्राफर काम करता था। फहीम पर आरोप था कि उसने मुंबई के नक्शे तैयार किए थे, जिससे अजमल कसाब समेत 26/11 के अन्य आतंकियों को मदद मिली थी। मई 2010 में उसे 26/11 केस में बरी कर दिया गया, लेकिन फरवरी 2008 में यूपी एसटीएफ द्वारा गिरफ्तार किए जाने के चलते उसे जेल में ही रहना पड़ा। एसटीएफ का दावा था कि वह रामपुर में सीआरपीएफ कैंप पर हुए हमलों में शामिल था, जिसमें 7 जवानों व एक आम नागरिक की मौत हो गई थी।

फहीम को मिली थी 10 साल की सजा: अंसारी पर फर्जी पाकिस्तानी पासपोर्ट, फर्जी भारतीय ड्राइविंग लाइसेंस, मुंबई के कुछ नक्शे व एक पिस्टल रखने के आरोप में केस दर्ज किया गया था। रामपुर की एक अदालत ने पिछले हफ्ते सुनवाई के दौरान अंसारी को फर्जी दस्तावेज रखने का दोषी पाया, लेकिन उसके खिलाफ सरकार के खिलाफ बगावत करने के सबूत नहीं मिले। ऐसे में उसे 10 साल की सजा सुनाई गई, लेकिन बुधवार (6 नवंबर) को उसे रिहा कर दिया गया, क्योंकि वह पहले ही जेल में 11 साल काट चुका था।

लखनऊ से गिरफ्तार किया गया था फहीम: फहीम अंसारी ने बताया, ‘‘यूपी पुलिस ने मुझे लखनऊ में उस वक्त गिरफ्तार किया था, जब मैं दुबई में रहने वाले अपने दोस्तों के कुछ कपड़े खरीद रहा था। एक सप्ताह बाद मेरी गिरफ्तारी रामपुर से दिखाई गई। मुझे बिल्कुल भी नहीं पता था कि मुझे गिरफ्तार क्यों किया गया?’’

26/11 से पहले भी जेल में था फहीम: जानकारी के मुताबिक, अंसारी अपने 9 भाई-बहनों में सबसे छोटा है। 2008 में दुबई स्थित प्रिंटिंग प्रेस में काम करने से पहले उसका अधिकतर वक्त मुंबई में ही बीता था। नौकरी के 2 साल बाद वह छुट्टियों में घर आया था और उसे गिरफ्तार कर लिया गया था। फहीम ने बताया, ‘‘26/11 हमले से पहले करीब 8 महीने पहले ही मैं जेल में बंद था। एक दिन मुझे अखबार पढ़ने के लिए मिला, जिसमें लिखा था कि मैं 26/11 आतंकी हमलों में शामिल था। इस खबर ने मुझे तोड़कर रख दिया।’’

महाराष्ट्र एटीएस ने दी थी क्लीन चिट: फहीम ने दावा किया, ‘‘लखनऊ में गिरफ्तारी के बाद मुझे मुंबई लाया गया और महाराष्ट्र एटीएस के हवाले कर दिया गया। उन्होंने मुझे क्लीन चिट दे दी थी। यूपी एसटीएफ ने 26/11 हमले से काफी पहले मुझे महाराष्ट्र एटीएस के हवाले कर दिया था। उस वक्त हेमंत करकरे एटीएस के चीफ थे। उन्होंने यूपी पुलिस को बताया था कि मेरे खिलाफ कुछ नहीं मिला। इसके बाद भी मुझे रिहा नहीं किया गया।’’

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