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Coronavirus संकटः दिल्ली की 1 स्क्रीनिंग लैब में रोजाना 100 टेस्ट, 17 घंटे लगातार काम पर डटे रहते हैं डॉक्टर, परिवार के लिए रत्ती भर भी वक्त नहीं

दिल्ली में स्क्रीनिंग लैब के डॉक्टर डीआर पार्था रक्षित के मुताबिक, अब तक कोरोनावायरस की वजह से सुबह 9:30 से शाम 7 बजे तक की वर्किंग कई बार अगले दिन की दरमियानी रात तक खिंच जाती है।

Author Translated By कीर्तिवर्धन मिश्र नई दिल्ली | Updated: March 23, 2020 8:40 AM
टेस्टिंग लैब की प्रतीकात्मक फोटो।

Coronavirus Latest news and updates: दिल्ली के नेशनल सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल (एनसीडीसी) में इन दिनों डॉक्टरों का टेस्टिंग लैब से बाहर निकलना नामुमकिन जैसा हो गया है। कोरोनावायरस संक्रमण की वजह से पिछले दो महीनो में तो टेस्टिंग करने वाले डॉक्टरों को कई बार नियत समय से ज्यादा देर तक काम करना पड़ रहा है। माइक्रोबायोलॉजी लैब में रोजाना साढ़े नौ घंटे का दिन का काम अब कई दिन 17 घंटे तक जारी है। डॉक्टर यहां सिर से पैर तक प्रोटेक्टिव गियर में सैंपल्स की जांच में जुटे हैं।

कोरोनावायरस की वजह से डॉक्टरों पर कितना बोझ पड़ा है, इसका अंदाजा इसी बात से लगा सकते हैं कि एनसीडीसी के डिप्टी डायरेक्टर सुबह के ब्रेक के लिए भी लैब से बाहर नहीं निकल पाते। हालांकि, वे लगातार मैन्युफैक्चरर्स से फोन पर बातों में जुटे रहते हैं, ताकि कोरोनावायरस से लड़ाई में लैब की क्षमताएं बढ़ाई जा सकें।

जिस लैब में डॉक्टर रक्षित काम कर रहे हैं, वह उन देश की उन 111 फैसिलिटीज में है, जहां कोरोनावायरस संदिग्धों के ब्लड सैंपल्स की टेस्टिंग जारी है। हर दिन इसी लैब में सैकड़ों मामले जांच के लिए आते हैं। यह केस उत्तर प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और यहां तक की लद्दाख से भी आते हैं।

डॉक्टर रक्षित बताते हैं- “हम वायरस को देख नहीं सकते। इसलिए हम सैंपल्स में इसके जीन्स को पहचानने की कोशिश करते हैं। पहला टेस्ट के जरिए यह तकरीबन साफ हो जाता है कि वायरस कोरोनावायरस के किस वर्ग का है। इसे हम स्क्रीनिंग टेस्ट कहते हैं। अगले टेस्ट में हम उन जीन्स को पहचानने की कोशिश करते हैं जो नोवेल कोरोनावायरस यानी कोविड-19 में ही पाए जाते हैं। दूसरा टेस्ट तभी किया जाता है, जब पहला टेस्ट पॉजिटिव आता है।”

रक्षित के मुताबिक, अब तक एनसीडीसी में 2000 टेस्ट किए जा चुके हैं। कोरोनावायरस के बढ़ते मामलों की वजह से अब हर दिन सुबह 9:30 से शाम 7 बजे तक की वर्किंग बदल कर अब सुबह 7 से अगले दिन की दरमियानी रात 2:00 बजे तक जारी रहती है। लैब के सभी स्टाफ मेंबर्स की यही स्थिति है। हमारा सामान्य काम, जो अब तक हेपटाइटिस की जांच से जुड़ा था, अब पीछे है।

डॉक्टर ने बताया कि उनकी दो बेटियां हैं और पत्नी भी पैथोलॉजिस्ट है। लेकिन अस्पतालों की तरफ से लगातार आ रहे सैंपल्स की वजह से टेस्ट के नतीजे देने भी जरूरी हैं। इसकी वजह से लैब में रक्षित और उनके साथियों को कई पारिवारिक कार्यक्रम छोड़ने पड़ते हैं। दरअसल, कोरोनावायरस का पहला टेस्ट करीब 5-6 घंटे लेता है। इसे रिपीट भी किया जाता है, ताकि कोई गलती न हो। यानी रिपोर्ट आने में 8 से 9 घंटे का समय लग जाता है। ऐसे में ज्यादातर डॉक्टर अपने बढ़े हुए कामों में ही व्यस्त रह जाते हैं।

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