मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव और उनके परिजनों की लैंड डील को लेकर इंडियन एक्सप्रेस ने कई खुलासे किए हैं। पड़ताल में पता चला है कि उज्जैन में उन जगहों पर जमीन ज्यादा खरीदी गई है, जहां कोई न कोई नई सड़क परियोजना शुरू होनी है।

इंडियन एक्सप्रेस की इसी पड़ताल के दूसरे भाग में जानने की कोशिश करते हैं कि आखिर किस प्रकार की लैंड डील मोहन यादव के परिजनों द्वारा की जा रही थी।

इंडियन एक्सप्रेस को पता चला है कि मुख्यमंत्री मोहन यादव के परिवार वाले सिर्फ जमीन खरीदने का काम नहीं कर रहे थे, बल्कि खरीदी गई कुछ जमीनों को उन्होंने विकसित करने के लिए बिल्डरों को सौंप दिया था। उनके साथ बाकायदा समझौते किए गए थे। कुछ ऐसे प्रोजेक्ट भी सामने आए, जहां उनके परिजन खुद ही उन जमीनों को विकसित कर रहे थे।

उदाहरण के तौर पर, मोहन यादव के चचेरे भाई गोविंद यादव और उनके साथियों ने अप्रैल 2024 से जुलाई 2025 के बीच गांगेड़ी क्षेत्र में 16 अलग-अलग सौदों के जरिए 41 एकड़ जमीन खरीद ली थी। यह इलाका अपग्रेड किए जा रहे उज्जैन-बदनगर और उज्जैन-इंदौर हाईवे के जंक्शन के काफी करीब है।

रिपोर्ट बताती है कि जमीन खरीदने के कुछ महीनों बाद ही जुलाई 2024 से सितंबर 2025 के बीच इन प्लॉटों को पांच चरणों में इंदौर की कंपनी शांति महालोक बिल्डर्स को सौंप दिया गया था।

यहां एक समझौता ऐसा था, जिसमें कहा गया था कि शांति महालोक बिल्डर्स को अपनी लागत और जोखिम पर 24 महीने के भीतर पूरा प्रोजेक्ट तैयार करना होगा। इसके बदले विकसित संपत्ति, जिसमें मकान और दूसरी यूनिट भी शामिल होंगी, उसका 67.8 प्रतिशत हिस्सा गोविंद यादव और उनके साझेदारों को वापस दिया जाएगा। इसके बाद गोविंद यादव और उनके साथी उसे बेच सकते थे या फिर अपने उपयोग में ला सकते थे।

इंडियन एक्सप्रेस को अपनी पड़ताल में यह भी पता चला है कि बाकी जमीनों को भी इसी तरह से बिल्डरों को सौंपा गया था। हालांकि उन मामलों में विकसित परियोजना का स्वामित्व 60:40 के अनुपात में बांटा गया था। इसका मतलब था कि एक हिस्सा जमीन मालिकों के पास रहेगा, तो दूसरा हिस्सा बिल्डर के पास जाएगा।

इंडियन एक्सप्रेस ने इन्हीं सौदों को लेकर गोविंद यादव के बेटे अनंत यादव से बात की। उन्होंने साफ-साफ कहा, “बिल्डर के साथ हमारा समझौता पूरी तरह जमीन की बढ़ती कीमत और निर्माण की तय लागत के आधार पर हुआ है।”

जमीन खरीद को लेकर भी अनंत यादव ने सफाई दी। उनका कहना था कि जमीन खरीद के समझौते भले 2023 में पंजीकृत हुए हों, लेकिन ये सौदे 2020 से ही चल रहे थे। उनके मुताबिक, उस समय मोहन यादव न तो मुख्यमंत्री थे और न ही मंत्री।

उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि जिस हाईवे का जिक्र लगातार किया जा रहा है, उसे 2019 में ही मंजूरी मिल चुकी थी। उनके मुताबिक, यह जमीन हाईवे पर नहीं, बल्कि उससे करीब 100 मीटर दूर स्थित है।

इंडियन एक्सप्रेस ने अपनी पड़ताल के दौरान शांति महालोक बिल्डर्स के सह-मालिक मेहुल मेहता से भी बात करने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने किसी भी प्रकार की टिप्पणी देने से साफ इनकार कर दिया।

उधर, इंडियन एक्सप्रेस की पड़ताल में चचेरे भाई निलेश यादव का नाम भी सामने आया है। निलेश यादव “सांवरिया” ब्रांड के तहत कई रियल एस्टेट प्रोजेक्ट विकसित कर रहे हैं।

अक्टूबर 2024 से उन्होंने अपनी कंपनी श्री अन्नपूर्णा कंस्ट्रक्शन के जरिए मध्य प्रदेश रेरा में उज्जैन की चार नई हाउसिंग योजनाएं पंजीकृत कराई थीं।

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इन योजनाओं में अक्टूबर 2024 में कराड़िया में 7.5 एकड़ जमीन पर “श्री सांवरिया धाम” पंजीकृत कराया गया था। यह जमीन जुलाई 2023 में खरीदी गई थी।

इसी तरह दिसंबर 2024 में चंदेसरा में 5 एकड़ जमीन पर “सांवरिया ड्रीम्स” नामक योजना पंजीकृत हुई थी। यह जमीन अक्टूबर 2023 में खरीदी गई थी।

इसके अलावा सितंबर 2025 में ढेड़िया इलाके में “सांवरिया ग्रीन” नाम की एक और योजना शुरू की गई। इसके लिए 12.13 एकड़ जमीन सितंबर 2024 में श्री सिद्धिविनायक देवकॉन्स से हासिल की गई थी।

इसके बाद नवंबर 2025 में नानाखेड़ा में 3.7 एकड़ जमीन पर “श्री सांवरिया रेजिडेंसी” नाम की योजना शुरू की गई। यह जमीन जून 2024 में खरीदी गई थी।

इस पूरे विवाद को लेकर निलेश यादव की ओर से जवाब देते हुए अनंत यादव ने कहा, “हमारा परिवार 2010 से रियल एस्टेट कारोबार में सक्रिय है। उस समय मेरे पिता ने उज्जैन में 100 बीघा जमीन की एक परियोजना विकसित की थी। मेरे चाचा के भी कई सांवरिया हाउसिंग प्रोजेक्ट चल रहे हैं। निजी नागरिक होने के नाते हमें किसी भी निजी जमीन को खरीदने, विकसित करने और बेचने का अधिकार है। क्या सिर्फ इसलिए हम अपना कारोबार बंद कर दें क्योंकि मुख्यमंत्री हमारे परिवार से ताल्लुक रखते हैं?”

इंडियन एक्सप्रेस की पड़ताल में यह भी पता चला है कि गोविंद यादव और निलेश यादव, दोनों मोहन यादव के चाचा शंकरलाल यादव और चाची अन्नपूर्णा यादव के बेटे हैं।

पड़ताल के मुताबिक, 2023 के आखिर में जब मोहन यादव मुख्यमंत्री बने, उसी दौरान इन दोनों भाइयों ने परिवार की जमीन खरीद मुहिम की अगुवाई शुरू कर दी थी।

रिपोर्ट में बताया गया है कि गोविंद यादव ने 2024 के बाद से उज्जैन और उसके आसपास कम से कम 46 एकड़ जमीन खरीदी है। इनमें कुछ जमीनें उन्होंने अपने बेटों सिद्धार्थ और अनंत यादव के साथ मिलकर खरीदीं, जबकि कुछ सौदे उनके कारोबारी साझेदार नेमीचंद जैन, काशीराम पाटीदार और पवन बोहरा के साथ हुए।

वहीं निलेश यादव अपनी पत्नी सुनीता यादव के साथ कम से कम दो कंपनियां चला रहे हैं। इनमें श्री अन्नपूर्णा कंस्ट्रक्शन और श्री अन्नपूर्णा एंटरप्राइजेज शामिल हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, 2024 से अब तक निलेश यादव और उनकी पत्नी सुनीता यादव ने उज्जैन और उसके आसपास कम से कम 78 एकड़ जमीन खरीदी है।

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