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कौन हैं देश के सर्वश्रेष्ठ जिलाधिकारी? एक्सप्रेस अवार्ड्स ने शुरू की खोज

एक्सप्रेस समूह स्वतंत्रता के 70वें वर्ष में गांधी जयंती पर ‘रामनाथ गोयनका एक्सिलेंस इन गवर्नेंस अवार्ड्स’ की शुरुआत करेगा जो शासन प्रणाली की कुशलता की वहां जांच करेगा जहां इसकी परख सबसे अहम है और वह है जिलाधिकारी।

Author नई दिल्ली | October 2, 2017 04:11 am
रामनाथ गोयनका एक्सिलेंस इन गवर्नेंस अवार्ड्स।

यदि सुशासन राजनीतिक व आर्थिक दृष्टिकोण से अत्यावश्यक है तो इसकी सफलताओं का उत्सव मनाने से पहले इस तथ्य की जांच कर लेना बेहद महत्त्वपूर्ण होगा कि जमीनी धरातल पर इसके क्या मायने हैं। एक्सप्रेस समूह स्वतंत्रता के 70वें वर्ष में गांधी जयंती पर ‘रामनाथ गोयनका एक्सिलेंस इन गवर्नेंस अवार्ड्स’ की शुरुआत करेगा जो शासन प्रणाली की कुशलता की वहां जांच करेगा जहां इसकी परख सबसे अहम है और वह है जिलाधिकारी।  इस पुरस्कार की सर्वप्रथम घोषणा पिछले साल रामनाथ गोयनका उत्कृष्ट पत्रकारिता पुरस्कार समारोह के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में एक्सप्रेस समूह के अध्यक्ष विवेक गोयनका ने की थी। गोयनका ने कहा था, ‘यह पुरस्कार पूरे देश में उन जिलाधिकारियों के योगदान को रेखांकित करेगा जिन्होंने अपने जिलों में सबसे बेहतर तरीके से बदलाव की पटकथा लिखी या उसकी पटकथा पर अमल किया। वो बदलाव जिनका महिलाओं, पुरुषों व बच्चों के जीवन पर असर हुआ है और जिनसे वास्तव में जमीनी धरातल पर लोगों के जीवन में बेहतरी आई है, वे सुधार जो इन अफसरों की बदौलत आए हैं, ये कार्यकुशल सरकार के असली राजदूत हैं।’

इन अफसरों के कार्यों को चिह्रित करने के साथ ही इस द्विवार्षिक पुरस्कार का ध्येय सर्वश्रेष्ठ तरीकों को तमाम राज्य सरकारों तक पहुंचाना, नवोन्मेष पर को साझा करना, पारदर्शिता, नेतृत्व व इससे मिली सीख को एक दूसरे से बांटना है। यह पुरस्कार इन व्यक्तियों को सम्मानित करने के साथ ही उस तंत्र और प्रक्रिया को भी चिह्रित व रेखांकित करेगा जिसके जरिए आम जनता, जनप्रतिनिधियों और लोकसेवकों के आपसी तालमेल व समन्वय के तरीकों में क्रांतिकारी परिवर्तन हुए हैं।  इस पुरस्कार में ज्यादा से ज्यादा लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए तय किया गया है कि जिलाधिकारी खुद ही अपना नामांकन भेज सकते हैं या कोई भी नागरिक व संगठन किसी के नाम का प्रस्ताव कर सकता है।

इन पुरस्कारों के चयन के लिए गठित जूरी की अगुआई देश के पूर्व मुख्य न्यायाधीश (सेवानिवृत्त) न्यायमूर्ति आरएम लोढ़ा करेंगे। इसके अलावा इसमें पूर्व मुख्य सूचना आयुक्त वजाहत हबीबुल्ला, पूर्व विदेश सचिव निरुपमा मेनन राव, पूर्व कैबिनेट सचिव केएम चंद्रशेखर और एचएसबीसी की समूह महाप्रबंधक व भारत की प्रमुख नैना लाल किदवई भी शामिल हैं। जूरी में शामिल प्रत्येक व्यक्ति के पास अपनी एक विशिष्ट प्रतिभाव सरकारी तंत्र की गहरी समझ तो है ही, साथ ही जो इससे बाहर काम कर रहे हैं उनके बारे में भी इनका ज्ञान काफी करीबी है।

केपीएमजी इस परियोजना में ‘नालेज पार्टनर होगा’। भारत में 700 जिले हैं। इनमें से प्रत्येक जिला काफी बड़ा है और अपनी चुनौतियों, अवसरों और संदर्भों के मामले में इनकी विविधताएं असाधारण हैं। एक प्रतिनिधिमूलक मिश्रण सुनिश्चित करने के लिए इस पुरस्कार में शिक्षा, स्वास्थ्य, समाज कल्याण, केंद्रीय योजनाओं के क्रियान्वयन और सामुदायिक सहभागिता सहित 15 विभिन्न श्रेणियां होंगी। साथ ही उत्तर पूर्व के जिलों, वामपंथी उग्रवाद के शिकार जिलों, जम्मू कश्मीर के जिलों और सीमाई क्षेत्रों के लिए विशेष श्रेणियां भी होंगी।

 

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