केरल में दस साल बाद यूडीएफ की सत्ता में वापसी हुई है। कांग्रेस पार्टी के वीडी सतीशन अब केरल के मुख्यमंत्री हैं। केरल का मुख्यमंत्री बनने के बाद वीडी सतीशन ने पिछली सरकार के महत्वकांक्षी सिल्वर लाइन कॉरिडोर को डिनोटिफाई कर दिया।
सिल्वर लाइन कॉरिडोर प्रोजेक्ट सेमी-हाईस्पीड रेल प्रोजेक्ट थी। वीडी सतीशन ने कहा कि उनकी सरकार इस प्रोजेक्ट के विरोध में नहीं है लेकिन यह प्रोजेक्ट पर्यावरण के लिए नुकसानदायक और आर्थिक रूप से फायदेमंद नहीं है।
उन्होंने कहा कि यूडीएफ ने इस प्रोजेक्ट का अध्यन किया और पाया कि इस प्रोजेक्ट की विस्तृत रिपोर्ट तक नहीं बनाई गई थी। सरकार द्वारा अधिग्रहित की गई जमीन को डिनोटिफाई तक नहीं किया गया था। इससे इस प्रोजेक्ट क्षेत्र में रहने वाले लोगों को समस्याओं का सामना करना पड़ रहा था।
क्या था सिल्वर लाइन कॉरिडोर प्रोजेक्ट?
केरल की भौगोलिक स्थिति और ज्यादा आबादी को देखते हुए हाई स्पीड ट्रांसपोर्ट सिस्टम की लंबे समय से जरूरत महसूस की जा रही थी। 64,000 करोड़ रुपये के इस प्रोजेक्ट का उद्देश्य तिरुवनंतपुरम से लेकर राज्य के सबसे उत्तरी जिले कासरगोड तक रेल सेवा चलाने था।
इसके अस्तित्व में आने के बाद कासरगोड से तिरुवनंतपुरम के बीच यात्रा सिर्फ 4 घंटे में पूरी हो जाती। अभी इस यात्रा में 12 घंटे का समय लगता है। इस प्रोजेक्ट को केरल रेल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (के-रेल) द्वारा लागू किया जाना था। यह केरल सरकार और भारतीय रेलवे की 51:49 हिस्सेदारी वाला एक जॉइंट वेंचर है।
के-रेल का गठन खास तौर पर केरल में रेलवे बुनियादी ढांचे के विकास के लिए किया गया था। साल 2021 में इस प्रोजेक्ट के लिए केरल कैबिनेट ने न सिर्फ मंजूरी दी बल्कि केरल इन्फ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट फंड बोर्ड से 2,000 करोड़ रुपये की प्रारंभिक राशि आवंटित की।
प्लान के अनुसार, 530 किमी लंबी इस सेमी-हाई स्पीड रेल लाइन को मौजूदा रेल लाइन के साथ ही बनाया जाता। इस प्रोजेक्ट का अधिकांश हिस्सा एम्बैंकमेंट पर बनाया जाना था। इस कॉरिडोर के अस्तित्व में आने के बाद ट्रेनें अधिकतम दो सौ किमी प्रति घंटा की स्पीड से दौड़तीं। योजना के अनुसार, इस कॉरिडोर पर कुल 11 रेलवे स्टेशन बनाए जाने थे और यहां चलाई जाने वाली हाई स्पीड ट्रेन के एक रेक के नौ डिब्बों में एक बार फिर 675 पैसेंजर सफर कर सकते।
क्या थी वैकल्पिक योजना?
जनवरी 2026 में एलडीएफ सरकार ने सिल्वरलाइन प्रोजेक्ट के बदले एक व्यावहारिक और उपयुक्त विकल्प के रूप में रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (RRTS) को मंजूरी दी। एलडीएफ सरकार ने कहा था कि केंद्र सरकार से शुरुआती मंजूरी मिलने के बाद उसके साथ एक MoU साइन किया जाएगा।
प्रोजेक्ट का क्यों हो रहा था विरोध?
इस प्रोजेक्ट के लिए 1383 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहित की जानी थी। इसमें से 1198 हेक्टेयर जमीन आम लोगों से ली जानी थी। केरल में इस प्रोजेक्ट के विरोध में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए। बीजेपी और कांग्रेस ने भी इन प्रदर्शनों का समर्थन किया। प्रोजेक्ट का विरोध करने वालों का कहना था कि इससे न सिर्फ बड़ी संख्या में परिवारों को विस्थापित होना पड़ता और पर्यावरण को भी नुकसान पहुंच सकता था।
प्रोजेक्ट का विरोध कर रहे पर्यावरण कार्यकर्ताओं का कहना था कि प्रस्तावित हाई स्पीड रेल मार्ग दलदली इलाकों, धान के खेतों और पर्यावरण के लिहाज से संवेदनशील क्षेत्रों से होकर गुजरता। वहीं विपक्षी नेताओं की दलील थी कि इससे आर्थिक नुकसान हो सकता है।
रेलवे ने भी इस बात से सहमति जताई और कहा था कि केरल छह लेन वाले राष्ट्रीय राजमार्ग का निर्माण पहले से चल रहा है। ऐसे में यह परियोजना व्यावहारिक नहीं लगती। आखिरकार रेलवे ने परियोजना को मंजूरी नहीं दी। उसका कहना था कि इससे मौजूदा रेलवे ट्रैक के विस्तार की योजनाओं पर असर पड़ेगा।
प्रोजेक्ट को रद्द करते हुए वीडी सतीशन ने कहा कि प्रोजेक्ट बंद हो चुका था और इसके लिए जमीन अधिग्रहित करने के लिए कोई भी लेन-देन नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि केरल ने इस प्रोजेक्ट को रोक दिया था और केंद्र सरकार ने भी इसे अप्रूवल नहीं दिया था।
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केरल की यूडीएफ सरकार ने बुधवार को मंत्रालयों का बंटवारा कर दिया है। केरल लोक भवन द्वारा जारी अधिसूचना के मुताबिक मुख्यमंत्री वीडी सतीशन के पास वित्त, कानून, सामान्य प्रशासन सहित 35 विभाग हैं। पूरी खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें।
